मंडी में ई-खरीद पोर्टल की तकनीकी खराबीहरियाणा के सिरसा जिले से किसानों की परेशानी की बड़ी खबर सामने आई है. यहां चौटाला गांव के खरीद केंद्र पर गेहूं बेचने आए किसान पिछले कई दिनों से दिक्कतों का सामना कर रहे हैं. तकनीकी खराबी यानी ई-परचेज पोर्टल में गड़बड़ी के कारण किसानों की फसल की खरीद सही तरीके से नहीं हो पा रही है. इससे किसानों को बहुत परेशानी हो रही है.
रविवार के दिन किसानों को सबसे ज्यादा दिक्कत हुई. बायोमेट्रिक टोकन बनाने की प्रक्रिया करीब 4 घंटे तक बंद रही, क्योंकि सर्वर काम नहीं कर रहा था. बायोमेट्रिक मशीन में फिंगरप्रिंट भी सही से नहीं लग रहा था. इससे किसान अपना टोकन नहीं बनवा पाए और उनकी गेहूं की खरीद रुक गई. इस वजह से करीब 200 ट्रॉलियां गेहूं से भरी हुई खरीद केंद्र के बाहर खड़ी हो गईं और मंडी का गेट तक बंद हो गया.
किसानों ने बताया कि जैसे ही मौसम साफ हुआ, उन्होंने जल्दी-जल्दी अपनी गेहूं की फसल काटी और मंडी में लेकर पहुंचे. लेकिन वहां पहुंचने के बाद मशीन खराब होने के कारण उनका काम रुक गया. किसान दयाराम, महावीर, श्रवण, खेतपाल, रामकुमार और पृथ्वी ने कहा कि उनकी मेहनत बेकार हो गई. उन्होंने पूरी उम्मीद के साथ फसल लाई थी, लेकिन तकनीकी समस्या ने सब खराब कर दिया.
जब किसानों ने इस समस्या के बारे में वहां मौजूद कर्मचारियों से पूछा, तो उन्होंने कहा कि “सर्वर चल रहा है”. लेकिन असल में काम नहीं हो रहा था. इससे किसानों में गुस्सा बढ़ गया. किसानों का कहना है कि न सिर्फ बायोमेट्रिक में समस्या है, बल्कि बारदाना (बोरी) की कमी और लदान-उठान की समस्या भी है. इन सब कारणों से मंडी पूरी तरह गेहूं से भर गई है.
किसानों को अपनी फसल मंडी के बाहर कच्चे में भी उतारनी पड़ रही है. जब गेहूं देर तक पड़ा रहता है, तो उसमें नमी बढ़ जाती है. ज्यादा नमी होने के कारण आढ़ती (व्यापारी) गेहूं खरीदने से मना कर देते हैं. इससे किसानों को और ज्यादा नुकसान होता है. किसान और व्यापारी दोनों इस समस्या से परेशान हैं.
किसानों ने सरकार से मांग की है कि खरीद की पुरानी प्रक्रिया को फिर से लागू किया जाए. पहले बिना बायोमेट्रिक के भी फसल की खरीद हो जाती थी और काम जल्दी हो जाता था. किसानों का कहना है कि आज मौसम बहुत बदल रहा है, ऐसे में बायोमेट्रिक प्रक्रिया उनके लिए मुश्किल बन गई है. अगर समय पर समाधान नहीं हुआ, तो उन्हें बड़ा नुकसान हो सकता है.
सिरसा की यह स्थिति दिखाती है कि तकनीकी गड़बड़ी किसानों के लिए कितनी बड़ी समस्या बन सकती है. सरकार और प्रशासन को जल्दी से इस समस्या का हल निकालना चाहिए, ताकि किसानों की मेहनत खराब न हो और उन्हें उनकी फसल का सही दाम मिल सके.
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