1.39 करोड़ के मुआवजे पर ‘कमीशन’ का खेलकिसानों की जमीन किसी सरकारी योजना या विकास परियोजना के लिए अधिग्रहित होने पर सरकार उन्हें मुआवजा देती है, ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान न हो. लेकिन कानपुर से सामने आए एक मामले ने मुआवजा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां एक किसान ने आरोप लगाया है कि अपनी जमीन का मुआवजा पाने के लिए उसे लाखों रुपये रिश्वत देनी पड़ी.
यह मामला न्यू कानपुर सिटी योजना से जुड़ा हुआ है. गंगपुर चकबंदा के रहने वाले किसान मनोज कुमार राठौर की जमीन योजना में गई थी. इसके बदले उन्हें 1 करोड़ 39 लाख रुपये का मुआवजा मिलना था. किसान का आरोप है कि मुआवजा जारी करने के बदले उनसे 12 लाख रुपये कमीशन के रूप में लिए गए. उन्होंने दावा किया कि यह रकम एक सरकारी कर्मचारी के रिश्तेदार के खाते तक पहुंचाई गई.
मनोज कुमार राठौर ने शनिवार को कानपुर विकास प्राधिकरण यानी केडीए के उपाध्यक्ष अंकुर कौशिक से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने बैंक स्टेटमेंट भी सौंपा. किसान का कहना है कि अब तक न तो रिश्वत की रकम वापस कराई गई है और न ही इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज हुई है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई.
केडीए उपाध्यक्ष ने किसान से कहा कि रिश्वत देना भी अपराध है. इस पर मनोज कुमार राठौर ने जवाब दिया कि उन पर मुआवजा जारी कराने के लिए दबाव बनाया गया था. किसान का कहना है कि उन्हें सरकारी प्रक्रिया की ज्यादा जानकारी नहीं थी और बार-बार चक्कर लगवाकर पैसे देने के लिए मजबूर किया गया.
मनोज कुमार राठौर ने आरोप लगाया कि पहले उनसे 12 लाख रुपये लिए गए और बाद में फिर उतनी ही रकम की मांग की गई. उन्होंने बताया कि इस मामले की शिकायत पहले भी की गई थी और जांच के आदेश भी हुए थे, लेकिन कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई. किसान का यह भी कहना है कि मामले से जुड़े एक अमीन को बाद में फिर से नौकरी पर रख लिया गया.
किसान द्वारा दिए गए बैंक रिकॉर्ड के अनुसार, 1 मार्च 2025 को उनके खाते से 12 लाख रुपये निकाले गए थे. आरोप है कि यह रकम पवन कुमार राय नाम के व्यक्ति तक पहुंची, जो कथित तौर पर केडीए के एक राजस्व कर्मचारी का रिश्तेदार है. किसान का कहना है कि अगर समय पर कार्रवाई होती तो कई बड़े अधिकारियों की भूमिका भी सामने आ सकती थी.
मनोज कुमार राठौर ने कहा कि उन्हें जांच का भरोसा दिया गया है. लेकिन अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे मुख्यमंत्री के जनता दर्शन कार्यक्रम में जाकर शिकायत करेंगे. इस मामले के सामने आने के बाद कानपुर विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और मुआवजा प्रक्रिया पर कई सवाल उठ रहे हैं.
इस पूरे मामले में जब आज तक ने कानपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से बात करने की कोशिश की, तो उनका फोन नहीं उठा. कई बार संपर्क करने के बावजूद मंडल आयुक्त की ओर से भी कोई जवाब नहीं मिला. (सिमर चावला का इनपुट)
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