अफीम की अवैध पर प्रहार (सांकेतिक तस्वीर)छत्तीसगढ़ में अवैध अफीम की खेती के सामने आने के बाद राज्य सरकार सख्त रुख में आ गई है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में किसी भी हालत में नशीले पदार्थों की गैरकानूनी खेती बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. दरअसल, पिछले कुछ दिनों में राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अवैध अफीम की खेती के मामले सामने आए हैं. इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों की गहन जांच की जाए और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए.
इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के भू-अभिलेख आयुक्त ने राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं. उन्हें अपने-अपने जिलों के संवेदनशील और संभावित क्षेत्रों का व्यापक सर्वे करने के लिए कहा गया है. कलेक्टरों को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपनी होगी, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि उनके जिले में कहीं अवैध अफीम की खेती हो रही है या नहीं.
दरअसल, हाल ही में तीन अलग-अलग स्थानों पर अफीम की अवैध खेती पकड़ी गई थी. इन मामलों के सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है. सरकार ने साफ किया है कि अवैध खेती, भंडारण, परिवहन या नशीले पदार्थों के कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा.
6 मार्च को दुर्ग जिले के समोदा गांव स्थित एक फार्महाउस में करीब 5.62 एकड़ जमीन पर अवैध अफीम की खेती का खुलासा हुआ था. पुलिस ने यहां से लगभग 62,424 किलोग्राम अफीम के पौधे बरामद किए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 8 करोड़ रुपये बताई गई. इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें स्थानीय भाजपा नेता विनायक ताम्रकार भी शामिल थे. पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया है.
इसके बाद 10 मार्च को बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के त्रिपुरी घोसड़ांड गांव में भी करीब 3.67 एकड़ जमीन पर अफीम की खेती पकड़ी गई. पुलिस ने इस कार्रवाई में सात लोगों को गिरफ्तार किया. मौके से लगभग 4,344 किलोग्राम अफीम के पौधे बरामद हुए, जिनकी कीमत करीब 4.75 करोड़ रुपये आंकी गई.
12 मार्च को बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कोरंधा थाना क्षेत्र के तुर्रीपानी (खजूरी) गांव में भी संयुक्त टीम ने कार्रवाई की. राजस्व, पुलिस और वन विभाग की टीम ने यहां करीब 1.47 एकड़ जमीन पर की जा रही अवैध अफीम की खेती को नष्ट किया. इस दौरान लगभग 18 क्विंटल 83 किलोग्राम अफीम के पौधे जब्त किए गए, जिनकी कीमत करीब 2 करोड़ रुपये बताई गई. इस मामले में दो लोगों को एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया है.
इन घटनाओं को लेकर विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि देश के “धान के कटोरे” के रूप में पहचाने जाने वाले छत्तीसगढ़ को भाजपा सरकार “अफीम का कटोरा” बनाने की दिशा में ले जा रही है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मामले को लेकर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के इस्तीफे की मांग भी की है. विजय शर्मा के पास गृह विभाग का भी प्रभार है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today