आम, केला और मखाना से हुआ वियतनाम के राष्ट्रपति का स्वागत, भारत ने परोसे GI टैग व्यंजन

आम, केला और मखाना से हुआ वियतनाम के राष्ट्रपति का स्वागत, भारत ने परोसे GI टैग व्यंजन

वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के भारत दौरे के दौरान राजकीय भोज में आम, केला और मखाना जैसे भारत के खास कृषि उत्पादों को परोसा गया. रत्नागिरी का GI टैग प्राप्त अलफांसो आम, मिथिला मखाना और हाजीपुर मालभोग केला भारतीय कृषि विरासत और पारंपरिक स्वाद का प्रतीक बने. इसके साथ बिहार की प्रसिद्ध मिठाइयों और भारत की सांस्कृतिक पहचान दर्शाने वाले विशेष उपहारों ने इस दौरे को और खास बना दिया.

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आम, केला और मखाना से हुआ वियतनाम के राष्ट्रपति का स्वागत, भारत ने परोसे GI टैग व्यंजनवियतनाम के राष्ट्रपति को बिहार के खास कृषि प्रोडक्ट परोसे गए

वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम भारत के तीन दिवसीय राजकीय दौरे पर हैं, जिसकी शुरुआत 5 मई से हुई. इस दौरान उन्हें भारत की सांस्कृतिक, कृषि और कारीगरी विरासत को दर्शाने वाले खास व्यंजन और उपहार भेंट किए गए. राजकीय भोज में देश के अलग-अलग राज्यों से चुने गए पारंपरिक और GI टैग प्राप्त खाने की चीजों को परोसा गया.

महाराष्ट्र और बिहार के खास व्यंजन परोसे गए

इस अवसर पर महाराष्ट्र से रत्नागिरी आम, जिसे आमतौर पर अलफांसो या हापुस के नाम से जाना जाता है, परोसा गया. GI टैग प्राप्त यह आम अपनी खास खुशबू, सुनहरे रंग और मिठास के लिए दुनियाभर में मशहूर है. इसके साथ ही पोषण से भरपूर मिलेट बार भी शामिल किए गए, जो महाराष्ट्र की पारंपरिक फसलों का बेहतरीन उदाहरण हैं.

बिहार के पारंपरिक व्यंजनों ने भी खास जगह बनाई. इसमें नालंदा जिले के सिलाव का प्रसिद्ध सिलाव खाजा शामिल था, जिसे GI टैग मिला हुआ है. यह खस्ता और परतदार मिठाई अपने अनोखे स्वाद के लिए जानी जाती है. इसके अलावा गया अनरसा, मिथिला मखाना (GI टैग प्राप्त) और हाजीपुर मालभोग केला भी राष्ट्रपति को परोसे गए. ये सभी उत्पाद बिहार की कृषि और पारंपरा के बारे में बताते हैं.

सिलाव खाजा 

सिलाव खाजा बिहार के नालंदा जिले के सिलाव कस्बे की एक प्रसिद्ध पारंपरिक मिठाई है. इसे इसकी खास पहचान और परंपरा के कारण GI टैग मिला हुआ है. यह मिठाई परतदार, कुरकुरी और हल्की होती है. इसे मैदा, चीनी और घी से पुराने पारंपरिक तरीकों से तैयार किया जाता है. इसका स्वाद हल्का मीठा होता है और यह मुंह में रखते ही घुल जाती है.

गया अनरसा

गया अनरसा बिहार के गया जिले की पारंपरिक मिठाई है, जो अपने खास स्वाद और सांस्कृतिक महत्व के लिए जानी जाती है. इसे भिगोए हुए चावल के आटे और गुड़ से बनाया जाता है. आटे को कुछ समय तक रखा जाता है, फिर छोटी-छोटी टिकिया बनाकर हल्का तल लिया जाता है. ऊपर से तिल लगाए जाते हैं, जिससे हल्का मेवेदार स्वाद आता है. यह मिठाई नरम और मुंह में घुल जाने वाली होती है.

मिथिला मखाना

मिथिला मखाना, जिसे फॉक्स नट या कमल के बीज भी कहा जाता है, बिहार के मिथिला इलाके का खास कृषि उत्पाद है. इसे भी GI टैग मिला हुआ है. मखाना प्रोटीन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है. यह बिहार की खेती की परंपरा और किसानों की मेहनत को दर्शाता है.

हाजीपुर मालभोग केला

हाजीपुर मालभोग केला बिहार के हाजीपुर क्षेत्र में उगाया जाने वाला एक खास किस्म का केला है. यह अपने मीठे स्वाद, सुगंध और मुलायम गूदे के लिए जाना जाता है. यह केला बिहार की बागवानी की क्वालिटी और बंपर उत्पादन के लिए जाना जाता है.

राष्ट्रपति को दिए गए विशेष उपहार

राजकीय दौरे के दौरान वियतनाम के राष्ट्रपति को भारत की सांस्कृतिक पहचान दर्शाने वाले विशेष उपहार भी भेंट किए गए.

नमोह 108 कमल: यह विशिष्ट कमल प्रजाति लखनऊ स्थित नेशनल बोटैनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (NBRI) ने विकसित की है. इसमें 108 पंखुड़ियां होती हैं, जो भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में पवित्र मानी जाने वाली संख्या का प्रतीक हैं. यह फूल प्राचीन परंपरा और आधुनिक विज्ञान का अद्भुत संगम है.

पीतल की बुद्ध प्रतिमा (बोधि वृक्ष के साथ): उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के कारीगरों द्वारा तैयार की गई यह प्रतिमा उत्कृष्ट शिल्पकला का उदाहरण है. अभय मुद्रा में बैठे भगवान बुद्ध की यह प्रतिमा शांति, करुणा और निर्भयता का संदेश देती है.

वाराणसी की बनारसी सिल्क फैब्रिक: वाराणसी की प्रसिद्ध रेशमी कपड़े से तैयार यह फैब्रिक भारतीय वस्त्र कला की समृद्ध परंपरा को दर्शाता है. इसे पारंपरिक वियतनामी ‘आओ दाई’ परिधान के रूप में पहनने योग्य बताया गया, जो भारत और वियतनाम की सांस्कृतिक साझेदारी का प्रतीक है.

इस राजकीय दौरे के दौरान परोसे गए व्यंजन और दिए गए उपहार भारत की विविधता, कृषि विरासत, कारीगरी और सांस्कृतिक मूल्यों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करते हैं. यह पहल न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का प्रतीक है, बल्कि स्थानीय उत्पादों और GI टैग वाली विशेषताओं को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है.(हिमांशु मिश्रा की रिपोर्ट)

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