अमरोहा में किसानों का विरोध प्रदर्शनउत्तर प्रदेश के दो तहसीलों, दलोरा और हसनपुर, में जहरीले पानी की समस्या ने महामारी का रूप ले लिया है. किसानों ने बताया कि पानी इतना जहरीला हो चुका है कि इसे पीने से कैंसर, हार्ट अटैक और अन्य गंभीर बीमारियां फैल रही हैं. पिछले दो-तीन सालों में हजारों मौतें हो चुकी हैं. किसानों ने प्रशासन से एम्स की टीम बुलाने और व्यापक जांच की मांग की है.
प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने दूषित पानी के सैंपल भरकर नमूने जांच के लिए भेजे हैं. अभी रिपोर्ट का इंतजार है और किसान नेता धरना समाप्त करने को तैयार नहीं हैं. यह पूरा मामला अमरोहा जिले के नेशनल हाईवे 9 का है जहां किसानों ने प्रदूषित पानी को लेकर धरना दे रखा है. इस इलाके में बसे दर्जनों गांवों का पानी अपना रंग बदलकर इलाके की फसलों को दूषित कर रहा है तो वहीं फसलों में जहरीले पानी से पैदावार में कमी आई है.
सब्जियों, फलों और अनाजों के सेवन से भी खतरनाक बीमारियां जन्म ले रही हैं. इस इलाके में कैंसर जैसी बीमारियों ने अपना जाल बिछा लिया है और एक-एक गांव में दर्जनों लोग कैंसर जैसे घातक बीमारी का शिकार होना बताए जा रहे हैं. हैरानी की बात ये है कि जब से किसानों का धरना प्रदर्शन शुरू हुआ है, तब से तीन किसानों ने कैंसर से दम तोड़ दिया है.
किसानों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में मौजूद फैक्ट्रियां, जैसे जुबिलिएंट और उमंग डेरी, अपने औद्योगिक कचरे को जमीन में डाल रही हैं. यह जहरीला कचरा भूजल को प्रदूषित कर रहा है. पहले यह कचरा बगद नदी में डाला जाता था, लेकिन प्रतिबंध के बाद इसे बोरवेल के माध्यम से जमीन में डालने का काम किया जा रहा है.
किसानों ने 19 दिन से धरना देकर प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है. किसान नेता नरेश चौधरी ने बताया कि प्रशासन ने केवल औपचारिकता के लिए एक कमेटी बनाई है, जिसमें किसानों का कोई प्रतिनिधि नहीं है. उन्होंने कहा, "कमेटी में उन्हीं लोगों को रखा गया है जो दोषी हैं." किसानों ने मांग की है कि एम्स की टीम आकर पूरे क्षेत्र की जांच करे और प्रभावित लोगों को उपचार दिलाए.
प्रशासन ने कुछ गांवों में स्वास्थ्य कैंप लगाए हैं, जहां महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है. साथ ही, जल निगम की टीम ने ट्यूबवेल और हैंडपंप के पानी की जांच शुरू की है. सॉइल और वाटर सैंपल्स को लैब में भेजा गया है, लेकिन अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है.
इस पूरे मामले में अमरोहा की डीएम निधि गुप्ता वत्स ने कहा कि ट्यूबवेल में पीले पानी का संज्ञान मिला था जिसके बाद सैंपल लेकर जांच के आदेश दिए गए. डीएम ने कहा कि प्रशासन ने सॉइल और वाटर सैंपल्स की सैंपलिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है. ट्यूबवेल्स और इंडस्ट्रीज से निकलने वाले वेस्ट वाटर के सैंपल्स लैब में भेजे जा रहे हैं. आरओपीसीबी और जीएमडीआईसी के अधिकारी एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट्स से निकलने वाले पानी की जांच कर रहे हैं. किसानों ने आरोप लगाया है कि इस पानी के कारण स्किन प्रॉब्लम्स और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं. इन आरोपों की पुष्टि के लिए लैब में केमिकल्स का परीक्षण किया जा रहा है.
प्रभावित गांवों में प्रशासन ने हेल्थ कैंप्स लगाए हैं. इन कैंप्स में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है. सीएमओ के माध्यम से इन शिविरों में विभिन्न पैरामीटर्स पर स्वास्थ्य जांच की जा रही है. अभी तक दो गांवों को कवर किया गया है और अन्य गांवों में भी शिविर लगाए जाने की योजना है.
जलनिगम की टीम प्रभावित क्षेत्रों में शैलो हैंडपंप्स की नियमित जांच कर रही है. यदि पानी की क्वालिटी खराब पाई जाती है, तो उसे सुधारने का काम किया जा रहा है. प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि प्रभावित क्षेत्रों में पानी की क्वालिटी को बेहतर बनाया जाए.
प्रशासन ने कहा है कि सैंपल्स की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी. अभी तक कई सैंपल्स लैब में भेजे जा चुके हैं और उनकी रिपोर्ट का इंतजार है. प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह इस समस्या को लेकर पूरी तरह सजग है और प्रभावित क्षेत्रों में हर संभव मदद प्रदान कर रहा है.
किसानों ने सरकार से अपील की है कि जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान किया जाए. उन्होंने कहा कि अगर समय पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह समस्या विकराल रूप ले सकती है. किसानों ने प्रशासन से जमीन पर उतरकर काम करने की मांग की है.
यह मामला न केवल पर्यावरणीय संकट है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य और जीवन के लिए गंभीर खतरा बन चुका है. प्रशासन को जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने की जरूरत है.(बीएस आर्य का इनपुट)
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