भारत के चावल निर्यात में उछालभारत ने वर्ष 2025 में वैश्विक चावल बाजार में एक बार फिर अपनी बादशाहत दिखाई है. सरकार द्वारा सभी निर्यात प्रतिबंध हटाए जाने के बाद भारतीय चावल निर्यात में तेज उछाल दर्ज किया है. दरअसल, भारत का चावल निर्यात वर्ष 2025 में 19.4 प्रतिशत बढ़कर 21.55 करोड़ टन पहुंच गया है. यह अब तक का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात स्तर है. यह तेज बढ़ोतरी ऐसे समय दर्ज की गई है, जब केंद्र सरकार ने मार्च 2025 में चावल पर लगाए गए सभी निर्यात प्रतिबंध हटा लिए हैं. इससे भारतीय चावल वैश्विक बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी हो गया है. अधिकारियों के मुताबिक, रिकॉर्ड उत्पादन के चलते देश में आपूर्ति की स्थिति मजबूत हुई है, जिसके बाद 2022 और 2023 में लगाए गए अंतिम निर्यात प्रतिबंध भी समाप्त कर दिए गए हैं.
दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातक भारत से आपूर्ति बढ़ने का असर वैश्विक बाजार पर भी साफ दिखा है. भारतीय चावल की भरपूर उपलब्धता के कारण थाईलैंड और वियतनाम जैसे प्रमुख प्रतिस्पर्धी देशों के निर्यात पर दबाव पड़ा है. वहीं, एशिया में चावल की कीमतें बीते लगभग दस वर्षों के निचले स्तर तक पहुंच गई हैं, जिससे अफ्रीका और अन्य आयातक क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को राहत मिली है.
एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि मार्च में सरकार द्वारा निर्यात प्रतिबंध हटाए जाने के बाद भारतीय माल की ढुलाई में तेजी से सुधार हुआ है. अधिकारी ने बताया कि निर्यात 2024 में 18.05 करोड़ टन से बढ़कर 2022 में 22.3 करोड़ टन के रिकॉर्ड के करीब और 2024 में 21.55 करोड़ टन रहा. उन्होंने बताया कि गैर-बासमती चावल की शिपमेंट में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 15.15 करोड़ टन तक पहुंच गई, जबकि बासमती चावल का निर्यात 8 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 6.4 करोड़ टन हो गया.
एक अन्य सरकारी अधिकारी ने बताया कि बांग्लादेश, बेनिन, कैमरून, आइवरी कोस्ट और जिबूती को गैर-बासमती चावल की शिपमेंट में तेजी से वृद्धि हुई, जबकि ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन ने वर्ष के दौरान प्रीमियम बासमती चावल की खरीद में वृद्धि की है.
भारत आमतौर पर थाईलैंड, वियतनाम और पाकिस्तान दुनिया के अगले तीन सबसे बड़े निर्यातकों के संयुक्त निर्यात से भी अधिक चावल निर्यात करता है. उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि कम कीमत और स्थिर आपूर्ति के चलते भारत ने वैश्विक बाजार में अपना खोया हुआ हिस्सा फिर से हासिल कर लिया है.
ओलम एग्री इंडिया के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट नितिन गुप्ता के अनुसार, भारतीय चावल अन्य निर्यातक देशों की तुलना में काफी प्रतिस्पर्धी है और कम कीमतों ने भारत को वैश्विक बाजार में मजबूती से वापसी करने में मदद की है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर उत्पादन मजबूत बना रहता है और नीतिगत स्थिरता कायम रहती है, तो आने वाले वर्षों में भारत का चावल निर्यात नए रिकॉर्ड बना सकता है. इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक खाद्य सुरक्षा में भी भारत की भूमिका और मजबूत होगी.
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