Explainer: चीनी की कीमतों पर सरकार अलर्ट, इथेनॉल पर बढ़ा दांव, आपके लिए इसका क्या मतलब है?

Explainer: चीनी की कीमतों पर सरकार अलर्ट, इथेनॉल पर बढ़ा दांव, आपके लिए इसका क्या मतलब है?

त्योहारी सीजन से पहले केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने का निर्देश दिया है. वहीं कच्चे तेल की आपूर्ति से जुड़े जोखिम बढ़ने के बीच भारत इथेनॉल और अन्य बायोफ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ाने पर जोर दे रहा है. इन दोनों घटनाक्रमों का सीधा असर चीनी उद्योग, गन्ना किसानों और देश की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है.

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Explainer: चीनी की कीमतों पर सरकार अलर्ट, इथेनॉल पर बढ़ा दांव, आपके लिए इसका क्या मतलब है?बायोफ्यूल पर सरकार का जोर

देश में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुकी चीनी की कीमतों और वैश्विक स्तर पर बढ़ते कच्चे तेल संकट के बीच केंद्र सरकार ने दो मोर्चों पर सक्रियता दिखाई है. एक तरफ सरकार ने चीनी मिलों को त्योहारी सीजन के दौरान पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और कीमतों को नियंत्रण में रखने के निर्देश दिए हैं. दूसरी ओर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए बायोफ्यूल और इथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ाने की रणनीति पर काम तेज कर दिया गया है.

इन दोनों कदमों का सीधा संबंध देश के गन्ना क्षेत्र से है, क्योंकि चीनी और इथेनॉल दोनों का प्रमुख स्रोत गन्ना ही है.

चीनी मिलों को सरकार की सख्त चेतावनी

'रॉयटर्स' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने चीनी उद्योग से साफ कहा है कि त्योहारों के दौरान किसी भी तरह की कृत्रिम कमी या जमाखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. खाद्य मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार चीनी की कीमतों में हालिया तेजी मांग बढ़ने से ज्यादा जमाखोरी और भविष्य में और कीमत बढ़ने की आशंका के कारण देखी गई है.

सरकार का मानना है कि गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान मिठाइयों और कन्फेक्शनरी उत्पादों की मांग बढ़ती है, लेकिन इसके नाम पर अनावश्यक मूल्य वृद्धि उचित नहीं है. इसी वजह से मिलों को पर्याप्त मात्रा में चीनी बाजार में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं.

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थीं चीनी की कीमतें

पिछले महीने देश में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं. आपूर्ति को लेकर चिंताओं के बीच सरकार को 10 लाख टन चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देनी पड़ी. भारत, जो सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के प्रमुख चीनी निर्यातकों में शामिल रहता है, अब लगभग एक दशक बाद ब्राजील से चीनी आयात कर रहा है.

हालांकि हाल के दिनों में कीमतों में कुछ नरमी आई है, लेकिन बाजार भाव अभी भी दो महीने पहले के मुकाबले करीब 20 प्रतिशत अधिक बताए जा रहे हैं.

हर महीने होगी उत्पादन और बिक्री की निगरानी

सरकार ने चीनी उत्पादन और बिक्री के आंकड़ों की मासिक निगरानी का फैसला भी किया है. इसके तहत चीनी मिलों से सही और समय पर उत्पादन तथा बिक्री के आंकड़े उपलब्ध कराने को कहा गया है.

सरकार का मानना है कि बेहतर और ताजा आंकड़ों से नीतिगत फैसले लेने में मदद मिलेगी और जरूरत पड़ने पर समय रहते बाजार में हस्तक्षेप किया जा सकेगा. अब तक शुल्क-मुक्त आयात कोटे के तहत लगभग 8 लाख टन चीनी आयात के लिए आवेदन भी प्राप्त हो चुके हैं.

कच्चे तेल संकट ने बढ़ाई ऊर्जा सुरक्षा की चिंता

इसी बीच वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है. पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिमों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है.

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक और उपभोक्ता देश है. ऐसे में आयात पर निर्भरता कम करना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है.

इथेनॉल और बायोफ्यूल पर बढ़ेगा जोर

प्रधानमंत्री कार्यालय के सलाहकार तरुण कपूर के अनुसार भारत अब ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए उपलब्ध घरेलू संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इसी रणनीति के तहत इथेनॉल और अन्य बायोफ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है.

देश में पहले से पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम चल रहा है. अब सरकार कुछ जैव ईंधनों को डीजल में मिलाने की संभावनाओं का भी परीक्षण कर रही है. इसके अलावा फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम जारी है.

गन्ना किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

भारत में इथेनॉल उत्पादन के लिए मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और चावल आधारित फीडस्टॉक का उपयोग किया जाता है. ऐसे में इथेनॉल की मांग बढ़ने का सीधा फायदा गन्ना किसानों और चीनी मिलों को मिल सकता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इथेनॉल कार्यक्रम लगातार विस्तार करता है तो चीनी मिलों को अतिरिक्त कमाई का स्रोत मिलेगा. इससे गन्ना किसानों के भुगतान की स्थिति बेहतर हो सकती है और कृषि क्षेत्र में निवेश भी बढ़ सकता है.

चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को लेकर कुछ चिंताएं भी सामने आ रही हैं. कुछ वाहन मालिकों और स्वतंत्र विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक इथेनॉल ब्लेंडिंग से इंजन के प्रदर्शन, ईंधन दक्षता और रखरखाव लागत पर असर पड़ सकता है. वहीं बायोफ्यूल की क्वालिटी और आपूर्ति श्रृंखला को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं.

चीनी और ऊर्जा नीति का गहरा संबंध

सरकार की चीनी कीमत नियंत्रण और बायोफ्यूल विस्तार की नीतियां अब एक-दूसरे से जुड़ी हुई दिखाई दे रही हैं. एक तरफ सरकार उपभोक्ताओं को महंगी चीनी से राहत देना चाहती है, वहीं दूसरी ओर इथेनॉल उत्पादन बढ़ाकर ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करना चाहती है.

ऐसे में आने वाले महीनों में चीनी उत्पादन, इथेनॉल डायवर्जन, गन्ने की उपलब्धता और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की स्थिति पर सरकार की नजर बनी रहेगी. इसका असर न केवल चीनी उद्योग पर बल्कि करोड़ों गन्ना किसानों, उपभोक्ताओं और देश की ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ सकता है.

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