लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आशीष मिश्रा को राहत, दिवाली पर घर जाने की अनुमति

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आशीष मिश्रा को राहत, दिवाली पर घर जाने की अनुमति

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी आशीष मिश्रा उर्फ मोनू को दिवाली पर घर जाने की अनुमति दी है. वह 16 नवंबर तक लखीमपुर खीरी में रह सकेंगे. सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने बताया कि 131 गवाहों में से 90 के बयान दर्ज हो चुके हैं. वहीं, निचली अदालत के जज के तबादले पर भी चर्चा हुई.

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लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आशीष मिश्रा को राहत, दिवाली पर घर जाने की अनुमतिलखीमपुर हिंसा केस में नया अपडेट

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी आशीष मिश्रा उर्फ मोनू को दिवाली के दौरान अपने घर जाने की इजाजत दी है. कोर्ट ने उन्हें 16 नवंबर तक लखीमपुर खीरी में रहने की अनुमति दी है. इसके बाद उन्हें लखीमपुर खीरी छोड़ना होगा. यह मामला साल 2021 में किसान आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है. सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस मामले में कुल 131 गवाह हैं, जिनमें से 90 के बयान दर्ज हो चुके हैं. वहीं, मामले की सुनवाई कर रहे जज के तबादले को लेकर भी कोर्ट में चर्चा हुई.

दिवाली पर घर जाने की मिली इजाजत

सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा को दिवाली के दौरान अपने घर लखीमपुर खीरी जाने की अनुमति दी है. कोर्ट के आदेश के मुताबिक, वह 16 नवंबर तक वहां रह सकते हैं. इस तारीख के बाद उन्हें लखीमपुर खीरी छोड़ना होगा. यह राहत उन्हें अदालत की ओर से तय शर्तों के तहत दी गई है. आशीष मिश्रा साल 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आरोपी हैं. यह मामला उस घटना से जुड़ा है, जिसमें किसान आंदोलन के दौरान लखीमपुर खीरी में हिंसा हुई थी. इस मामले में लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया चल रही है. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपी को दिवाली पर घर जाने की अनुमति देने के साथ-साथ मामले की सुनवाई और गवाहों के बयान दर्ज होने की स्थिति पर भी चर्चा हुई.

क्या है लखीमपुर खीरी हिंसा का मामला?

लखीमपुर खीरी हिंसा का मामला अक्टूबर 2021 में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में हुई घटना से जुड़ा है. उस समय कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन चल रहा था. घटना के दौरान किसानों को गाड़ी से कुचलने के आरोप लगे थे. इसके बाद इलाके में हिंसा भड़क गई थी. इस घटना में आठ लोगों की मौत हुई थी, जिनमें चार किसान भी शामिल थे. इस मामले में आशीष मिश्रा का नाम सामने आया था. वह केंद्रीय मंत्री रहे अजय मिश्रा टेनी के बेटे हैं. इस घटना के बाद मामला देशभर में चर्चा का विषय बना और इसकी जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया पर लगातार नजर रखी गई. फिलहाल, मामले की सुनवाई अदालत में जारी है और गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं.

131 गवाहों में से 90 के बयान दर्ज

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की सुनवाई की स्थिति के बारे में जानकारी दी. सरकार ने बताया कि इस केस में कुल 131 गवाह हैं. इनमें से अब तक 90 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं. गवाहों के बयान किसी भी आपराधिक मामले की सुनवाई में अहम भूमिका निभाते हैं. इनके जरिए अदालत घटना से जुड़े तथ्यों और आरोपों को समझने की कोशिश करती है. इस मामले में अभी कई गवाहों के बयान दर्ज होना बाकी हैं. ऐसे में सुनवाई की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी.

प्रशांत भूषण ने निचली अदालत के जज के रवैये पर उठाए थे सवाल

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की सुनवाई के दौरान निचली अदालत के जज के कामकाज को लेकर भी सवाल उठाए गए थे. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने पिछली सुनवाई में जज के रवैये पर चिंता जताई थी. उन्होंने कहा था कि जज ने कुछ ऐसे कदम उठाए, जिन पर सवाल उठते हैं. प्रशांत भूषण ने एक चश्मदीद गवाह के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने का मुद्दा भी उठाया था. उनके मुताबिक, गवाह ने अपनी बीमारी का प्रमाण पत्र दिया था, इसके बावजूद उसके खिलाफ वारंट जारी किया गया. उन्होंने अदालत से जज को बदलने की मांग करते हुए कहा था कि अगर इसी जज के सामने मामले की सुनवाई जारी रहती है, तो निष्पक्ष सुनवाई को लेकर चिंता बनी रह सकती है.

इन आरोपों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से इस मामले में सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट मांगी थी. कोर्ट ने मामले की सुनवाई से जुड़े सवालों पर जानकारी मांगी, ताकि स्थिति को समझा जा सके.

जज के तबादले पर कोर्ट में क्या कहा गया?

सुप्रीम कोर्ट में ताजा सुनवाई के दौरान निचली अदालत के जज के तबादले का मुद्दा भी उठा. प्रशांत भूषण ने जज के तबादले को अच्छी पहल बताया. वहीं, आशीष मिश्रा की ओर से पेश वकील ने कहा कि यह एक सामान्य प्रशासनिक तबादला था. इस तरह सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने जज के तबादले को लेकर अपनी-अपनी बात रखी. इससे पहले प्रशांत भूषण ने जज के रवैये पर सवाल उठाते हुए उन्हें बदलने की मांग की थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पहले हाईकोर्ट से रिपोर्ट मांगी थी. हालांकि, जज के तबादले को लेकर दोनों पक्षों की दलीलें अलग-अलग थीं.

आगे भी जारी रहेगी मामले की सुनवाई

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में अभी कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है. उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार, 131 में से 90 गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं, जबकि बाकी गवाहों के बयान दर्ज होना अभी बाकी है. अदालत में सुनवाई के दौरान गवाहों की गवाही और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर विचार किया जाएगा. फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा को दिवाली के दौरान 16 नवंबर तक लखीमपुर खीरी में रहने की अनुमति दी है. इसके बाद उन्हें वहां से जाना होगा. इस मामले में आगे होने वाली सुनवाई और गवाहों के बयानों पर नजर रहेगी, क्योंकि इन्हीं के आधार पर अदालत मामले से जुड़े तथ्यों पर विचार करेगी.

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