विदर्भ के किसानों को नहीं मिला बीज का फायदामहाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में सोयाबीन किसानों की परेशानी अब बड़ी कार्रवाई में बदलती नजर आ रही है. किसानों ने आरोप लगाया था कि उन्होंने महंगे दामों पर सोयाबीन के बीज खरीदे, लेकिन खेतों में बीज बोने के बाद भी पौधे नहीं उगे. इस मामले में अब बीज कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है.
अकोला के सिटी कोतवाली और एमआईडीसी पुलिस थाने के साथ-साथ अमरावती के गाडगे नगर पुलिस थाने में कई बीज कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. यह कार्रवाई कृषि अधिकारियों की शिकायत के आधार पर की गई है.
दरअसल, विदर्भ के कई जिलों के किसानों ने शिकायत की थी कि उन्होंने अच्छी फसल की उम्मीद से महंगे दामों पर सोयाबीन के बीज खरीदे थे. लेकिन जब उन्होंने खेतों में बुवाई की, तो कई जगह बीज अंकुरित ही नहीं हुए. इससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा. कृषि विभाग के पास अमरावती संभाग के पांच जिलों से ढाई हजार से ज्यादा किसानों की शिकायतें पहुंचीं. किसानों ने बताया कि खराब गुणवत्ता वाले बीजों के कारण उनकी मेहनत और पैसा दोनों बर्बाद हो गए.
किसानों की शिकायत मिलने के बाद कृषि विभाग ने अलग-अलग कंपनियों के सोयाबीन बीजों के नमूने लिए और उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा. जांच रिपोर्ट में कुछ कंपनियों के बीज तय गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं पाए गए. रिपोर्ट सामने आने के बाद संबंधित कंपनियों के खिलाफ पुलिस में आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं. वहीं, जिन कंपनियों के बीजों की जांच रिपोर्ट अभी नहीं आई है, उनके खिलाफ भी रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी.
कृषि विभाग ने जिन कंपनियों के बीजों में कमी पाई गई है, उनके करोड़ों रुपये के बीजों की बिक्री पर भी रोक लगा दी है. विभाग का कहना है कि किसानों को नुकसान पहुंचाने वाली कंपनियों के खिलाफ नियमों के अनुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे. कृषि अधिकारियों ने बताया कि किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई जारी रहेगी.
किसानों की इस समस्या को सबसे पहले आज तक, मुंबई तक और किसान तक ने प्रमुखता से उठाया था. इन चैनलों की ग्राउंड रिपोर्ट के बाद कृषि विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच शुरू की. रिपोर्ट सामने आने के बाद किसानों ने मीडिया का धन्यवाद किया. किसानों का कहना है कि अगर उनकी समस्या को बड़े स्तर पर नहीं उठाया जाता, तो शायद उनकी शिकायतों पर इतनी तेजी से कार्रवाई नहीं होती.
प्रभावित किसानों ने मांग की है कि जो भी कंपनियां किसानों को खराब बीज बेचकर नुकसान पहुंचाती हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. किसानों का कहना है कि हर साल कई बार ऐसी शिकायतें सामने आती हैं, लेकिन सख्त कार्रवाई नहीं होने के कारण समस्या बनी रहती है. किसानों ने सरकार से मांग की है कि बीज कंपनियों की निगरानी के लिए और मजबूत कानून बनाए जाएं. उनका कहना है कि दोषी कंपनियों और लोगों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए, जिससे भविष्य में कोई भी किसान के साथ धोखा करने की हिम्मत न कर सके.
सोयाबीन किसानों का कहना है कि खेती में किसान अपनी पूरी मेहनत और पैसा लगाता है. अगर बीज ही खराब निकल जाएं, तो उसकी पूरी फसल खतरे में पड़ जाती है. इसलिए बीज की गुणवत्ता सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है. अब किसानों को उम्मीद है कि जांच पूरी होने के बाद दोषी कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई होगी और उन्हें उनका हक मिलेगा. कृषि विभाग भी इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी.
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