वेनेजुएला में महंगाई चरम पर (AI Generated Image)दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में शामिल वेनेजुएला आज अमेरिका के एक्शन और अपनी राजनीति से ज्यादा खाने की थाली को लेकर चर्चा में है. जब कोई देश आम जरूरतों- खेती और पशुपालन को छोड़ देता है तो कैसे वह कमजोर पड़ जाता है और वहां के आम नागरिक को किन तकलीफों का सामना करना पड़ता है. इसका नजारा वेनेजुएला में देखने को मिल रहा है. संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और वर्ल्ड बैंक से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि वेनेजुएला पिछले एक दशक में अपनी घरेलू खाद्य उत्पादन क्षमता लगातार खोता गया. तेल निर्यात पर अत्यधिक निर्भरता के चलते खेती, डेयरी, सिंचाई और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश कमजोर पड़ गया, जिसका नतीजा यह हुआ कि देश की बड़ी आबादी आज आयातित भोजन पर निर्भर है.
FAO के अनुसार, वेनेजुएला की खाद्य सुरक्षा स्थिति लंबे समय तक “high risk” श्रेणी में रही है, जहां स्थानीय उत्पादन जरूरत के अनुरूप नहीं रह पाया. जब खाना बाहर से आता है तो उसकी कीमतें सीधे करेंसी, आयात लागत और वैश्विक बाजार से जुड़ जाती हैं. वेनेजुएला में खाने-पीने की चीजों की महंगाई को समझने के लिए सिर्फ बाजार के रेट देखना काफी नहीं है.
Banco Central de Venezuela और IMF-आधारित डेटासेट पर काम करने वाले प्लेटफॉर्म ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स (Trading Economics) के मुताबिक, देश ने पिछले कुछ वर्षों में अत्यधिक खाद्य महंगाई (food inflation) का दौर देखा है. 2018-19 के दौरान वेनेजुएला में हाइपर इन्फ्लेशन (hyperinflation) की स्थिति बनी थी, जिसमें खाने-पीने की चीजों के दाम नियंत्रण से बाहर चले गए थे. हाल के वर्षों में भले ही महंगाई की रफ्तार कुछ घटी हो, लेकिन खाद्य कीमतें अब भी आम आय के मुकाबले बेहद ऊंची बनी हुई हैं.
कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि जब कोई देश डेयरी और सब्जी उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं होता तो सबसे पहले असर दूध, अंडा, आलू-प्याज और टमाटर जैसी रोजमर्रा की चीजों पर दिखता है. वेनेजुएला में डेयरी सेक्टर में पशु-चारा, दवा और ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ी और सब्जियों के लिए लोकल सप्लाई, कोल्ड-चेन और भंडारण ढांचा कमजोर पड़ा. यही वजह है कि वहां दूध और सब्जियां आम आदमी की पहुंच से बाहर होती चली गईं, जबकि ये वही चीजें हैं जो भारत जैसे कृषि-प्रधान देश में अपेक्षाकृत सस्ती रहती हैं.
भारत में भी महंगाई आती है, लेकिन घरेलू कृषि उत्पादन देश की थाली को बड़ा सहारा देता है. भारत सरकार के MoSPI (CPI-Food Inflation) आंकड़ों के मुताबिक, हाल के महीनों में खाद्य मुद्रास्फीति कई बार नकारात्मक भी रही है यानी औसतन खाने-पीने की चीजों की कीमतों में नरमी देखी गई.
| खाद्य वस्तु | भारत में औसत कीमत | वेनेजुएला में औसत कीमत |
| दूध (1 लीटर) | ₹60.98 | ₹175 |
| टमाटर (1 किलो) | ₹46 | ₹181.75 |
| आलू (1 किलो) | ₹34 | ₹163 |
| प्याज (1 किलो) | ₹38 | ₹165 |
| सफेद चावल (1 किलो) | ₹61.33 | ₹119.71 |
| व्हाइट ब्रेड (500 ग्राम) | ₹43.54 | ₹170.68 |
| अंडा (12 नग) | ₹83.61 | ₹240.82 |
| एक अंडा (औसतन) | ₹6–7 | ₹20 |
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