'गन्ना किसानों से 100 रुपये प्रति टन मदद का वादा पूरा', मंत्री शिवानंद पाटिल ने विपक्ष के सवालों पर दी प्रतिक्रिया

'गन्ना किसानों से 100 रुपये प्रति टन मदद का वादा पूरा', मंत्री शिवानंद पाटिल ने विपक्ष के सवालों पर दी प्रतिक्रिया

कर्नाटक सरकार ने गन्ना किसानों को प्रति टन 100 रुपये अतिरिक्त सहायता देने का वादा पूरा किया. इसमें 50 रुपये सरकार और 50 रुपये मिल मालिकों ने दिए. मंत्री ने कहा कि इस कदम से किसानों की स्थिति बेहतर रही और अधिकांश किसान इस साल संतुष्ट हैं.

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'गन्ना किसानों से 100 रुपये प्रति टन मदद का वादा पूरा', मंत्री शिवानंद पाटिल ने विपक्ष के सवालों पर दी प्रतिक्रियागन्ना किसानों की मदद पर मंत्री ने विधानसभा में दिया बयान (सांकेतिक तस्‍वीर)

कर्नाटक सरकार ने गन्ना किसानों को राहत देते हुए प्रति टन ₹100 की अतिरिक्त आर्थिक सहायता देने का अपना वादा पूरा कर दिया है. राज्य के चीनी मंत्री शिवानंद पाटिल ने विधान परिषद में जानकारी देते हुए कहा कि इस बार सरकार और चीनी मिलों की साझेदारी से किसानों को यह लाभ दिया गया, जिससे अधिकतर किसान संतुष्ट नजर आ रहे हैं. मंत्री ने कहा कि राज्य में पहली बार किसी सरकार ने गन्ना किसानों को दो बार इस तरह का समर्थन दिया है. इस योजना के तहत ₹50 प्रति टन राज्य सरकार और ₹50 प्रति टन मिल मालिकों की ओर से दिए गए. उन्होंने दावा किया कि इस कदम से किसानों की आय में सीधे सुधार हुआ है और इस साल उनकी स्थिति बेहतर रही है.

विपक्ष के मुद्दों की मंशा पर उठाए सवाल

बहस के दौरान मंत्री ने विपक्ष के सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि उठाए गए कई मुद्दे किसानों से ज्यादा मिल मालिकों के हित में नजर आते हैं. साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि सरकार किसानों के साथ-साथ उद्योग से जुड़े पक्षों की समस्याओं पर भी काम कर रही है.

चीनी मिलों को भी राहत देने की तैयारी

सरकार ने चीनी मिलों की चिंताओं को भी गंभीरता से लिया है. पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) को लेकर मंत्री ने कहा कि सस्ती सौर और पवन ऊर्जा के कारण कुछ समझौते पहले नवीनीकृत नहीं हो पाए थे. अब सरकार इस पर दोबारा विचार कर रही है और अगले साल नए समझौते करने की संभावना है. इसके अलावा मिलों को अन्य राज्यों में बिजली बेचने की सुविधा भी दी गई है.

जल कर में छूट और अन्य मांगों पर विचार

पाटिल ने बताया कि सरकार पानी उपयोग टैक्स में छूट जैसे प्रस्तावों पर भी विचार कर रही है. सहकारी और निजी दोनों तरह की चीनी मिलों को समर्थन देने के विकल्प तलाशे जा रहे हैं ताकि पूरा सेक्टर संतुलित तरीके से आगे बढ़ सके.

केंद्र के सामने उठाए गए बड़े मुद्दे

राज्य सरकार ने केंद्र से भी कुछ अहम मांगें रखी हैं. मंत्री के मुताबिक, चीनी का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2019 के बाद से नहीं बढ़ाया गया है, जिससे उद्योग पर दबाव बढ़ रहा है. राज्य ने सुझाव दिया है कि घरेलू उपभोग और औद्योगिक उपयोग के लिए अलग-अलग कीमत तय की जाए, खासकर पेय पदार्थ कंपनियों की बड़ी खपत को देखते हुए.

एथेनॉल सेक्टर में असंतुलन की चिंता

एथेनॉल उत्पादन को लेकर भी सरकार ने चिंता जताई है. पाटिल ने कहा कि उत्पादन क्षमता बढ़ गई है, लेकिन खरीद सीमित है. केवल 10 से 13 प्रतिशत उत्पादन ही खरीदा जा रहा है, जिससे कई मिलें आर्थिक दबाव में हैं. इस मुद्दे पर भी केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की गई है.

गन्ना उद्योग की अहमियत पर जोर

मंत्री ने कहा कि कर्नाटक देश के शीर्ष तीन गन्ना उत्पादक राज्यों में शामिल है और यह उद्योग हजारों लोगों की आजीविका से जुड़ा है. एक चीनी मिल के संचालन से ही करीब 5,000 लोगों को रोजगार मिलता है. ऐसे में राज्य और केंद्र सरकार के सहयोग से इस सेक्टर को और मजबूत बनाने पर जोर दिया जा रहा है. (पीटीआई)

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