कपास खरीदी बंद होने से किसानों पर छाया संकटखुले बाजार में कपास के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से लगातार नीचे बने हुए हैं और अब सरकारी खरीदी बंद होने से संकट और गहरा गया है. कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (Cotton Corporation of India) के कपास खरीदी केंद्र 27 फरवरी से बंद किए जाने के बाद अमरावती जिले में पंजीकृत 7 हजार से अधिक किसान कपास बेचने के इंतजार में फंस गए हैं. उधर, अकोला जिले में भी बाजार भाव एमएसपी से 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल तक नीचे चले जाने से किसानों की आर्थिक परेशानी बढ़ गई है. किसानों और किसान संगठनों का कहना है कि अगर सरकारी खरीदी जल्द दोबारा शुरू नहीं हुई यानी अवधि नहीं बढ़ाई गई तो कपास उत्पादक किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ेगा.
1 जनवरी से कपास पर 11 प्रतिशत आयात शुल्क लागू होने के बाद कुछ समय के लिए बाजार भाव में तेजी आई थी और कीमतें एमएसपी से ऊपर चली गई थीं. हालांकि, महज एक महीने के भीतर ही भाव में फिर से गिरावट शुरू हो गई. वर्तमान में निजी व्यापारियों द्वारा की जा रही खरीदी में कपास को एमएसपी से 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल कम भाव मिल रहा है. ऐसे में किसानों के लिए सीसीआई केंद्रों पर सरकारी दर से कपास बेचना ही एकमात्र सुरक्षित विकल्प था, लेकिन अचानक केंद्र बंद कर दिए जाने से जिलेभर में कपास की बिक्री अटक गई है.
पिछले खरीफ सीजन में औसत से अधिक बारिश और अतिवृष्टि के कारण कपास की फसल को भारी नुकसान हुआ था. इसके साथ ही गुलाबी सुंडी और बोंडसड़ के प्रकोप से उत्पादन पर बड़ा असर पड़ा. इसी वजह से इस वर्ष कपास के औसत उत्पादन में साफ गिरावट दर्ज की गई है. दूसरी ओर, सीसीआई के खरीदी केंद्र भी इस वर्ष नवंबर के दूसरे सप्ताह में शुरू हुए थे. आर्थिक तंगी से जूझ रहे कई किसानों को मजबूरी में कम भाव पर ही कपास बेचनी पड़ी, जबकि बेहतर कीमत की उम्मीद लगाए बैठे किसानों के सामने अब केंद्र बंद होने से नई मुश्किल खड़ी हो गई है.
अकोला जिले में निजी और गांव स्तर की खरीदी में फिलहाल कपास को केवल 7,000 से 7,200 रुपये प्रति क्विंटल भाव मिल रहा है. जबकि एक माह पहले यही कपास 8,200 से 8,500 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रही थी. सरकार द्वारा घोषित एमएसपी के अनुसार मध्यम रेशा कपास का समर्थन मूल्य 7,710 रुपये प्रति क्विंटल और लंबे रेशा कपास का 8,110 रुपये प्रति क्विंटल है. लेकिन वास्तविक बाजार भाव समर्थन मूल्य से नीचे चले जाने के कारण किसानों के सामने कपास बिक्री को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
सीसीआई द्वारा खरीदी बंद किए जाने के बाद निजी व्यापारी और जिनिंग प्रेस मालिकों का दबदबा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. इससे खुले बाजार में कपास के भाव कम से कम 100 रुपये प्रति क्विंटल और गिरने की संभावना व्यक्त की जा रही है. अमरावती परिसर में जनवरी के अंत से फरवरी के अंत तक कपास के भाव में लगातार गिरावट दर्ज की गई है.
सीसीआई द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कपास खरीदी बंद किए जाने से बाजार भाव में बड़ी गिरावट की आशंका जताते हुए अकोला पूर्व विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक रणधीर सावरकर ने विधानसभा सत्र में कपास खरीदी की अवधि अप्रैल अंत तक बढ़ाने की मांग उठाई. उन्होंने कहा कि अभी भी बड़ी संख्या में किसानों की कपास बिक्री बाकी है और यदि सरकारी खरीदी बंद रही तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा.
चालू कपास सीजन में जिले के 9 केंद्रों पर सीसीआई के माध्यम से समर्थन मूल्य पर कपास खरीदी की गई. सूत्रों के अनुसार, 20 फरवरी तक कुल 12 लाख 97 हजार 237 क्विंटल कपास की खरीदी हो चुकी थी. पिछले वर्ष सीसीआई द्वारा 31 मार्च तक कपास खरीदी जारी रखी गई थी. हालांकि, अंतिम दो महीनों में ग्रेड घटाए जाने से किसानों को प्रति क्विंटल 100 से 150 रुपये कम भाव मिला था.
इस वर्ष 27 फरवरी को ही खरीदी केंद्र बंद कर दिए जाने से 7 हजार से अधिक पंजीकृत किसान अब भी प्रतीक्षा में हैं. ऐसे में किसानों की साफ मांग है कि CCI के कपास खरीदी केंद्र तत्काल दोबारा शुरू किए जाएं और कम से कम कुछ अवधि के लिए खरीदी की समय-सीमा बढ़ाई जाए, ताकि संकट में फंसे कपास उत्पादक किसानों को राहत मिल सके.
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