Tea Auction: कुन्नूर चाय नीलामी में इस किस्‍म के भाव बढ़े, जानें क्‍या है वजह?

Tea Auction: कुन्नूर चाय नीलामी में इस किस्‍म के भाव बढ़े, जानें क्‍या है वजह?

दक्षिण भारत के अन्य चाय केंद्रों में भी डस्ट ग्रेड्स के लिए अच्छी पूछताछ बनी हुई है. मौसम से जुड़ी चुनौतियों के कारण आगे भी ऑफरिंग घटने की आशंका है. इससे कीमतों में और मजबूती आ सकती है. कुछ चाय उत्पादक इलाकों में बारिश दर्ज की गई है. दूसरी ओर रात के समय तापमान में गिरावट के चलते उत्पादन पर असर पड़ रहा है. CTC डस्ट सेगमेंट में महंगी और बेहतर लिकरिंग किस्मों की मजबूत मांग रही. 

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Tea Auction: कुन्नूर चाय नीलामी में इस किस्‍म के भाव बढ़े, जानें क्‍या है वजह?

बेहतर मांग और ऑफ़रिंग कम रहने के चलते कुन्नूर चाय नीलामी में डस्ट ग्रेड्स की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई. ट्रेडर्स की मानें तो कोच्चि नीलामी में CTC डस्ट के ऊंचे भाव के चलते ब्लेंडर्स, घरेलू खरीदारों और कुछ निर्यातकों ने कुन्नूर की ओर रुख किया और इसकी वजह से यहां कीमतों को समर्थन मिला. डस्‍ट टी भारत में बड़े पैमाने पर प्रयोग होती है क्‍योंकि इसे दूध वाली चाय के लिए बेस्‍ट माना जाता है. 

अभी और बढ़ेंगी कीमतें 

दक्षिण भारत के अन्य चाय केंद्रों में भी डस्ट ग्रेड्स के लिए अच्छी पूछताछ बनी हुई है. मौसम से जुड़ी चुनौतियों के कारण आगे भी ऑफरिंग घटने की आशंका है. इससे कीमतों में और मजबूती आ सकती है. कुछ चाय उत्पादक इलाकों में बारिश दर्ज की गई है. दूसरी ओर रात के समय तापमान में गिरावट के चलते उत्पादन पर असर पड़ रहा है. ग्लोबल टी ऑक्शनियर्स के अनुसार, सेल नंबर-3 में डस्ट ग्रेड्स के तहत 2,79,712 किलोग्राम चाय की पेशकश की गई जिसमें से 85 प्रतिशत की बिक्री हुई. वहीं, लीफ ग्रेड्स में ऑफर की गई 10,73,724 किलोग्राम चाय में से 82 प्रतिशत की बिक्री दर्ज की गई. 

महंगी और बेहतर किस्‍मों की मांग 

CTC डस्ट सेगमेंट में महंगी और बेहतर लिकरिंग किस्मों की मजबूत मांग रही. क्वालिटी के आधार पर ये कभी-कभी 3 से 4 रुपये प्रति किलो तक महंगी बिकीं. बेहतर मीडियम किस्मों में भी 1 से 2 रुपये प्रति किलो की बढ़त देखी गई जबकि मीडियम किस्में ज्‍यादातर स्थिर रहीं. कुछ मामलों में इनमें 1 से 2 रुपये की तेजी दर्ज की गई. लीफ ग्रेड्स में महंगी और बेहतर लिकरिंग किस्में आम तौर पर 3 से 4 रुपये प्रति किलो तक सस्ती रहीं और कुछ ही लॉट्स में निकासी देखी गई. हालांकि चुनिंदा लॉट्स 2 से 3 रुपये प्रति किलो तक महंगे भी बिके.  मीडियम किस्मों की मांग संतोषजनक रही और ये पिछले स्तरों के आसपास लगभग स्थिर रहीं. 

प्राइमरी फुल लीफ ग्रेड्स की मांग भी ठीक-ठाक रही और ये कभी-कभी 3 से 4 रुपये प्रति किलो तक महंगे बिके. वहीं, ब्रोकन ग्रेड्स आमतौर पर स्थिर रहे, कुछ लॉट्स में 1 से 2 रुपये प्रति किलो की बढ़त देखी गई. प्राइमरी ऑर्थोडॉक्स डस्ट ग्रेड्स में कमजोर बिडिंग के चलते भावों में 8 से 10 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट दर्ज की गई और कई मामलों में फेयर विड्रॉल भी देखने को मिले. 

क्‍या होती है डस्ट टी

जब चाय की पत्तियों को CTC यानी Crush, Tea और Curl प्रक्रिया से गुजारा जाता है तो पत्तियां टूटकर अलग-अलग साइज में छंटती हैं. इसमें जो सबसे छोटे, पाउडर जैसे कण होते हैं, उन्हें ही डस्ट टी कहा जाता है. डस्‍ट टी वाली चाय बहुत जल्दी और गाढ़ी बनती है. उसका रंग गहरा होता है और काफी स्‍ट्रांन्‍ग होती है. यही वजह है कि यह दूध वाली चाय के लिए सबसे ज्‍यादा इस्तेमाल होती है. 

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