जूट सेक्टर में टेक्नोलॉजी की एंट्री, JCIS से फसल निगरानी हुई आसान, NJB ने दी अहम जानकारी

जूट सेक्टर में टेक्नोलॉजी की एंट्री, JCIS से फसल निगरानी हुई आसान, NJB ने दी अहम जानकारी

जूट सेक्टर में फसल निगरानी को बेहतर बनाने के लिए टेक्नोलॉजी आधारित सिस्टम लागू किया गया है, जिसमें सैटेलाइट डेटा, मौसम विश्लेषण और फील्ड इनपुट को जोड़ा गया है. इससे उत्पादन और क्षेत्रफल के आकलन में सटीकता और तेजी आई है.

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जूट सेक्टर में टेक्नोलॉजी की एंट्री, JCIS से फसल निगरानी हुई आसान, NJB ने दी अहम जानकारीजूट फसल की निगरानी हुई आसान (सांकेतिक तस्‍वीर)

जूट क्षेत्र में उत्पादन और निगरानी को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने तकनीक का सहारा तेज कर दिया है. नेशनल जूट बोर्ड (NJB) ने जूट क्रॉप इंफोर्मेशन सिस्‍टम (JCIS) के क्रियान्वयन को तेज करते हुए इसे जूट फसलों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग का प्रमुख आधार बना दिया है. यह प्लेटफॉर्म इंडियन स्‍पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) और जूट भारतीय जूट निगम लिमिटेड के सहयोग से विकसित किया गया है. कपड़ा मंत्रालय के अनुसार, यह सिस्टम सैटेलाइट इमेजरी, मौसम डेटा, वेजिटेशन इंडेक्स और खेत स्तर की जानकारी को एक साथ जोड़कर जूट की खेती और उत्पादन रुझानों की करीब-करीब रियल-टाइम तस्वीर पेश करता है. इससे अब फसल की स्थिति का आकलन ज्यादा सटीक और तेज हो गया है.

दो डिजिटल टूल से मजबूत हुआ सिस्टम

इस प्रोजेक्ट के तहत दो अहम डिजिटल टूल विकसित किए गए हैं. पहला BHUVAN JUMP मोबाइल ऐप है, जो खेत स्तर पर डेटा संग्रह के लिए इस्तेमाल हो रहा है. दूसरा PATSAN वेब प्लेटफॉर्म है, जो अधिकारियों और संबंधित पक्षों को फसल से जुड़ी निगरानी और विश्लेषण की सुविधा देता है.

JCIS लागू होने से पहले जूट फसल के क्षेत्रफल और उत्पादन का अनुमान मुख्यतः फील्ड रिपोर्ट और मैनुअल डेटा पर आधारित था, जिससे देरी और असंगतियां सामने आती थीं. सैटेलाइट, मौसम और जमीनी आंकड़ों के बीच तालमेल की कमी के कारण आपदा या कीट प्रकोप के समय सही योजना बनाना मुश्किल होता था.

अब ऑटोमेटेड रिपोर्टिंग और अर्ली वॉर्निंग सिस्टम

नई व्यवस्था के तहत अलग-अलग डेटा स्रोतों को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़कर मॉनिटरिंग को अधिक व्यवस्थित बनाया गया है. इससे ऑटोमेटेड रिपोर्टिंग, तेजी से फसल आकलन और मौसम या फसल तनाव से जुड़े अर्ली वॉर्निंग अलर्ट संभव हो पाए हैं.

नेशनल जूट बोर्ड के I-CARE नेटवर्क के जरिए BHUVAN JUMP ऐप से बड़े स्तर पर जियो-टैग्ड डेटा इकट्ठा किया जा रहा है. साथ ही, जियोस्पेशियल तकनीक के जरिए क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट किए जा रहे हैं, जिससे उत्पादन और उपज के अनुमान अधिक सटीक बन रहे हैं.

बाढ़ और मौसम जोखिम का भी आकलन

JCIS से मिलने वाले डेटा को अब सेक्टर की योजना और निगरानी प्रक्रियाओं में शामिल किया जा रहा है. इससे राज्य और केंद्र स्तर के आंकड़ों के बीच बेहतर तालमेल बन रहा है और जूट उगाने वाले क्षेत्रों में जरूरत के हिसाब से हस्तक्षेप करना आसान हुआ है.

इस प्लेटफॉर्म का उपयोग बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फसल और गुणवत्ता के नुकसान का आकलन करने के लिए भी किया जा रहा है. साथ ही मौसम आधारित एनालिटिक्स के जरिए जिला स्तर पर बारिश, सूखा और तापमान बदलाव को लेकर अर्ली वॉर्निंग सिस्टम तैयार किया गया है.

आगे और विस्तार की तैयारी

कपड़ा मंत्रालय के अनुसार, आने वाले समय में JCIS को और ज्यादा जिलों तक विस्तार देने, किसानों को मोबाइल और एसएमएस के जरिए सलाह देने और जल संसाधन प्रबंधन व कार्बन संबंधित पहल जैसे उन्नत एनालिटिक्स को जोड़ने की योजना है. अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से जूट क्षेत्र में फसल क्षेत्र, उत्पादन और उपज के आंकड़ों की सटीकता बढ़ेगी और नीति निर्माण में डेटा आधारित फैसले लेने में मदद मिलेगी.

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