सिर्फ कागज पर दिखे तालाब, जमीन पर कुछ नहींउदयपुरा विधानसभा और बाड़ी जनपद में बड़ा घोटाला सामने आया है. ग्राम पंचायत उटिया कला में कागजों पर छह तालाब बनाये जाने का दावा किया गया, लेकिन जमीन पर एक भी तालाब मौजूद नहीं है. यह तालाब मनरेगा योजना से बनाये गए बताए गए थे, लेकिन असलियत कुछ और ही है.
पंचायत दर्पण पोर्टल पर इन तालाबों के लिए लाखों रुपये की राशि निकासी दिखाई गई है. लेकिन जमीन पर तालाब मौजूद नहीं है. इसका मतलब है कि पैसे खर्च नहीं हुए, लेकिन सरकारी दस्तावेजों में दिखा दिए गए.
ग्राम पंचायत उटिया कला के छह किसानों ने आरोप लगाया है कि सचिव और जनपद पंचायत के सीईओ दानिश खान ने कागजों में तालाब दिखाकर लाखों रुपये निकाले. किसानों के नाम हैं: रामेश्वर प्रसाद, फूल सिंह, जगदीश प्रसाद, दरयाव सिंह, रूप सिंह, भैया लाल, मन्नूलाल, रतनलाल, अवधेश धाकड़, श्याम सिंह और बैजंती बाई, गुननी लाल.
किसानों ने कहा कि जिन जगहों पर तालाब होने चाहिए थे, वहां आज भी खेती होती है. वे पूछ रहे हैं कि तालाब आखिर गए कहां और लाखों रुपये किसके संरक्षण में खर्च हुए.
जल गंगा संवर्धन योजना के तहत भी ग्राम पंचायत उटिया कला में तालाब निर्माण को केवल कागजों तक सीमित रखा गया. मौके पर कोई भी तालाब नहीं दिखाई दिया.
जब मीडिया ने बाड़ी जनपद पंचायत के सीईओ दानिश खान से सवाल किया, तो उन्होंने सिर्फ कहा कि जांच टीम बनाई जाएगी और अगर कोई गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई होगी. उन्होंने खुद घोटाले की जानकारी को “आपके माध्यम से सामने आई” बता दिया.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पंचायत दर्पण पोर्टल पर तालाबों के लिए लाखों रुपये स्वीकृत और निकाले जा रहे थे, तो जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी कहां थे? क्या इतनी बड़ी राशि बिना सीईओ की जानकारी के स्वीकृत हो सकती थी?
मीडिया की टीम के सामने भी अधिकारियों ने केवल जांच और कार्रवाई की बात कही. जिम्मेदारी से बचते हुए केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं. ऐसा रवैया भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है.
यह मामला बाड़ी जनपद पंचायत में बड़े पैमाने पर हो रहे भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है. कागजों में तालाब दिखाकर पैसे निकाले गए और जमीन पर तालाब नहीं बने. यह दिखाता है कि कई योजनाओं में केवल कागजी खानापूर्ति होती है.
उदयपुरा विधानसभा और बाड़ी जनपद में तालाब घोटाले ने यह साफ कर दिया कि सरकारी योजनाओं में कई बार जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाते. किसानों और आम जनता को सवाल उठाने पड़ते हैं. सही जांच और कार्रवाई ही ऐसी समस्याओं का समाधान कर सकती है. (राजेश कुमार रजक का इनपुट)
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