किसानों-बुजुर्गों की जिंदगीभर की कमाई पर संकट! 1400 करोड़ की जमा राशि को लेकर मचा हंगामा

किसानों-बुजुर्गों की जिंदगीभर की कमाई पर संकट! 1400 करोड़ की जमा राशि को लेकर मचा हंगामा

महाराष्ट्र के चंद्रपुर में निर्मल उज्ज्वल क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी के खिलाफ जमाकर्ताओं ने मोर्चा निकाला. ₹1,400 करोड़ से ज्यादा की जमा राशि और ₹317 करोड़ के कथित डायवर्जन के आरोपों से चिंता बढ़ी.

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किसानों-बुजुर्गों की जिंदगीभर की कमाई पर संकट! 1400 करोड़ की जमा राशि को लेकर मचा हंगामा1400 करोड़ की जमा राशि पर संकट!

महाराष्ट्र के चंद्रपुर में निर्मल उज्ज्वल क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी के खिलाफ जमाकर्ताओं का गुस्सा अब सड़क पर उतर आया है. अपनी मेहनत की कमाई वापस पाने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में जमाकर्ताओं ने मोर्चा निकाला और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. जमाकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने वर्षों की बचत इस सोसायटी में एफडी, आरडी और दूसरी जमा योजनाओं में रखी थी, लेकिन जमा की अवधि पूरी होने के बाद भी उन्हें अपनी रकम वापस लेने में परेशानी हो रही है.

इस मामले में किसानों, व्यापारियों, बुजुर्गों और आम परिवारों की चिंता सबसे ज्यादा बढ़ गई है. लोगों का कहना है कि उन्होंने सोसायटी पर भरोसा करके अपनी गाढ़ी कमाई जमा की थी. किसी ने खेती से बचाया पैसा यहां रखा तो किसी ने व्यापार की पूंजी. वहीं कई बुजुर्गों ने रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा के लिए अपनी जीवनभर की बचत जमा की थी. अब जब उन्हें इस पैसे की जरूरत है, तो रकम वापस मिलने में कथित देरी और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

चंद्रपुर में सड़क पर उतरे हजारों जमाकर्ता

निर्मल उज्ज्वल क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी के खिलाफ चंद्रपुर में जमाकर्ताओं ने एकजुट होकर मोर्चा निकाला. प्रदर्शन में शामिल लोगों ने अपनी जमा राशि वापस दिलाने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की. इसके बाद पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई.

जमाकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने सोसायटी में पैसा इसलिए जमा किया था क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि जरूरत के समय उनकी रकम सुरक्षित रहेगी. एफडी या आरडी की अवधि पूरी होने के बाद लोग अपनी जमा राशि निकालना चाहते हैं, लेकिन आरोप है कि उन्हें रकम वापस लेने के लिए बार-बार सोसायटी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. इससे लोगों के बीच असमंजस और चिंता का माहौल बना हुआ है.

किसानों और बुजुर्गों की जमा पूंजी पर भी चिंता

इस मामले की सबसे बड़ी चिंता यह है कि सोसायटी में जमा पैसा सिर्फ बड़े कारोबारियों का नहीं है. बड़ी संख्या में आम परिवारों, किसानों, छोटे व्यापारियों और बुजुर्गों की रकम भी इसमें जमा होने की बात सामने आई है.

किसानों ने खेती से होने वाली कमाई में से थोड़ा-थोड़ा पैसा बचाकर जमा किया था. कई व्यापारियों ने अपनी कारोबार की पूंजी या भविष्य की जरूरतों के लिए रकम एफडी में रखी. वहीं बुजुर्गों के लिए उनकी जमा राशि रोजमर्रा के खर्च, इलाज और दूसरे जरूरी कामों में आर्थिक सहारा बन सकती थी. ऐसे में अगर जमा रकम समय पर नहीं मिलती है तो इसका सीधा असर इन परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है.

चंद्रपुर के करीब 3 हजार जमाकर्ताओं की कितनी रकम फंसी?

जमाकर्ताओं और स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, चंद्रपुर जिले में करीब 2 से 3 हजार लोगों की रकम इस संस्था में जमा होने की बात कही जा रही है. बताया गया है कि इन जमाकर्ताओं की करीब 125 करोड़ रुपये की राशि जमा है.

इनमें बड़ी संख्या में एफडी कराने वाले ग्राहक शामिल हैं. कई लोगों की एफडी की अवधि पूरी हो चुकी है, लेकिन रकम वापस मिलने को लेकर शिकायतें सामने आई हैं. यही वजह है कि चंद्रपुर में जमाकर्ताओं की चिंता लगातार बढ़ रही है और वे अपनी जमा पूंजी की वापसी की मांग कर रहे हैं.

पूरी सोसायटी की 65 शाखाएं

यह मामला सिर्फ चंद्रपुर की किसी एक शाखा तक सीमित नहीं बताया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक निर्मल उज्ज्वल क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी की कुल 65 शाखाएं हैं. मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ के समक्ष पेश किए गए रिकॉर्ड में सोसायटी की ₹1,400 करोड़ से अधिक की जमा राशि जोखिम में होने का उल्लेख सामने आया है.

