काला नमक धानजब भी कोई पहली बार 'काला नमक धान' का नाम सुनता है, तो उसके मन में यही सवाल आता है कि क्या इस धान का रंग सचमुच काला होता है? कई लोग तो यह भी सोचते हैं कि इससे निकलने वाला चावल भी काले रंग का होता होगा, लेकिन हकीकत कुछ और ही है. दरअसल, काला नमक धान का दाना पूरी तरह काला नहीं होता. इसकी भूसी पर काले या गहरे भूरे रंग की परत दिखाई देती है, जबकि चावल निकालने के बाद इसका रंग हल्का सफेद या क्रीमी होता है. यानी नाम सुनकर जो तस्वीर आपके जेहन में बनती है, असलियत उससे काफी अलग है.
काला नमक धान का नाम उसके रंग की वजह से नहीं, बल्कि उसकी खास खुशबू और पारंपरिक पहचान की वजह से पड़ा है. कहा जाता है कि इस धान में एक अनोखी सुगंध होती है, जो काला नमक यानी ब्लैक सॉल्ट की महक जैसी महसूस होती है. इसी कारण इसे 'काला नमक' नाम मिला. यह धान मुख्य रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, संत कबीर नगर, बस्ती, गोरखपुर और आसपास के तराई क्षेत्रों में उगाया जाता है. इसकी खुशबू इतनी खास होती है कि इसे अक्सर 'चावलों का बासमती' भी कहा जाता है.
डॉ राम चेत चौधरी के मुताबिक, काला नमक धान का इतिहास करीब 3000 साल पुराना माना जाता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, काला नमक चावल का इतिहास भगवान बुद्ध के प्रसाद के रूप में देखा जाता है. माना जाता है कि भगवान बुद्ध अपने कपिलवस्तु प्रवास के दौरान किसानों को इस धान की खेती का आशीर्वाद दिया था. इसी वजह से यह चावल केवल एक फसल नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत भी माना जाता है.
काला नमक चावल सिर्फ अपनी खुशबू के लिए ही नहीं, बल्कि पोषण के लिए भी जाना जाता है. इसमें सामान्य चावल की तुलना में आयरन और जिंक जैसे पोषक तत्व अधिक पाए जाते हैं. यही कारण है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग भी इसे खाना पसंद करते हैं. इसके अलावा इसकी मांग देश ही नहीं, विदेशों में भी बढ़ रही है. इसकी विशेष पहचान को देखते हुए इसे GI टैग भी मिल चुका है, जिससे इसकी विशिष्टता को कानूनी संरक्षण मिला है.
पिछले कुछ वर्षों में काला नमक धान की खेती का रकबा काफी तेजी से बढ़ा है. इसकी अच्छी कीमत मिलने के कारण किसान भी इसकी खेती में रुचि दिखा रहे हैं. सरकार और कृषि संस्थान भी इसके प्रचार-प्रसार पर जोर दे रहे हैं, ताकि यह पारंपरिक फसल और अधिक लोकप्रिय हो सके.
अगर आपके मन में भी यह सवाल था कि काला नमक धान काला होता है या सफेद, तो जवाब है-धान की भूसी गहरे रंग की होती है, लेकिन उससे निकलने वाला चावल सफेद या हल्के क्रीम रंग का होता है. इसकी असली पहचान उसका रंग नहीं, बल्कि उसकी अनोखी खुशबू, स्वाद और ऐतिहासिक महत्व है. यही वजह है कि काला नमक चावल आज भी देश की सबसे खास पारंपरिक धान किस्मों में गिना जाता है.
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