दिल्ली में खेती की जमीन के सर्कल रेट बढ़ाने की तैयारी, 5 करोड़ रुपये प्रति एकड़ करने की योजना!

दिल्ली में खेती की जमीन के सर्कल रेट बढ़ाने की तैयारी, 5 करोड़ रुपये प्रति एकड़ करने की योजना!

दिल्ली में कृषि जमीन के सर्कल रेट बढ़ाने की तैयारी चल रही है. प्रस्ताव के तहत कुछ जिलों में जमीन की सरकारी दर 5 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक हो सकती है. फिलहाल कृषि भूमि का सर्कल रेट 53 लाख रुपये प्रति एकड़ है.

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दिल्ली में खेती की जमीन के सर्कल रेट बढ़ाने की तैयारी, 5 करोड़ रुपये प्रति एकड़ करने की योजना!खेती की जमीन के सर्कल रेट बढ़ाने की तैयारी

दिल्ली में कृषि भूमि की सरकारी कीमत यानी सर्कल रेट बढ़ाए जा सकते हैं. दिल्ली सरकार इस पर विचार कर रही है और कुछ जिलों में कृषि जमीन का सर्कल रेट बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक करने का प्रस्ताव सामने आया है.  हालांकि, ये दरें अभी प्रस्तावित हैं, इन्हें अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है. कृषि भूमि के मौजूदा सर्कल रेट साल 2008 से नहीं बदले गए हैं. सरकार अब इन्हें बाजार में जमीन की मौजूदा कीमतों के करीब लाना चाहती है. इस प्रस्ताव पर केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच चर्चा चल रही है.

अभी कितना है कृषि जमीन का सर्कल रेट?

फिलहाल दिल्ली में सामान्य कृषि भूमि का सर्कल रेट 53 लाख रुपये प्रति एकड़ है. वहीं, बाढ़ की आशंका वाले क्षेत्रों में कृषि भूमि के लिए यह दर 17.6 लाख रुपये प्रति एकड़ है. दरअसल, सर्कल रेट वह सरकारी दर होती है, जिसके आधार पर जमीन और संपत्ति के रजिस्ट्रेशन के समय न्यूनतम सरकारी मूल्यांकन किया जाता है. अगर नई दरें लागू होती हैं, तो जमीन की रजिस्ट्री और उससे जुड़े खर्चों पर भी असर पड़ सकता है.

अलग-अलग जिलों के लिए कितनी दरें प्रस्तावित?

प्रस्ताव के तहत दिल्ली के अलग-अलग जिलों में कृषि भूमि के सर्कल रेट अलग-अलग रखने की बात कही गई है
- दक्षिण और नई दिल्ली: 5 करोड़ रुपये प्रति एकड़
- दक्षिण-पश्चिम दिल्ली: 3.5 करोड़ रुपये प्रति एकड़
- उत्तर, पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिल्ली: 3 करोड़ रुपये प्रति एकड़
- मध्य दिल्ली: 2.5 करोड़ रुपये प्रति एकड़
- शाहदरा, उत्तर-पूर्व और पूर्वी दिल्ली: 2.2 करोड़ रुपये प्रति एकड़
- दक्षिण-पूर्व दिल्ली: 3 करोड़ रुपये प्रति एकड़

ये दरें अभी प्रस्ताव के स्तर पर हैं. अंतिम दरें सरकार के फैसले के बाद ही स्पष्ट होंगी.

बाजार भाव और सरकारी दरों में कितना अंतर?

सरकार की ओर से दरों में बदलाव की कवायद इसलिए की जा रही है, क्योंकि कई इलाकों में जमीन की बाजार कीमत और सरकारी मूल्यांकन के बीच बड़ा अंतर है. सूत्रों के मुताबिक, समिति ने जमीन की पुरानी खरीद-बिक्री के आंकड़ों का अध्ययन किया है. इससे पता चला कि एक ही जिले में अलग-अलग इलाकों और जमीन की श्रेणियों के हिसाब से कीमतों में काफी अंतर हो सकता है.

उदाहरण के लिए, दक्षिण दिल्ली में कृषि भूमि का बाजार भाव करीब 1.5 करोड़ रुपये से लेकर 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक बताया गया है. वहीं, छतरपुर और फार्म हाउस वाले इलाकों में जमीन की कीमतें अधिक हैं. नजफगढ़ में बाजार भाव 3 करोड़ से 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक बताए गए हैं. वहीं, ग्रीन-बेल्ट और ग्रामीण इलाकों में जमीन की कीमत करीब 2 करोड़ से 8 करोड़ रुपये प्रति एकड़ के बीच बताई गई है. नई दिल्ली जिले में भी बाजार भाव में बड़ा अंतर है. यहां जमीन की कीमत 1.5 करोड़ रुपये से लेकर 18 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक बताई गई है. हालांकि, वास्तविक कीमत स्थान और जमीन की श्रेणी पर निर्भर करती है.

सरकार क्यों बढ़ाना चाहती है सर्कल रेट?

केंद्र और दिल्ली सरकार का उद्देश्य सरकारी मूल्यांकन को बाजार की मौजूदा कीमतों के करीब लाना है. इसके लिए 1 अक्टूबर 2025 को जारी नोटिस के जरिए सार्वजनिक परामर्श की प्रक्रिया शुरू की गई थी. इसके बाद मौजूदा मूल्यांकन व्यवस्था की कमियों की जांच और बदलावों की सिफारिश करने के लिए जुलाई में एक समिति बनाई गई. केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय और दिल्ली सरकार की हालिया बैठक में भी प्रस्तावित दरों पर चर्चा हुई.

जमीन की खरीद-बिक्री पर पड़ सकता है असर

अगर प्रस्तावित सर्कल रेट लागू होते हैं, तो दिल्ली में कृषि भूमि की खरीद-बिक्री, रजिस्ट्री से जुड़े खर्च और प्रॉपर्टी डेवलपमेंट पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा, दिल्ली के शहरी विस्तार और मास्टर प्लान फॉर दिल्ली-2047 के तहत होने वाले विकास कार्यों के लिए भी यह बदलाव अहम हो सकता है. फिलहाल सरकार प्रस्तावों की समीक्षा कर रही है. अभी यह तय नहीं है कि नई दरें कब लागू होंगी और अंतिम सर्कल रेट कितने होंगे. (PTI)

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