भारत-EU में FTA को लेकर बातचीत तेज (फोटो- X@PiyushGoyal)भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर बातचीत एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है. शुक्रवार को ब्रुसेल्स में हुई उच्चस्तरीय वार्ता में दोनों पक्षों ने नियम आधारित व्यापार व्यवस्था और आधुनिक आर्थिक साझेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. इस बातचीत का खास फोकस किसानों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के हितों की सुरक्षा और भारतीय उद्योगों को ग्लोबल सप्लाई चेन से जोड़ने पर रहा. केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल इन वार्ताओं के लिए दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर EU मुख्यालय पहुंचे हैं.
उन्होंने EU के ट्रेड और इकोनॉमिक सिक्योरिटी कमिश्नर मारोस सेफकोविच के साथ विस्तार से चर्चा की. गोयल ने साफ किया कि भारत ऐसा समझौता चाहता है, जो संतुलित हो, घरेलू संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करे और निर्यात आधारित सेक्टरों को नई ताकत दे.
मंत्रीस्तरीय बैठक से पहले भारत और EU के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच गहन मंथन हो चुका है. 6 और 7 जनवरी को भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और यूरोपीय आयोग की ट्रेड डायरेक्टर जनरल सबाइन वेयंड के बीच हुई बातचीत ने इस दौर के लिए मजबूत आधार तैयार किया. दोनों पक्षों की कोशिश है कि लंबे समय से चल रही बातचीत को जल्द से जल्द निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए.
यह बातचीत इसलिए भी अहम मानी जा रही हैं, क्योंकि 27 जनवरी को प्रस्तावित भारत-EU शिखर सम्मेलन से पहले माहौल बन रहा है. इससे एक दिन पहले 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में EU के शीर्ष नेतृत्व के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने की उम्मीद है. ऐसे में व्यापार समझौते पर प्रगति को कूटनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
हालांकि, रास्ता अभी आसान नहीं है. दिसंबर में भारत ने साफ किया था कि बातचीत अपने सबसे कठिन चरण में है. अब तक 16 दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं, लेकिन कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं. भारत टेक्सटाइल और लेदर जैसे श्रम आधारित क्षेत्रों के लिए जीरो ड्यूटी एक्सेस चाहता है, ताकि रोजगार और निर्यात दोनों को बढ़ावा मिले.
वहीं EU ऑटोमोबाइल, मेडिकल डिवाइस, वाइन, स्पिरिट्स, मांस और पोल्ट्री जैसे क्षेत्रों में बड़े शुल्क कटौती की मांग कर रहा है. साथ ही मजबूत बौद्धिक संपदा व्यवस्था पर जोर दे रहा है. भारत और EU ने जून 2022 में करीब नौ साल के अंतराल के बाद दोबारा व्यापक FTA, निवेश संरक्षण समझौते और जियोग्राफिकल इंडिकेशन पैक्ट पर बातचीत शुरू की थी. इससे पहले 2013 में बाजार खोलने के स्तर को लेकर मतभेदों के कारण वार्ताएं ठप हो गई थीं.
वहीं, आर्थिक आंकड़े इस समझौते की अहमियत को और बढ़ाते हैं. वर्ष 2024-25 में भारत और EU के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 136.53 अरब डॉलर तक पहुंच गया. EU भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है, जहां भारत के कुल निर्यात का करीब 17 प्रतिशत हिस्सा जाता है. अगर FTA होता है तो रेडीमेड गारमेंट्स, फार्मास्यूटिकल्स, स्टील, पेट्रोलियम उत्पाद और इलेक्ट्रिकल मशीनरी जैसे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा EU बाजार में और मजबूत हो सकती है. (पीटीआई)
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