महाराष्ट्र के पालघर में 558 हेक्टेयर में बनेगी इंटरनेशनल कृषि मंडी, प्याज किसानों के लिए उठी ये बड़ी मांग

महाराष्ट्र के पालघर में 558 हेक्टेयर में बनेगी इंटरनेशनल कृषि मंडी, प्याज किसानों के लिए उठी ये बड़ी मांग

महाराष्ट्र सरकार पालघर जिले में वधावन पोर्ट के पास 558 हेक्टेयर में विश्वस्तरीय अंतरराष्ट्रीय कृषि मंडी बनाने जा रही है. इस परियोजना का उद्देश्य किसानों को सीधे वैश्विक बाजार से जोड़ना और कृषि निर्यात को बढ़ावा देना है. वहीं, महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने प्याज किसानों के लिए कई मांग उठाई है.

Advertisement
महाराष्ट्र के पालघर में 558 हेक्टेयर में बनेगी इंटरनेशनल कृषि मंडी, प्याज किसानों के लिए उठी ये बड़ी मांगइंटरनेशनल कृषि मंडी (AI- तस्वीर)

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के कृषि क्षेत्र और प्याज किसानों को नई पहचान देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. दरअसल, सरकार पालघर जिले के डपचारी में बनने वाले वधावन डीपवाटर पोर्ट से करीब 40 किलोमीटर दूर लगभग 558 हेक्टेयर क्षेत्र में विश्वस्तरीय अंतरराष्ट्रीय कृषि मंडी बनाएगी. राज्य के मार्केटिंग मंत्री जयकुमार रावल ने बताया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को राज्य कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है. इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को सीधे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ना, कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना और आधुनिक कृषि व्यापार की मजबूत करना है.

महाराष्ट्र में बनेगा इंटरनेशनल एग्रीकल्चर ट्रेड हब

मंत्री जयकुमार रावल ने बताया कि इस परियोजना को महाराष्ट्र राज्य कृषि विपणन बोर्ड (MSAMB) विकसित करेगा. यह बाजार फ्रांस के रुंगिस मार्केट, नीदरलैंड के रॉयल फ्लोराहॉलैंड और रॉटरडैम पोर्ट के आसपास विकसित आधुनिक कृषि लॉजिस्टिक्स मॉडल की तर्ज पर बनाया जाएगा. सरकार यहां तीन-स्तरीय कृषि खरीद सिस्टम विकसित करेगी, जिसमें अंतरराष्ट्रीय कृषि बाजार, राष्ट्रीय स्तर का बाजार और कृषि उपज मंडियां (APMC) शामिल होंगी. इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए एक आधुनिक बाजार मिलेगा.ॉ

प्याज संगठन ने सरकार के निर्णय का किया स्वागत

सरकार के इस निर्णय पर महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने स्वागत करते हुए कहा है कि यह राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक कदम है. संगठन का मानना है कि यदि इस परियोजना का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाया जाए, तो इससे कृषि निर्यात, रोजगार, कृषि प्रोसेसिंग उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी.

नासिक को 'राष्ट्रीय प्याज निर्यात हब' बनाने की मांग

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के संस्थापक अध्यक्ष भरत दिघोले ने कहा कि महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है और नासिक को देश की 'प्याज राजधानी' कहा जाता है, इसलिए वधावन बंदरगाह के विकास के साथ-साथ नासिक को 'राष्ट्रीय प्याज निर्यात हब' बनाया जाना चाहिए. उनका मानना है कि इससे भारत दुनिया के प्याज व्यापार में मजबूत पहचान बना सकता है. उन्होंने कहा कि देश में बड़ी मात्रा में प्याज उत्पादन होने के बावजूद किसानों को अपनी फसल का सही दाम नहीं मिल पाता. कई बार उन्हें लागत से भी कम कीमत पर प्याज बेचना पड़ता है. इसकी मुख्य वजह बार-बार लगने वाले निर्यात प्रतिबंध, पर्याप्त भंडारण सुविधाओं की कमी, बढ़ता परिवहन खर्च और विदेशी खरीदारों तक किसानों की सीधी पहुंच न होना है.

संगठन ने सरकार के सामने रखीं ये 8 प्रमुख मांगें

  • नासिक में राष्ट्रीय प्याज निर्यात हब बनाया जाए, जहां आधुनिक ग्रेडिंग, पैकिंग और निर्यात की सुविधाएं हों.
  • वधावन बंदरगाह और नासिक के बीच कृषि लॉजिस्टिक कॉरिडोर विकसित किया जाए, जिसमें विशेष रेल, कंटेनर सेवा, कोल्ड स्टोरेज और तेज सड़क संपर्क हो.
  • प्याज के लिए अलग निर्यात टर्मिनल बनाया जाए, जहां क्वालिटी जांच, पैकिंग, कंटेनर लोडिंग और कस्टम की सभी सुविधाएं एक ही जगह मिलें.
  • कम से कम पांच साल की स्थिर प्याज निर्यात नीति लागू की जाए, ताकि बार-बार निर्यात प्रतिबंध से किसानों और व्यापारियों को नुकसान न हो.
  • प्याज प्रोसेसिंग उद्योग जैसे प्याज पाउडर, डिहाइड्रेटेड प्याज, प्याज पेस्ट और फ्रोजन उत्पादों को बढ़ावा दिया जाए.
  • एफपीओ (FPO), सहकारी समितियों और किसान संगठनों को सीधे निर्यात से जोड़ा जाए, ताकि किसानों को बिचौलियों पर निर्भर न रहना पड़े.
  • प्याज के लिए 'ऑनियन एक्सपोर्ट प्रमोशन सेल' बनाया जाए, जो नए विदेशी बाजार तलाशने और निर्यात में किसानों की मदद करें.
  • नासिक में बनने वाले राष्ट्रीय प्याज भवन को प्रशिक्षण, अनुसंधान और निर्यात मार्गदर्शन का राष्ट्रीय केंद्र बनाया जाए.

अंतरराष्ट्रीय कृषि मंडी में होंगी ये सभी सुविधाएं

मार्केटिंग मंत्री जयकुमार रावल ने कहा कि इस मेगा प्रोजेक्ट में कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस, ग्रेडिंग और पैकेजिंग यूनिट, क्वालिटी जांच लैब, कंटेनर टर्मिनल, ई-ऑक्शन, एक्सपोर्ट सेंटर और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स जैसी सभी सुविधाएं एक ही जगह पर उपलब्ध होंगी. इससे 10 हजार से अधिक  रोजगार पैदा होने की उम्मीद है. सरकार का दावा है कि इस परियोजना से फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान और परिवहन लागत में 15 से 20 प्रतिशत तक कमी आएगी. साथ ही वधावन पोर्ट, नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, जेएनपीए, समृद्धि महामार्ग और मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे से बेहतर कनेक्टिविटी मिलने के कारण महाराष्ट्र से फल, सब्जियां, फूल, अनाज, दालें, मसाले और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात को बड़ा बढ़ावा मिलेगा.

जयकुमार रावल ने यह भी बताया कि वर्तमान में भारत के कुल कृषि निर्यात में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी करीब 15 प्रतिशत है, जबकि फलों के निर्यात में राज्य की हिस्सेदारी लगभग 43 प्रतिशत है. महाराष्ट्र अंगूर, अनार, कपास और दालों का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है. वहीं, फल और सब्जियों के उत्पादन में भी दूसरे स्थान पर है. ऐसे में यह परियोजना राज्य की कृषि निर्यात क्षमता को नई ऊंचाई देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

POST A COMMENT