मामले में सोसायटी की वित्तीय गतिविधियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. जांच रिकॉर्ड में करोड़ों रुपये की रकम के कथित डायवर्जन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों का भी उल्लेख है. हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी.

317 करोड़ से ज्यादा के कथित डायवर्जन का आरोप

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोपों में से एक बड़ी रकम के कथित डायवर्जन से जुड़ा है. जांच में ₹317 करोड़ से अधिक की रकम दूसरे उद्यमों में कथित तौर पर डायवर्ट किए जाने का आरोप सामने आया है.

सरल भाषा में समझें तो आरोप यह है कि सोसायटी में जमा हुई रकम का कुछ हिस्सा उस उद्देश्य के अलावा दूसरी जगह इस्तेमाल किया गया, जिसके लिए वह जमा की गई थी. इसके अलावा गैर-सदस्यों से जमा स्वीकार करने और कर्ज देने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की भी जांच की जा रही है.

इन आरोपों के सामने आने के बाद सोसायटी की वित्तीय स्थिति को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं. मामले की जांच में संबंधित एजेंसियां और प्राधिकरण सक्रिय बताए जा रहे हैं.

नई जमा और एफडी नवीनीकरण पर रोक क्यों लगी?

मामले में संबंधित प्राधिकरण की ओर से सोसायटी को नई जमा स्वीकार करने और मौजूदा एफडी के नवीनीकरण से रोकने की कार्रवाई भी सामने आई है. यही स्थिति अब जमाकर्ताओं के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गई है.

जमाकर्ताओं का आरोप है कि इस रोक का हवाला देकर सोसायटी की ओर से उनकी रकम लौटाने में भी परेशानी पैदा की जा रही है. हालांकि नई जमा स्वीकार करने या एफडी नवीनीकरण पर रोक लगने का मतलब यह अपने आप नहीं है कि पुरानी जमा राशि खत्म हो गई है. किसी जमाकर्ता को पैसा कब और किस प्रक्रिया से वापस मिलेगा, यह संबंधित कानूनी आदेशों, जांच और सोसायटी की वित्तीय स्थिति पर निर्भर करेगा.

इसलिए इस मामले में जमाकर्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि उनकी मौजूदा जमा राशि की वापसी के लिए आधिकारिक प्रक्रिया क्या होगी और उन्हें पैसा कब तक मिल पाएगा.

पुलिस से जांच और पैसा वापस दिलाने की मांग

मोर्चा निकालने वाले जमाकर्ताओं ने पुलिस से पूरे मामले की जांच करने की मांग की है. उनका कहना है कि उनकी जमा पूंजी वर्षों की मेहनत से जुटाई गई है और उन्हें अपना पैसा वापस मिलना चाहिए.

जमाकर्ताओं की मांग है कि सोसायटी की वित्तीय गतिविधियों की पूरी जांच हो, जिन लोगों की भूमिका संदिग्ध है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए और जिन लोगों की रकम फंसी हुई है, उन्हें उनका पैसा वापस दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं.

सुधीर मुनगंटीवार ने भी उठाया मामला

चंद्रपुर में इस मुद्दे को राजनीतिक स्तर पर भी उठाया गया है. पूर्व मंत्री और बल्लारपुर विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने भी मामले की जांच की मांग की है. उनके अनुसार चंद्रपुर के करीब 2 से 3 हजार जमाकर्ताओं का पैसा इस संस्था में जमा होने की बात सामने आई है.

इससे यह मामला अब सिर्फ जमाकर्ताओं और सोसायटी के बीच का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी इसकी चर्चा तेज हो गई है. जमाकर्ताओं की नजर अब पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई के साथ-साथ उनकी रकम वापस दिलाने के लिए होने वाली प्रक्रिया पर है.

जमाकर्ताओं के सामने सबसे बड़ा सवाल- पैसा कब मिलेगा?

निर्मल उज्ज्वल क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी का मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में आम लोगों की बचत जुड़ी हुई है. किसानों, छोटे व्यापारियों, बुजुर्गों और मध्यम वर्गीय परिवारों ने अपनी जरूरतों और भविष्य को ध्यान में रखकर पैसा जमा किया था.

अब इन लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनकी जमा राशि कब वापस मिलेगी. जिन लोगों की एफडी की अवधि पूरी हो चुकी है, वे अपनी रकम पाने के लिए परेशान हैं. वहीं दूसरी ओर सोसायटी की वित्तीय स्थिति, कथित अनियमितताओं और जांच से जुड़ी खबरों ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है.

फिलहाल मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है. ₹1,400 करोड़ से ज्यादा की जमा राशि, ₹317 करोड़ से अधिक के कथित डायवर्जन और चंद्रपुर के करीब 3 हजार जमाकर्ताओं की लगभग ₹125 करोड़ की जमा राशि से जुड़े दावों ने इस पूरे मामले को गंभीर बना दिया है. अब जमाकर्ताओं को उम्मीद है कि जांच जल्द पूरी होगी और उनकी वर्षों की मेहनत से जमा की गई रकम वापस पाने का रास्ता साफ होगा. (विकास राजुरकर का इनपुट)

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