मृतक किसान के परिजनमराठवाड़ा में कमजोर मॉनसून और खेती पर बढ़ते आर्थिक संकट के बीच महाराष्ट्र के बीड जिले से एक दर्दनाक घटना सामने आई है. यहां गेवराई तहसील के रानमला गांव के 25 वर्षीय किसान मुकुंद गंगाराम हिंगे ने मंगलवार को सुबह अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. बताया जा रहा है कि लगातार बारिश नहीं होने से फसलें खराब हो गई थीं और कर्ज के बढ़ते दबाव ने उन्हें गहरे मानसिक तनाव में डाल दिया था. इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है और किसान परिवारों में चिंता बढ़ गई है.
मुकुंद हिंगे के परिवार के पास कुल साढ़े पांच एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें से करीब तीन एकड़ जमीन उनके नाम पर थी. खेती से पर्याप्त आय नहीं होने के कारण उन्होंने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए बकरी पालन का काम भी शुरू किया था. इस व्यवसाय के लिए उनके पिता ने वर्ष 2023 में रुद्रेश्वर अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी से 9.41 लाख रुपये का कर्ज लिया था. परिवार की उम्मीद थी कि खेती और पशुपालन से धीरे-धीरे कर्ज चुकाया जा सकेगा, लेकिन इस साल कमजोर मॉनसून ने सारी योजनाओं पर पानी फेर दिया.
बताया गया कि इस साल पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में बोई गई फसलें खराब हो गईं. इससे परिवार के सामने कर्ज चुकाने का संकट खड़ा हो गया. परिजनों के मुताबिक, खेती और बकरी पालन को बचाने के लिए मुकुंद ने नेशनलाइज्ड बैंक से कृषि लोन लेने की कोशिश की और कई बार बैंक के चक्कर लगाए. लेकिन, बैंक ने सिबिल स्कोर खराब होने का हवाला देते हुए नया कर्ज देने से इनकार कर दिया. निजी सोसाइटी का पहले से बकाया कर्ज और नई आर्थिक मदद नहीं मिलने से उन पर मानसिक दबाव लगातार बढ़ता गया. इसी तनाव के बीच उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया.
इस साल बीड जिले में मानसून की रफ्तार बेहद धीमी रही है. जुलाई का आधा महीना बीतने के बाद भी जिले में केवल करीब 100 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है. जिले में लगभग 8 लाख हेक्टेयर भूमि बुआई योग्य है, लेकिन पानी की कमी के कारण अब तक केवल करीब 4 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुवाई हो सकी है. जिन किसानों ने शुरुआती हल्की बारिश के भरोसे बुआई कर दी थी, उनकी फसलें अब सूखने लगी हैं. ऐसे में बड़ी संख्या में किसानों के सामने दोबारा बुवाई की नौबत आ गई है.
दोबारा बुआई करने के लिए किसानों को फिर से बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री की जरूरत पड़ेगी. लेकिन, लगातार नुकसान झेल रहे कई किसानों के पास इसके लिए पर्याप्त पैसा नहीं है. ऐसे में किसान नई फसल बचाने और पुराने कर्ज चुकाने के बीच फंस गए हैं. कमजोर मॉनसून ने खेती की लागत बढ़ा दी है और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक संकट को और गहरा कर दिया है.
इधर, प्रशासन के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से 30 जून 2026 के बीच मराठवाड़ा के आठ जिलों में 465 किसानों ने आत्महत्या की है. इनमें अकेले बीड जिले के 95 किसान शामिल हैं. यह आंकड़े क्षेत्र में खेती से जुड़ी गंभीर आर्थिक चुनौतियों और लगातार बढ़ रहे दबाव की तस्वीर पेश करते हैं. बीड जिले में औसतन हर दो दिन में एक किसान की आत्महत्या दर्ज होना हालात की गंभीरता को दिखाता है.
मराठवाड़ा में इस साल बारिश की कमी ने खेती पर निर्भर हजारों परिवारों की चिंता बढ़ा दी है. अगर आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं होती है तो दोबारा बुवाई, बढ़ती लागत और कर्ज का दबाव किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है. ऐसे में किसान पर्याप्त बारिश, आर्थिक सहायता और समय पर कृषि लोन उपलब्ध होने की उम्मीद लगाए हुए हैं.
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