पंजाब में गेहूं की खरीद शुरूपंजाब में मोहाली जिले की मंडियों में गेहूं की खरीद का काम सुचारू रूप से चल रहा है, और किसानों को भुगतान भी तुरंत किया जा रहा है. किसानों की खरीदी गई उपज के लिए 17 करोड़ रुपये सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किए जा चुके हैं. जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (DFSC), वरिंदर कुमार ने बताया कि पंजाब सरकार के निर्देशों के अनुसार, निर्धारित समय सीमा से पहले ही भुगतान जमा किया जा रहा है।. उन्होंने सरकारी नियमों के अनुसार गेहूं का एक-एक दाना खरीदने की बात दोहराई.
अब तक, मोहाली जिले की मंडियों में 13,717 मीट्रिक टन गेहूं आया है, जिसमें से 9,272 मीट्रिक टन की खरीद की जा चुकी है. खरीद एजेंसियों में, PUNGRAIN ने 3,058 मीट्रिक टन, MARKFED ने 3,384 मीट्रिक टन, PUNSUP ने 2,118 मीट्रिक टन, और पंजाब राज्य वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन ने 712 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा है.
इस बीच, भारत सरकार की ओर से नियुक्त तीन सदस्यों की एक टीम बारिश से प्रभावित गेहूं के सैंपल लेने के लिए मंडियों का दौरा कर रही है. टीम ने इससे पहले बनूर और लालड़ू मंडियों का निरीक्षण किया था, और आज कुराली मंडी से सैंपल लिए.
किसानों को सलाह दी गई है कि किसी भी असुविधा से बचने के लिए मंडी में वे केवल सूखा गेहूं ही लाएं, जबकि अधिकारियों ने पूरे सीजन के दौरान बिना किसी बाधा के सेवाओं और खरीदे गए स्टॉक की समय पर उठान का आश्वासन दिया है.
बैसाखी के मौके पर जालंधर जिले की मंडियों में गेहूं की आवक शुरू हो गई है, लेकिन किसानों और कमीशन एजेंटों (आढ़तियों) ने अनाज की क्वालिटी और कम पैदावार को लेकर चिंता जताई है. अलग-अलग मंडियों में लगभग 1,400 मीट्रिक टन (MT) गेहूं आया, जबकि केवल लगभग 250 MT की ही खरीद हो पाई.
कुछ किसानों ने बताया कि अनाज सिकुड़ा हुआ दिख रहा था, उसमें चमक की कमी थी, और कुछ मामलों में उसमें नमी की मात्रा भी ज्यादा थी. ये ऐसे कारण हैं जो कीमत और खरीद, दोनों को प्रभावित कर सकते हैं.
अधिकारियों ने बताया की कि केंद्र सरकार की टीमों ने स्थिति का जायजा लेने के लिए करतारपुर, भोगपुर, कामसलपुरा और मेहटपुर सहित प्रमुख मंडियों का दौरा किया. गेहूं के दानों के नमूने जुटाए गए हैं, और अगले कुछ दिनों में रिपोर्ट आने की उम्मीद है.
जिला खाद्य और आपूर्ति नियंत्रक नरिंदर सिंह ने बताया कि खरीद एजेंसियों को खरीद कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं.
किसानों ने अनाज की क्वालिटी और पैदावार में आई गिरावट का कारण फसल उगने के मौसम के दौरान रही बहुत अधिक और अनिश्चित मौसम की स्थितियों को बताया.
मीरपुर गांव के एक किसान ने बताया कि दो एकड़ जमीन से हुई पैदावार उम्मीद से काफी कम रही, और उन्होंने अनाज में "ताजगी" की साफ कमी भी महसूस की.
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