PM मोदी की अपील ने दिलाई शास्त्री युग की याद, महंगे तेल के बीच प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील

PM मोदी की अपील ने दिलाई शास्त्री युग की याद, महंगे तेल के बीच प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील

पीएम मोदी की यह अपील सुनकर कई लोगों को देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की याद आ गई. फर्क सिर्फ इतना है कि तब संकट खाद्यान्न का था और आज चिंता तेल, महंगाई और वैश्विक आर्थिक दबाव को लेकर है.

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PM मोदी की अपील ने दिलाई शास्त्री युग की याद, महंगे तेल के बीच प्राकृतिक खेती अपनाने की अपीलPM मोदी ने कहा ‘संसाधन बचाओ’ (AI- तस्वीर)

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और महंगे होते कच्चे तेल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील ने देशभर में नई चर्चा छेड़ दी है. पेट्रोल-डीजल के कम इस्तेमाल करने, सोने की खरीदारी ना करने, विदेश यात्राओं में कटौती करने और खाने की बर्बादी रोकने जैसी बातों को कई लोग सिर्फ सलाह नहीं, बल्कि आने वाले आर्थिक संकट का संकेत मान रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा कि दुनिया इस समय बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रही है.

पश्चिम एशिया में युद्ध और होर्मुज के आसपास बढ़ते तनाव का असर सीधे भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. यही वजह है कि उन्होंने लोगों से ईंधन बचाने, खाने के तेल का कम इस्तेमाल करने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की अपील की है. उनका मानना है कि छोटी-छोटी बचतें देश को बड़े आर्थिक संकट से बचाने में मदद कर सकती हैं.

PM मोदी की अपील, शास्त्री युग की झलक

पीएम मोदी की यह अपील सुनकर कई लोगों को देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की याद आ गई. दरअसल, साल 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान देश गंभीर खाद्यान्न संकट से जूझ रहा था. उस समय भारत गेहूं के लिए काफी हद तक अमेरिका पर निर्भर था. युद्ध के बीच अमेरिका ने दबाव बनाते हुए गेहूं की सप्लाई रोकने की धमकी दी थी. लेकिन लाल बहादुर शास्त्री दबाव में नहीं झुके. उन्होंने देशवासियों से सप्ताह में एक समय भोजन न करने की अपील की. खास बात यह रही कि उन्होंने इसकी शुरुआत अपने घर से की. लाल बहादुर शास्त्री ने पहले अपने परिवार से पूछा कि क्या वे एक वक्त बिना भोजन के रह सकते हैं. जब परिवार ने साथ दिया, तब उन्होंने रेडियो के जरिए पूरे देश से यह अपील की. उस दौर में करोड़ों लोगों ने उनका साथ दिया और देश ने मुश्किल समय का सामना एकजुट होकर किया.

"देखना चाहता हूं कि बच्चे भूखे रह सकते हैं या नहीं"

एक वक्त के खाने पर लाल बहादुर के बेटे अनिल शास्त्री ने कहा कि इस अपील से पहले उन्होंने मेरी मां ललिता शास्त्री से कहा कि क्या आप ऐसा कर सकती हैं कि आज शाम हमारे यहां खाना न बने. मैं कल देशवासियों से एक वक्त का खाना न खाने की अपील करने जा रहा हूं. मैं देखना चाहता हूं कि मेरे बच्चे भूखे रह सकते हैं या नहीं, जब उन्होंने देख लिया कि हम लोग एक वक्त बिना खाने के रह सकते हैं तो उन्होंने देशवासियों से भी ऐसा करने के लिए कहा था.

खाने की बर्बादी रोकने पर भी दिया जोर

PM मोदी ने खाने की बर्बादी को लेकर भी चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि हमारे यहां काफी मात्रा में खाना बर्बाद हो जाता है, जबकि जरूरतमंद लोग भोजन के लिए संघर्ष करते हैं. उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि जितनी जरूरत हो, उतना ही खाना लें और भोजन की बर्बादी रोकें.

खाने के तेल को लेकर भी PM मोदी की अपील

केवल ईंधन ही नहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने खाने के तेल और रासायनिक खादों की खपत कम करने की भी बात कही. उन्होंने कहा कि भारत बड़ी मात्रा में खाद्य तेल और केमिकल फर्टिलाइजर विदेशों से आयात करता है. अगर लोग खाने के तेल का कम इस्तेमाल करें और किसान प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें, तो इससे देश की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी.

तेजी से बढ़ रही कच्चे तेल की कीमतें

पीएम मोदी का ये बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर से ज्यादा पहुंच गई है. इसकी बड़ी वजह पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होर्मुज के आसपास बढ़ा तनाव है.

वैश्विक संकट के बीच PM मोदी का संयम मंत्र

अब करीब छह दशक बाद, PM मोदी की अपील को उसी भावना से जोड़कर देखा जा रहा है. फर्क सिर्फ इतना है कि तब संकट खाद्यान्न का था और आज चिंता तेल, महंगाई और वैश्विक आर्थिक दबाव को लेकर है. तब लाल बहादुर शास्त्री ने “जय जवान, जय किसान” का नारा देकर देश को आत्मनिर्भरता और त्याग का संदेश दिया था. वहीं, आज PM मोदी आत्मनिर्भरता, प्राकृतिक खेती और संसाधनों की बचत  की बात कर रहे हैं. दोनों ही नेताओं ने कठिन अंतरराष्ट्रीय हालात के बीच देशवासियों से संयम और जिम्मेदारी दिखाने की अपील की. यही वजह है कि सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक, PM मोदी और लाल बहादुर शास्त्री के संदेशों की तुलना तेज हो गई है.

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