
मध्य प्रदेश के मंदसौर से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाने वाले भाजपा नेता बंशीलाल गुर्जर के राजनीतिक कद में अब एक और बड़ा इजाफा हुआ है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने उन्हें भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है.इसके साथ ही बंसीलाल गुर्जर का नाम मध्य प्रदेश के उन नेताओं में शामिल हो गया है, जिन्होंने किसान संगठन की जमीनी राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी हासिल की है.
बंसीलाल गुर्जर इससे पहले भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के तौर पर काम कर रहे थे.अब उन्हें सीधे राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने से मध्य प्रदेश के राजनीतिक और किसान संगठन के बीच उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है.
बंसीलाल गुर्जर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उनकी राजनीति की जड़ें सीधे किसानों और ग्रामीण क्षेत्र से जुड़ी हैं. वे केवल भाजपा संगठन के नेता नहीं, बल्कि लंबे समय तक किसान संगठनों और कृषि से जुड़े संस्थानों में सक्रिय रहे हैं.
मंदसौर के समीप लालघाटी गांव के मूल निवासी बंसीलाल गुर्जर ने भाजपा में जमीनी कार्यकर्ता के रूप में राजनीतिक सफर शुरू किया.संगठन में काम करते हुए वे मंदसौर भाजपा जिलाध्यक्ष, मध्य प्रदेश भाजपा के प्रदेश महामंत्री और किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों तक पहुंचे.यानी अब जिस राष्ट्रीय किसान मोर्चे की कमान उन्हें मिली है, उसका अनुभव उनके लिए नया नहीं है. वे पहले ही मध्य प्रदेश में किसान मोर्चे का नेतृत्व कर चुके हैं.
बंसीलाल गुर्जर मध्य प्रदेश भाजपा किसान मोर्चा के दो बार प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने मंदसौर कृषि उपज मंडी के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी लंबे समय तक संभाली.
इसी वजह से किसान और कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है.गांव, मंडी और किसान संगठन की राजनीति का लंबा अनुभव अब राष्ट्रीय स्तर पर उनके काम आने वाला है.
बंसीलाल गुर्जर के राजनीतिक सफर में 2017 का मंदसौर किसान आंदोलन भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है. किसान आंदोलन और उसके बाद हुए गोलीकांड ने मंदसौर को देशभर में किसान राजनीति के केंद्र में ला दिया था.
इस दौर के बाद बंसीलाल गुर्जर की पहचान मालवा-निमाड़ के प्रमुख किसान चेहरों में और मजबूत हुई.उनकी राजनीति में किसान मुद्दों की मौजूदगी लगातार बनी रही.यही कारण है कि भाजपा ने किसान मोर्चे की राष्ट्रीय कमान ऐसे नेता को सौंपी है, जिसकी राजनीतिक पहचान पहले से ही किसान और ग्रामीण संगठन से जुड़ी हुई है.
बंसीलाल गुर्जर के राजनीतिक सफर में एक और बड़ा पड़ाव वर्ष 2024 में आया, जब उन्हें मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजा गया.राज्यसभा सदस्य बनने के बाद उनका राजनीतिक दायरा मध्य प्रदेश से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया.अब किसान मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है.एक तरफ वे संसद में किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाने वाले नेता हैं, तो दूसरी तरफ अब देशभर में भाजपा के किसान संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर होगी.
बंसीलाल गुर्जर की कहानी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक ऐसे नेता की कहानी है, जिसने लंबे समय तक संगठन के भीतर काम करते हुए अपना राजनीतिक मुकाम बनाया.
उनका सफर भाजपा की संगठनात्मक राजनीति में लंबे समय तक काम करने वाले जमीनी नेताओं के लिए भी एक उदाहरण के तौर पर देखा जा सकता है.
बंसीलाल गुर्जर की नियुक्ति को मध्य प्रदेश और राजस्थान के सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
मंदसौर-नीमच क्षेत्र राजस्थान की सीमा से सटा हुआ है और इस पूरे इलाके में गुर्जर समाज की मजबूत सामाजिक मौजूदगी है.मध्य प्रदेश के गुना, राजगढ़, भिंड और मुरैना सहित कई इलाकों में भी गुर्जर मतदाता चुनावी समीकरणों को प्रभावित करते हैं.वहीं राजस्थान में भी गुर्जर समाज की राजनीतिक भूमिका काफी अहम रही है.ऐसे में बंशीलाल गुर्जर को किसान मोर्चे की राष्ट्रीय कमान देना किसान राजनीति के साथ-साथ सामाजिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी चर्चा में है.हालांकि इसे पार्टी की आधिकारिक जातीय रणनीति के तौर पर देखना उचित नहीं होगा, लेकिन राजनीतिक नजरिए से यह नियुक्ति कई समीकरणों को साधती नजर आती है.
बंसीलाल गुर्जर का प्रभाव केवल मंदसौर तक सीमित नहीं रहा है. संगठनात्मक जिम्मेदारियों के दौरान उन्होंने मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान, महाराष्ट्र, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और गुजरात जैसे राज्यों में चुनाव और संगठन से जुड़े काम किए हैं.यही संगठनात्मक अनुभव अब उन्हें राष्ट्रीय किसान मोर्चे की जिम्मेदारी निभाने में मदद कर सकता है.
भाजपा के सामने किसानों तक अपनी पहुंच मजबूत करने और केंद्र की कृषि योजनाओं को संगठन के माध्यम से गांव-गांव तक पहुंचाने की चुनौती भी है.ऐसे में किसान राजनीति की जमीन से आए बंशीलाल गुर्जर की भूमिका अहम होगी.
बंसीलाल गुर्जर की राजनीतिक यात्रा को मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ उनके संबंधों के संदर्भ में भी देखा जाता है.शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री रहने के दौरान बंशीलाल गुर्जर ने भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी. यही वजह है कि उन्हें शिवराज सिंह चौहान के करीबी नेताओं में भी गिना जाता है.कृषि और किसान राजनीति में उनका अनुभव और संगठन के साथ लंबे समय से जुड़ाव भाजपा के लिए उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है.
राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद बंसीलाल गुर्जर के सामने सबसे बड़ी चुनौती किसान मोर्चे को केवल संगठनात्मक स्तर पर सक्रिय रखना नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों के किसानों से सीधे जुड़ना होगी.किसानों की आय, फसल के दाम, एमएसपी, प्राकृतिक आपदा, सिंचाई, खाद-बीज, कृषि लागत, फसल विविधीकरण और आधुनिक कृषि तकनीक जैसे मुद्दे लगातार किसान राजनीति के केंद्र में हैं.ऐसे में किसान राजनीति की जमीनी समझ रखने वाले बंशीलाल गुर्जर से उम्मीद होगी कि वे इन मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के किसान संगठन के एजेंडे से जोड़ें.
बंसीलाल गुर्जर की नियुक्ति को उनके व्यक्तिगत राजनीतिक सफर की बड़ी उपलब्धि के साथ-साथ मध्य प्रदेश के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.मंदसौर की स्थानीय राजनीति से शुरू हुआ उनका सफर अब भाजपा के राष्ट्रीय किसान संगठन की कमान तक पहुंच चुका है.अब देखना होगा कि राज्यसभा सांसद और किसान नेता बंशीलाल गुर्जर राष्ट्रीय किसान मोर्चा की कमान संभालने के बाद देशभर के किसानों और भाजपा संगठन के बीच किस तरह की नई कड़ी तैयार करते हैं.
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