चाय इंडस्ट्री को नुकसानभारतीय चाय संघ (आईटीए) ने चाय उद्योग की आर्थिक हालत को लेकर चिंता जताई है. संघ का कहना है कि भले ही भारत ने 2025 में रिकॉर्ड 280.40 मिलियन किलोग्राम चाय का निर्यात किया हो, लेकिन चाय उद्योग पर वित्तीय दबाव लगातार बढ़ रहा है. 21 मई को अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस से पहले जारी बयान में आईटीए ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में चाय की नीलामी कीमतों में बहुत कम बढ़ोतरी हुई है. वहीं, दूसरी तरफ बिजली, खाद और खेती में इस्तेमाल होने वाली दूसरी चीजों की लागत तेजी से बढ़ी है. संघ का कहना है कि बढ़ते खर्च और कम मुनाफे की वजह से चाय बागानों को चलाना मुश्किल होता जा रहा है. इसी को देखते हुए भारतीय चाय संघ ने सरकार से मांग की है कि चाय की सही कीमत तय करने, जलवायु से जुड़ी मदद देने और निर्यात को मजबूत बनाने के लिए जल्द कदम उठाए जाएं.
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक और तीसरा सबसे बड़ा चाय निर्यातक देश है. दुनिया में होने वाले कुल चाय उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी करीब 19 फीसदी है. वहीं, साल 2025 में भारत ने लगभग 1,369.98 मिलियन किलोग्राम चाय का उत्पादन किया, जबकि चाय निर्यात से 8,488.43 करोड़ रुपये की कमाई हुई.
लेकिन अच्छी खबर के साथ एक चिंता भी जुड़ी है. भारतीय चाय संघ (आईटीए) के मुताबिक, 2025 में चाय की नीलामी कीमतों में गिरावट आई है. चाय की औसत कीमत 2024 में 201.28 रुपये प्रति किलो थी, जो 2025 में घटकर 186.92 रुपये प्रति किलो रह गई. खासकर उत्तर भारत में कीमतों में और ज्यादा, करीब 9.87 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. आईटीए का कहना है कि उत्पादन और निर्यात बढ़ने के बावजूद कीमतें गिरने से चाय बागानों और उद्योग पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है.
एसोसिएशन ने बताया कि जनवरी-फरवरी 2026 के दौरान असम में सामान्य से 97 फीसदी कम बारिश हुई है. इसका सीधा असर चाय के पौधों की सेहत और उत्पादन पर पड़ा है. इसी वजह से जनवरी से मार्च 2026 के बीच पूरे भारत में चाय उत्पादन घटकर 98.01 मिलियन किलोग्राम रह गया, जबकि 2025 की इसी अवधि में यह 110.4 मिलियन किलोग्राम था. यानी चाय उत्पादन में करीब 11.22 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
रिपोर्ट में बताया गया है कि दार्जिलिंग में चाय उत्पादन लगातार घटता जा रहा है. साल 2008 में यहां करीब 11.58 मिलियन किलोग्राम चाय का उत्पादन होता था, जो 2025 तक घटकर सिर्फ 5.3 मिलियन किलोग्राम रह गया है. इतना ही नहीं, दार्जिलिंग चाय की कीमतों में भी खास बढ़ोतरी नहीं हुई. 2018 से 2024 के बीच कीमतों में औसतन करीब 2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, यानी दाम बढ़ने के बजाय घटे हैं.
इसी स्थिति को देखते हुए भारतीय चाय संघ ने सरकार से कई बड़ी मांगें की हैं. संघ चाहता है कि चाय की उत्पादन लागत को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम टिकाऊ कीमत तय की जाए, निर्यात को बढ़ावा देने के लिए RoDTEP दरों में बढ़ोतरी की जाए और पारंपरिक चाय उत्पादन पर मिलने वाली प्रोत्साहन योजनाएं फिर से शुरू की जाएं. इसके अलावा आईटीए ने दार्जिलिंग के चाय बागानों के लिए विशेष राहत पैकेज और कारोबार चलाने के लिए ब्याज पर सब्सिडी देने की भी मांग की है.
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