आम बजट से पहले शेयर बाजार में कृषि क्षेत्र पर नजर (AI genrated Image)भारत में खेती सिर्फ खेत तक सीमित नहीं है. बीज, खाद, कीटनाशक, पशुपालन, चीनी मिल और फूड प्रोसेसिंग तक खेती से जुड़ी एक बड़ी इंडस्ट्री काम कर रही है. यही वजह है कि शेयर बाजार में भी खेती-किसानी से जुड़ी कई कंपनियां लिस्टेड हैं, जिनमें आम आदमी भी निवेश कर सकता है. आम बजट (Union Budget 2026-27) नजदीक आते ही बाजार में यह चर्चा तेज हो गई है कि सरकार एक बार फिर खेती, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस कर सकती है. ऐसे में एग्रीकल्चर से जुड़े शेयरों पर निवेशकों की नजर बढ़ रही है.
सरल भाषा में समझें तो जो कंपनियां सीधे किसान को इस्तेमाल आने वाला सामान बनाती हैं या खेती से निकले उत्पादों पर काम करती हैं, वे एग्री सेक्टर की कंपनियां कहलाती हैं. इनमें मुख्य रूप से पांच तरह की कंपनियां आती हैं.
खेती की शुरुआत बीज से होती है. अगर बीज अच्छा है, तो फसल की नींव मजबूत मानी जाती है. देश में कुछ बीज कंपनियां हैं जो हाइब्रिड और उन्नत किस्मों के बीज बनाती हैं.
Kaveri Seed Company, Mangalam Seeds और Dhanuka Agritech जैसी कंपनियां कपास, मक्का, धान, बाजरा और सब्जियों के बीज बेचती हैं. अगर सरकार जलवायु अनुकूल बीज, दालों में आत्मनिर्भरता और उत्पादन बढ़ाने पर खर्च बढ़ाती है, तो इस सेक्टर की मांग पर असर पड़ता है.
खाद के बिना खेती संभव नहीं है. यूरिया, डीएपी और फॉस्फेट खाद बनाने वाली कंपनियों का सीधा रिश्ता किसान से होता है. Paradeep Phosphates, Coromandel International, Chambal Fertilisers, RCF और GSFC जैसी कंपनियां देशभर के किसानों को खाद सप्लाई करती हैं. बजट में खाद सब्सिडी, घरेलू उत्पादन और आयात घटाने जैसे फैसले इन कंपनियों के कारोबार को प्रभावित करते हैं.
फसल को कीट, रोग और नुकसान से बचाने के लिए दवाइयों की जरूरत होती है. Dhanuka Agritech, UPL और Sumitomo Chemical India जैसी कंपनियां कीटनाशक, फंगीसाइड और फसल सुरक्षा उत्पाद बनाती हैं. सरकार का फोकस अगर फसल उत्पादकता और नुकसान कम करने पर रहता है, तो इस सेक्टर की मांग बढ़ती है.
गन्ना किसानों के लिए चीनी मिलें सबसे अहम कड़ी होती हैं. आज कई चीनी कंपनियां चीनी के साथ-साथ इथेनॉल भी बना रही हैं. Balrampur Chini Mills, Dwarikesh Sugar, Dhampur Sugar, Triveni Engineering और Shree Renuka Sugars जैसी कंपनियां इस सेक्टर के बड़े नाम हैं. इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति और गन्ना भुगतान से जुड़े फैसले इन कंपनियों पर सीधा असर डालते हैं.
खेती से निकले कच्चे माल को प्रोसेस कर बाजार तक पहुंचाने वाली कंपनियां भी एग्री सेक्टर का अहम हिस्सा हैं. Patanjali Foods (पहले Ruchi Soya), Avanti Feeds, Heritage Foods, Vardhman Foods, Nestle India और Godrej Agrovet जैसी कंपनियां तेल, दूध, पशु आहार, पोल्ट्री और फूड प्रोडक्ट्स के कारोबार में हैं. यह सेक्टर खेती को सिर्फ खेत तक सीमित नहीं रहने देता, बल्कि वैल्यू एडिशन के जरिए आमदनी बढ़ाता है.
खेती-किसानी से जुड़ी कंपनियों में पैसा लगाने से पहले कुछ बातें समझना जरूरी है.
खेती भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और आने वाले समय में सरकार का फोकस इस सेक्टर पर बना रहने वाला है. बीज, खाद, फसल सुरक्षा, चीनी और फूड प्रोसेसिंग से जुड़ी कंपनियां इस ग्रोथ का हिस्सा बन सकती हैं. लेकिन, खेती से जुड़ा निवेश हमेशा मौसम, नीति और बाजार के उतार-चढ़ाव से जुड़ा रहता है, इसलिए इस क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में किसी भी निवेश का फैसला पूरी जानकारी और समझदारी के साथ लें.
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य से तैयार किया गया है. इसमें उल्लिखित कंपनियों के नाम उदाहरण के तौर पर दिए गए हैं. इसे किसी भी शेयर को खरीदने या बेचने की सलाह न माना जाए. शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेश से पहले अपनी जोखिम क्षमता समझें और योग्य वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें.
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