गन्ने की फसल में लगी आगमहाराष्ट्र में किसान पहले ही सूखे की मार झेल रहे हैं. खेतों में पानी की कमी के बीच फसलों को बचाने के लिए किसान दिन-रात जूझ रहे हैं. इस बीच लातूर जिले में गन्ने की फसल में लगी भीषण आग ने दो किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. चाकूर तहसील के बेलगांव में आग लगने से करीब 3 एकड़ में खड़ी गन्ने की फसल जलकर खाक हो गई. आग में अपनी मेहनत बर्बाद होते देख पीड़ित किसान किसनराव वाकले खुद को संभाल नहीं पाए और जलते खेत में घुसने की कोशिश करने लगे. हालांकि, मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें पकड़कर रोक लिया.
घटना बेलगांव में किसनराव वाकले और अशोकराव वाकले के खेतों में हुई. किसानों के मुताबिक, खेत में बिजली की सप्लाई के लिए लगे तार में शॉर्ट सर्किट होने से सूखी खड़ी गन्ने की फसल में आग लग गई. आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते करीब 3 एकड़ में लगी फसल इसकी चपेट में आ गई. आग की सूचना मिलते ही गांव के लोग मौके पर पहुंचे और मिलकर आग बुझाने में जुट गए.
दोनों किसानों के पास कुल 20 एकड़ जमीन है, जिसमें गन्ने की फसल लगाई गई थी. आग की लपटें तेजी से फैल रही थीं और समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता तो बाकी खेत भी इसकी चपेट में आ सकते थे. ग्रामीणों ने मिलकर आग बुझाई, जिससे करीब 17 एकड़ में खड़ी गन्ने की फसल को बचा लिया गया. हालांकि, 3 एकड़ में फसल पूरी तरह जलने से किसानों को भारी नुकसान हुआ है.
आग लगने की खबर मिलते ही पीड़ित किसान किसनराव वाकले दौड़कर खेत पहुंचे. अपनी मेहनत को आंखों के सामने जलते देख वह फूट-फूटकर रोने लगे. वह बार-बार कह रहे थे कि पहले से ही सूखे की मार झेल रहे हैं, खेतों में पानी नहीं है और अब इस नुकसान के बाद आगे क्या करेंगे, कुछ समझ नहीं आ रहा. इस दौरान उन्होंने जलते हुए गन्ने के खेत में घुसने की कोशिश भी की, लेकिन वहां मौजूद लोगों ने उन्हें रोक लिया.
किसान किशनराव वाकले ने बताया कि उनकी करीब 2 एकड़ गन्ने की फसल जलकर बर्बाद हो गई है. यह फसल कटाई के लिए तैयार थी और अगले दो दिनों में इसे चीनी मिल भेजने की तैयारी थी. किसान के मुताबिक, फसल की बुवाई से लेकर अब तक करीब 2 लाख रुपये खर्च हो चुके थे. ऐसे समय में फसल का जल जाना उनके लिए बड़ा आर्थिक झटका है.
किसनराव वाकले ने बताया कि क्षेत्र में पहले से ही सूखे के कारण किसान परेशान हैं. खेतों में पानी की कमी के चलते सिंचाई के लिए दिन-रात संघर्ष करना पड़ रहा है. ऐसे में गन्ने की तैयार फसल जलने से उनकी आर्थिक मुश्किलें और बढ़ गई हैं. पीड़ित किसान ने प्रशासन से जली हुई फसल का पंचनामा कराने और नुकसान के बदले आर्थिक मुआवजा देने की मांग की है. (अनिकेत जाधव की रिपोर्ट)
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