मुंबई के पवित्र बाणगंगा टैंक में हजारों मछलियों की मौत, प्रदूषण पर उठे सवाल

मुंबई के पवित्र बाणगंगा टैंक में हजारों मछलियों की मौत, प्रदूषण पर उठे सवाल

मुंबई के मालाबार हिल स्थित पवित्र बाणगंगा टैंक में हजारों मछलियों की मौत से चिंता बढ़ गई है. स्थानीय लोगों ने पानी की खराब क्वालिटी और प्रदूषण पर सवाल उठाए हैं. मामले को लेकर BMC ने स्थानीय लोगों और पुजारियों के साथ बैठक बुलाई है.

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मुंबई के पवित्र बाणगंगा टैंक में हजारों मछलियों की मौत, प्रदूषण पर उठे सवालबाणगंगा टैंक में हजारों मछलियां मृत पाई गईं

दक्षिण मुंबई के मालाबार हिल में स्थित पवित्र बाणगंगा टैंक में हजारों मछलियां मर गई हैं, जिससे इलाके में बदबू फैल गई है. ऐतिहासिक और पवित्र बाणगंगा टैंक में हजारों मछलियां मृत पाई गई हैं, जिससे पानी की हालत और इस हेरिटेज वॉटर बॉडी में संभावित प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ गई है. मछलियों की मौत ने स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों का ध्यान खींचा है, जिन्होंने पानी की बिगड़ती क्वालिटी पर सवाल उठाए हैं. 

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पितृ पक्ष के दौरान बड़े पैमाने पर किए गए 'पिंड दान' अनुष्ठानों के कारण प्रदूषण बढ़ा हो सकता है. BMC ने अब इस मुद्दे पर चर्चा करने और बाणगंगा टैंक के जलीय इकोसिस्टम को और नुकसान से बचाने के लिए स्थानीय लोगों और इलाके के पुजारियों के साथ बैठक बुलाई है. खाने की चीजें और अन्य चढ़ावा डालने से पानी में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है, जिससे ऑक्सीजन कम हो जाती है और टैंक में मौजूद अलग-अलग प्रकार की मछलियों की मौत हो जाती है.

हीटवेव या पिंडदान, क्या है असली कारण

पितृ पक्ष के दौरान 'पिंड दान' का पवित्र अनुष्ठान 26 सितंबर को शुरू हुआ था. हालांकि पहले भी टैंक में मछलियां मरी हैं, लेकिन ऐसा आमतौर पर पितृ पक्ष के पखवाड़े के अंत में होता था. इस बार यह पितृ पक्ष के दस दिनों के भीतर ही हो गया है. स्थानीय लोगों और स्थानीय पुजारियों का यह भी कहना है कि इलाके में गर्मी की लहर (हीटवेव) के कारण भी मछलियां मर सकती हैं.

पुजारी सेवालाल तिवारी, जो कई सालों से बाणगंगा में पूजा कराते आ रहे हैं, से बात की गई. जब उनसे पूछा गया कि क्या पुजारी और 'पिंड दान' करने वाले लोग अनुष्ठान और 'पिंड दान' में इस्तेमाल की गई चीजें पानी के टैंक में डालते हैं, तो तिवारी ने कहा कि वे उन्हें पानी में नहीं डालते. वे पानी को केवल तीन बार छूते हैं और फिर चीजों को बाहर रखे ड्रम में डाल देते हैं, लेकिन कुछ लोग जो खुद से यह काम करते हैं, वे कभी-कभी उन्हें पानी में डाल देते हैं. टैंक में मछलियों के मरने के मामले को लेकर लोग, पुजारी और आम लोग आज BMC अधिकारियों के साथ बैठक करने गए हैं.

हर साल मरती हैं मछलियां

स्थानीय निवासी भरत गुरव से बात की गई तो उन्होंने कहा, "हम यहीं रहते हैं और ऐसा हर साल होता है, लेकिन इस साल यह जल्दी हो गया है." "मैं मरी हुई मछलियों को हटाने में BMC की मदद कर रहा हूं."

बाणगंगा टैंक के बारे में कहानी यह है कि रामायण काल ​​में, जब भगवान राम सीता जी को बचाने के लिए लंका जा रहे थे, तो उन्हें प्यास लगी और उन्होंने लक्ष्मण से पानी लाने को कहा. तब लक्ष्मण जी ने इस जगह पर जमीन पर एक तीर चलाया, जो जमीन के नीचे बह रही गंगा से जा टकराया, जिससे यह टैंक बना. यह जगह हजारों सालों से हिंदुओं के लिए पवित्र रही है और इसे बाणगंगा कहा जाता है. बाणगंगा टैंक का संबंध परशुराम जी से भी है, जो हिंदू धर्म की पवित्र कथाओं में भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं.(दिव्येश सिंह की रिपोर्ट)

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