सीआईआरजी में चारा खाते ब्रीडर बकरे. फोटो क्रेडिट-किसान तकआमतौर पर पशुओं की नस्ल के नाम का संबंध उनके जन्म स्थान से जुड़ा होता है. जैसे राजस्थान की सिरोही, सोजत और जखराना को ही ले लें, तीनों ही नाम गांव और तहसील के हैं. और ये इनके मूल स्थान हैं. लेकिन हम जिस तोतापरी और जमनापारी की बात कर रहे हैं उसका संबंध उनके नैन नक्श और रहन-सहन से है. जैसे तोतापरी नस्ल के बकरे-बकरियों का चेहरा तोते जैसा है. वहीं जमनापारी को उसकी खूबसूरती, नैन-नक्श, उसके नखरों उसके मूल स्थान के चलते इस नाम से बुलाया जाता है. लेकिन खास बात ये है कि इन्हें बकरीद पर कुर्बानी के लिए बहुत पसंद किया जाता है. इसके साथ बरबरी नस्ल के बकरों को पीछे नहीं छोड़ा जा सकता है. बरबरी को देश ही नहीं मीट के लिए अरब देशों में भी बहुत पसंद किया जाता है.
बकरीद के दौरान उत्तर भारत में बकरों की तीन बड़ी मंडी लगती हैं. इन्हीं मंडियों से निकला बकरा देश के दूसरे इलाकों में भी बिकने के लिए जाता है. बकरों की ये बड़ी मंडी- जसवंत नगर (यूपी), कालपी (मध्य प्रदेश) और मेवात (हरियाणा) मंडी हैं. तीनों ही खास नस्ल तोतापरी, जमनापारी और बरबरी बकरे इन्हीं मंडियों में आराम से मिल जाते हैं.
देश में बकरे-बकरियों की 40 से ज्यादा नस्ल पाई जाती हैं. इसमे से कुछ सिर्फ दूध के लिए पाली जाती हैं तो कुछ दूध और मीट दोनों के लिए पाले जाते हैं. यूपी की खास नस्ल बरबरी, जमनापारी हैं. बरबरी नस्ल के बकरे को बरबरा बकरा कहा जाता है. इसकी देश के अलावा अरब देशों में भी खासी डिमांड रहती है. वहीं मीट के लिए पहचान रखने वाला तोतापरी नस्ल का बकरा हरियाणा का है.
इस नस्ल के बकरे की हाइट दो से ढाई फुट तक होती है. हाइट ज्यादा न होने से खूब मोटा ताजी दिखता है. एक साल की उम्र में ये कुर्बानी के लिए तैयार हो जाता है. इसके कान छोटे और खड़े होते हैं. ये आगरा, इटावा, फिरोजाबाद, मथुरा और कानपुर में पाया जाता है. इस बकरे के रेट कम से कम 12 हजार रुपये से शुरु होते हैं. बकरीद के मौके पर इस नस्ल का बकरा 50 हजार रुपये से भी ज्यादा का बिक जाता है.
जमनापारी नस्ल यूपी के इटावा में मिलती है. इसके अलावा यह मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में भी पाई जाती है. ये लम्बा होता है और इसके कान मीडियम साइज के होते हैं. दिखने में मोटा और भारी होता है. इसका रंग आमतौर पर सफेद होता है. लेकिन कभी-कभी कान और गले पर लाल रंग की धारियां भी होती हैं. बकरे-बकरी दोनों के पैर के पीछे ऊपर लम्बे बाल होते हैं. इसकी नाक उभरी हुई होती है और उसके आसपास बालों के गुच्छे होते हैं. ये 15 से 20 हजार रुपये में आसानी से मिल जाता है.
इस नस्ल का बकरा पतला और लम्बा होता है. ऊंचाई कम से कम 3.5 से 4 फुट तक होती है. बाजार में बिकने के लिए तैयार होने में ये कम से कम 3 साल लेता है. ये नस्ल हरियाणा के मेवात और राजस्थान के भरतपुर जिले में पाई जाती है. इसकी बिक्री 20 हजार रुपये से शुरु होती है.
ये भी पढ़ें-
पशुपालकों और पर्यावरण तक के लिए ऐसे फायदेमंद है वाइट रेवोलुशन-2
गर्मियों में भी खूब होगा मछली उत्पादन, गडवासु के फिशरीज एक्सपर्ट ने दिए टिप्स
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today