किसानों के लिए CM योगी की बड़ी पहलउत्तर प्रदेश के छोटे और सीमांत किसानों के लिए खेती में बड़ा निवेश करना अब कुछ आसान हो सकता है. सिंचाई की व्यवस्था हो, कृषि मशीनरी खरीदनी हो या खेती से जुड़ी किसी दूसरी गतिविधि को आगे बढ़ाना हो, इसके लिए किसानों को कम ब्याज पर लंबी अवधि का कर्ज उपलब्ध कराने की तैयारी है. मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत पात्र किसानों को अधिकतम 6 लाख रुपये तक कृषि लोन देने का प्रावधान किया गया है. पात्र किसानों के लिए इसकी प्रभावी ब्याज दर 6 प्रतिशत सालाना रखने की व्यवस्था है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 23 सितंबर को लखनऊ में इस योजना से जुड़े ई-पोर्टल की शुरुआत करेंगे. इसी कार्यक्रम में भारत टैक्सी से जुड़ी पहल भी आगे बढ़ाई जाएगी. किसानों के लिहाज से कार्यक्रम का अहम हिस्सा कृषक समृद्धि योजना है, जिसका मकसद खेती में दीर्घकालीन निवेश के लिए कर्ज को सस्ता बनाना है.
मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना को मुख्य रूप से ऐसे लघु और सीमांत किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जिन्हें खेती में पूंजी लगाने के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने में परेशानी होती है.
उत्तर प्रदेश में लघु और सीमांत किसानों की संख्या काफी अधिक है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक प्रदेश के करीब 92 प्रतिशत कृषक परिवार इस श्रेणी में आते हैं. ऐसे में सरकार सस्ते संस्थाओं से मिलने वाले लोन के जरिए किसानों को खेती में स्थायी निवेश के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है.
नई योजना में पात्र किसानों को अधिकतम 6 लाख रुपये तक का लंबे समय के लिए कृषि लोन उपलब्ध कराया जाएगा. यह पैसा खेती और कृषि आधारित गतिविधियों में पूंजी निवेश और परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा.
योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू कर्ज पर मिलने वाली ब्याज राहत है. पात्र लघु और सीमांत किसान अधिकतम 6 लाख रुपये तक का लोन 6 प्रतिशत की प्रभावी वार्षिक ब्याज दर पर हासिल कर सकेंगे.
मौजूदा व्यवस्था में उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक से किसानों को मिलने वाले कृषि ऋण की ब्याज दर करीब 11 से 11.50 प्रतिशत तक होने की बात कही गई है. नई व्यवस्था में सरकार ब्याज अनुदान देकर पात्र किसान पर पड़ने वाले ब्याज के बोझ को कम करेगी.
इसके लिए राज्य सरकार की तरफ से 5 प्रतिशत तक ब्याज अनुदान का प्रावधान किया गया है. इसका उद्देश्य पात्र किसान के लिए लोन की प्रभावी ब्याज दर को 6 प्रतिशत तक रखना है.
ब्याज में मिलने वाली यह राहत सभी परिस्थितियों में अपने आप नहीं मिलेगी. योजना को समय पर लोन चुकाने से भी जोड़ा गया है.
जो पात्र किसान निर्धारित समय पर अपनी किस्तों का भुगतान करेंगे, उन्हें ब्याज सब्सिडी का फायदा दिया जाएगा. इस व्यवस्था के जरिए सरकार किसानों को सस्ता कर्ज देने के साथ लोन की नियमित अदायगी को भी बढ़ावा देना चाहती है.
इसका मतलब है कि योजना का लाभ लेने वाले किसानों के लिए कर्ज लेते समय उसकी शर्तों और किस्त जमा करने की समयसीमा का ध्यान रखना महत्वपूर्ण होगा.
सरकार की योजना इसे सीमित स्तर पर रखने के बजाय बड़ी संख्या में किसानों तक पहुंचाने की है. अगले पांच वर्षों के दौरान करीब 5 लाख किसानों को कृषक समृद्धि योजना से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है.
योजना के जरिए किसानों को ऐसे कृषि कार्यों के लिए पूंजी उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा, जिनके लिए लंबी अवधि के निवेश की जरूरत पड़ती है. इसका मकसद कृषि क्षेत्र में परिसंपत्तियों के निर्माण, उत्पादकता में सुधार और किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं को मजबूत करना है.
किसानों को ब्याज में राहत देने और योजना को लागू करने के लिए सरकार ने वित्तीय प्रावधान भी किया है. 15 सितंबर 2026 को योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड को 384 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी.
यह वित्तीय सहायता 2026-27 से 2030-31 के बीच उपलब्ध कराने की योजना है. रकम का इस्तेमाल किसानों के दीर्घकालीन कृषि लोन पर ब्याज अनुदान सहित योजना से संबंधित दूसरे प्रावधानों के लिए किया जाएगा.
छोटे किसानों के सामने बड़ी समस्या यह रहती है कि खेती से होने वाली मौजूदा कमाई से बड़े निवेश के लिए एकमुश्त रकम जुटाना आसान नहीं होता. सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, कृषि संसाधन तैयार करना और दूसरी कृषि आधारित गतिविधियों के लिए अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता पड़ सकती है.
ऐसे में कृषक समृद्धि योजना के जरिए मिलने वाला लंबे समय का लोन किसानों के लिए संस्थागत वित्त का विकल्प उपलब्ध करा सकता है. सरकार का लक्ष्य है कि कम ब्याज से किसानों के लिए कृषि क्षेत्र में पूंजी निवेश करना अपेक्षाकृत आसान हो.
23 सितंबर के कार्यक्रम में किसानों की योजना के साथ भारत टैक्सी पहल भी प्रमुख हिस्सा होगी. राज्य सरकार भारत टैक्सी मॉडल को उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है.
भारत टैक्सी मॉडल में बाइक, ऑटो और कैब जैसी परिवहन सेवाओं को शामिल किया गया है. इसे शहरों के साथ ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाने की भी योजना है. प्राथमिक कृषि ऋण समितियों यानी PACS की मदद से इसके दायरे को गांवों तक विस्तार देने की तैयारी है.
फिलहाल किसानों के लिहाज से सबसे अहम मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना का ई-पोर्टल होगा. इसके लॉन्च होने के साथ ही योजना के क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ेगा. सरकार के सामने अब बड़ी चुनौती यह होगी कि सस्ते कृषि ऋण और ब्याज अनुदान का फायदा पात्र छोटे और सीमांत किसानों तक कितनी आसानी से पहुंच पाता है.(समर्थ श्रीवास्तव का इनुपट)
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