किसान तक के मंडी पेज पर आपका स्वागत है। यहां आप देश की हर मंडी में चल रहा फसल का दाम देख सकते हैं। आपको पुराने मंडी भाव की जानकारी भी इस पेज पर मिलेगी। देश भर की मंडियों में आज का सबसे ज्यादा भाव रहा रुपये/क्विंटल और सबसे कम भाव रहा रुपये/क्विंटल ।
| राज्य | मंडी | कृषि जिंस | आवक (क्विंटल में) | व्यापार (क्विंटल में) | दिनांक |
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तमिलनाडु के मदुरै में तोतापुरी (किली मूकू) आम का खेत स्तर पर भाव घटकर सिर्फ 3 रुपये प्रति किलो रह गया है. लागत भी नहीं निकलने से किसान फसल पेड़ों पर ही छोड़ने और बाग काटने को मजबूर हैं.
नारियल तेल और खोपरा की कीमतों में पिछले साल के रिकॉर्ड स्तर से अब बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है. बाजार में बदले हालात का असर किसानों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं तीनों पर पड़ रहा है. आखिर किन वजहों से कीमतों में यह बदलाव आया और आगे क्या रुख रह सकता है, जानिए...
जून 2026 के चौथे हफ्ते में देश की थोक मंडियों में प्याज के दाम मजबूत हुए. राष्ट्रीय औसत भाव बढ़कर 2,074.98 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया. महाराष्ट्र में साप्ताहिक आधार पर सबसे बड़ी 24.1% तेजी दर्ज हुई, जबकि मध्य प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात और कर्नाटक में भी तेज उछाल दिखा. किसानों को कुछ राहत मिली है, लेकिन मुनाफे वाले स्तर के भाव अभी नहीं बने हैं.
हरियाणा के करनाल जिले की मंडियों में जायद (समर) मक्का की आवक बढ़कर 3.58 लाख क्विंटल से ज्यादा पहुंच गई है, लेकिन MSP पर खरीद नहीं होने से किसान नाराज हैं. किसानों का आरोप है कि 2,410 रुपये प्रति क्विंटल MSP घोषित होने के बावजूद उन्हें निजी व्यापारियों को 1,100 से 2,000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर फसल बेचनी पड़ रही है.
सरकार द्वारा प्याज की खरीद कीमत (MAPP) तीन बार बढ़ाने के बावजूद 2026 के बफर स्टॉक के लिए खरीद की रफ्तार धीमी बनी हुई है. 1 जून से अब तक केवल 2,000 टन प्याज की खरीद हो पाई है, जो 2 लाख टन के लक्ष्य का सिर्फ 1 प्रतिशत है. नेफेड और NCCF जैसी एजेंसियां तय लक्ष्य से काफी पीछे हैं. व्यापारी और किसान दोनों ही मौजूदा कीमतों से असंतुष्ट हैं—जहां उच्च क्वालिटी का ‘ग्रेड A’ प्याज बेहतर दाम पर निर्यात हो रहा है, वहीं किसान ज्यादा कीमत की उम्मीद में स्टॉक रोक रहे हैं. खराब मौसम से क्वालिटी प्रभावित होने के साथ-साथ सरकार भी कीमत और बढ़ाने से हिचक रही है, जिससे आने वाले महीनों में सप्लाई और कीमतों पर असर पड़ सकता है.
घरेलू बाजार में कमजोर कीमतों और पड़ोसी देशों से बढ़ती मांग के चलते भारत का मक्का निर्यात मार्केटिंग वर्ष 2025-26 में 24 लाख टन तक पहुंच सकता है. USDA के स्थानीय कार्यालय ने निर्यात अनुमान 10 लाख टन से बढ़ाकर 24 लाख टन कर दिया है. नवंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच भारत ने 9.96 लाख टन मक्का निर्यात किया, जो पिछले साल से तीन गुना अधिक है.
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