Mango-Litchi Orchard: आम और लीची में चाहिए बंपर पैदावार? तो समझ लें जनवरी के तापमान का ये गणित

Mango-Litchi Orchard: आम और लीची में चाहिए बंपर पैदावार? तो समझ लें जनवरी के तापमान का ये गणित

क्या आप जानते हैं कि आम और लीची की भरपूर फसल का राज जनवरी की इन ठंडी रातों में छिपा है? जब जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है, तो पेड़ अपनी बाहरी बढ़ोतरी नए पत्ते निकालने को रोककर अपनी पूरी ताकत अंदर ही अंदर बौर (फूल) बनाने में लगा देते हैं. इसलिए, आम और लीची के पेड़ों में ढेर सारे बौर आने के लिए जनवरी की कड़ाके की ठंड बहुत जरूरी है.

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Mango-Litchi Orchard: आम और लीची में चाहिए बंपर पैदावार? तो समझ लें जनवरी के तापमान का ये गणितलीची और आम पर बौर आने के लिए सही तापमान जरूरी

अक्सर हम सोचते हैं कि कड़ाके की ठंड सिर्फ हमारे लिए मुश्किलें लाती हैं, लेकिन उत्तर भारत और बिहार के बागवानों के लिए यह ठंड किसी वरदान से कम नहीं है. वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो जनवरी का महीना आम और लीची के पेड़ों के लिए एक 'टर्निंग पॉइंट' होता है. इस दौरान पेड़ अपनी पत्तियों की बढ़त को रोककर फूल देने वाली अवस्था में कदम रखते हैं.

डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंट्रल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, पूसा प्लांट पैथालोजी के हेड डॉ एस. के. सिंह के अनुसार, अगर इस समय तापमान 8 से 15 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है, तो पेड़ों के अंदर 'फ्लोरल इंडक्शन' यानी फूल बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है. यह ठंड संकेत देती है कि अब नई पत्तियां निकालने का समय खत्म हो गया है और अब मंजर यानी बौर देने का समय आ गया है. इसलिए अगर जनवरी में अच्छी ठंड पड़ती है, तो फरवरी और मार्च में बागों में मंजरों की भरमार होना बिल्कुल तय है.

बौर आने से पहले क्यों जरूरी है कड़ाके की ठंड

डॉ एस. के. सिंह के अनुसार, आम और लीची के पेड़ों में फूलों की संख्या और उनकी मजबूती सीधे तौर पर जनवरी के मौसम पर निर्भर करती है. जब रातें शांत और ठंडी होती हैं, तो पेड़ों के भीतर जिबरेलिन जैसे हार्मोन, जो पत्तियों को बढ़ाते हैं, उनका असर कम होने लगता है. इसकी जगह फूलों को प्रेरित करने वाले हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं. कोहरा भी इसमें अपनी अहम भूमिका निभाता है.

हालांकि बहुत अधिक कोहरा कई बार नुकसानदायक लगता है, लेकिन मध्यम कोहरा वातावरण में नमी बनाए रखता है, जिससे आने वाले फूलों की कोमल कलियां सूखती नहीं हैं. यह नमी पौधों के भीतर जल-तनाव को कम करती है, जिससे पेड़ अपनी पूरी ऊर्जा मंजरों के निर्माण में लगा पाते हैं. परिणाम यह होता है कि बागों में एकसमान और संतुलित पुष्पन देखने को मिलता है, जो आगे चलकर बंपर पैदावार की गारंटी बनता है.

लीची की मिठास के पीछे कोल्ड कनेक्शन

शाही लीची पूरी दुनिया में मशहूर है, और इसके पीछे का असली राज जनवरी की यही ठंड है. लीची एक ऐसी फसल है जिसे पुष्पन के लिए 'चिलिंग पीरियड' यानी एक खास समय तक ठंड की जरूरत होती ही है. बिना पर्याप्त ठंड के लीची के पेड़ों में फूलों का विभेदन संभव नहीं है. जब जनवरी में तापमान गिरता है, तो पेड़ के भीतर ऐसे बदलाव होते हैं जो फूलों की संख्या को कई गुना बढ़ा देते हैं. यह ठंड ही सुनिश्चित करती है कि सभी पेड़ों पर मंजर एक साथ और सही समय पर निकलें. अगर जनवरी गरम होती जाए, तो मंजर कम आते हैं और फलों की गुणवत्ता पर भी बुरा असर पड़ता है. 

आम के पेड़ों पर आती है जबरदस्त बौर

आम के पेड़ों में अक्सर यह समस्या देखी जाती है कि वे बहुत अधिक पत्तियां देने लगते हैं, जिससे मंजर कम आते हैं. जनवरी की ठंड यहां एक 'ब्रेक' का काम करती है. यह ठंड पेड़ों को एक तरह की 'आराम अवस्था'  में ले जाती है, जिससे पेड़ अपनी ऊर्जा बचाकर रखते हैं. जैसे ही फरवरी में मौसम थोड़ा खुलता है और तापमान बढ़ना शुरू होता है, पेड़ों में जमा हुई यह ऊर्जा अचानक मंजरों के रूप में बाहर आती है. अगर जनवरी में अच्छी ठंड न पड़े, तो फरवरी में निकलने वाले बौर कमजोर हो सकते हैं और उनके झड़ने की समस्या बढ़ सकती है. इसलिए, अच्छी फसल के लिए जनवरी का ठंडा रहना बहुत जरूरी है.

बंपर पैदावार के लिए ठंड और धूप का तालमेल जरूरी

आम और लीची के लिए सिर्फ ठंड ही काफी नहीं है, बल्कि जनवरी की ठंड के बाद फरवरी की खिली हुई धूप का मेल ही असली जादू दिखाता है. जब ठंड की प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो फरवरी का 'थर्मल ट्रांजिशन' यानी तापमान का धीरे-धीरे बढ़ना फूलों को ऊर्जा देता है. किसानों को इस समय अपनी रणनीति तैयार रखनी चाहिए. जैसे ही ठंड का असर कम हो, पेड़ों में हल्की सिंचाई और संतुलित पोषक तत्वों का छिड़काव करना चाहिए.

कोहरे और ठंड की वजह से जो नमी बनी रहती है, वह फूलों के खिलने की शुरुआती चरण में सुरक्षा कवच का काम करती है. जलवायु परिवर्तन के इस दौर में, जहां कभी भी मौसम बदल जाता है, जनवरी की यह प्राकृतिक ठंड फसलों के लिए एक रक्षा कवच की तरह है जो उत्पादन को स्थिर बनाए रखने में मदद करती है.

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