हिमाचल प्रदेश सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू (फाइल फोटो)लंबे समय से अटकी किशाऊ बांध परियोजना को लेकर हिमाचल प्रदेश सरकार ने बड़े डेवलपमेंट का दावा किया है. हिमाचल सरकार के अनुसार, करीब आठ साल से वित्तीय हिस्सेदारी को लेकर चल रहा विवाद अब समाप्त हो गया है और इससे परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद यह जानकारी साझा की.
सुक्खू सरकार का कहना है कि परियोजना के बिजली घटक में हिमाचल प्रदेश पर प्रस्तावित लगभग 2,000 करोड़ रुपये का बोझ अब नहीं डाला जाएगा. इस लागत को वे राज्य वहन करेंगे जिन्हें परियोजना के जल संसाधन से सीधा फायदा मिलेगा. इनमें दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा को लाभार्थी राज्यों के रूप में शामिल किया गया है. राज्य सरकार इसे हिमाचल के हित में लिया गया अहम फैसला मान रही है.
करीब 15 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली 422 मेगावाट क्षमता की किशाऊ बांध परियोजना टोंस नदी पर प्रस्तावित है. यह क्षेत्र उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित है. परियोजना को लंबे समय से उत्तर भारत में जल उपलब्धता बढ़ाने, बिजली उत्पादन और क्षेत्रीय विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है, लेकिन लागत वहन और हिस्सेदारी के मुद्दे पर सहमति नहीं बनने के कारण इसका काम आगे नहीं बढ़ पा रहा था.
मुख्यमंत्री सुक्खू ने बैठक में राज्य का पक्ष रखते हुए कहा कि हिमाचल की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उस पर अतिरिक्त वित्तीय भार डालना व्यावहारिक नहीं है. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि परियोजना के कारण प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में सामाजिक और भौगोलिक असर सबसे अधिक हिमाचल को झेलना पड़ेगा. ऐसे में राज्य से भारी आर्थिक योगदान की अपेक्षा न्यायसंगत नहीं मानी जा सकती.
मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि पूर्ववर्ती सरकार ने परियोजना में हिमाचल की ओर से लगभग 800 करोड़ रुपये देने पर सहमति जताई थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इस व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया. उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार जल घटक के लिए 90 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध करा रही है तो बिजली घटक को लेकर भी राज्यों के हितों को संतुलित करने की जरूरत है.
राज्य सरकार ने कहा कि परियोजना पूरी होने के बाद हिमाचल प्रदेश को हर साल लगभग 100 करोड़ यूनिट बिजली का हिस्सा मिलेगा. अनुमान है कि इससे राज्य को करीब 600 करोड़ रुपये की वार्षिक आय हो सकती है. सरकार का मानना है कि यह अतिरिक्त राजस्व भविष्य में राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत करने, विकास योजनाओं को गति देने और ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित करने में सहायक साबित होगा. (पीटीआई)
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