किसानों की जमीन पर अफसरों का कब्जा? करोड़ों की डील ने खोली भ्रष्टाचार की पोल

किसानों की जमीन पर अफसरों का कब्जा? करोड़ों की डील ने खोली भ्रष्टाचार की पोल

अलवर के टहला क्षेत्र में जमीनों के बड़े घोटाले का मामला सामने आया है. तहसीलदार, कानूनगो और पटवारी पर किसानों की जमीन सस्ते में खरीदकर बड़े कारोबारियों को बेचने के आरोप लगे हैं. कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज हुई है. ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से जमीनों का यह खेल खुलेआम चल रहा है.

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किसानों की जमीन पर अफसरों का कब्जा? करोड़ों की डील ने खोली भ्रष्टाचार की पोलअलवर में जमीनों के खेल का बड़ा खुलासा

राजस्थान के अलवर जिले के टहला क्षेत्र में एक बार फिर जमीनों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. यहां तहसीलदार, कानूनगो और पटवारी पर किसानों की जमीनों को गलत तरीके से खरीदने और उन्हें बड़े कारोबारियों को बेचने के आरोप लगे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी अपने पद का गलत फायदा उठा रहे हैं. इस मामले में एफआईआर भी दर्ज हुई है, लेकिन अभी तक किसी बड़े अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई है.

किसानों को डराकर जमीन खरीदने का आरोप

ग्रामीणों और अधिवक्ताओं का कहना है कि किसानों को डराकर उनकी जमीन सस्ते दामों में खरीदी जा रही है. बाद में वही जमीन हरियाणा और दिल्ली के बड़े व्यापारियों और बिल्डरों को करोड़ों रुपये में बेची जा रही है. लोगों का आरोप है कि कई जमीनों की रजिस्ट्री रिश्तेदारों और जानने वालों के नाम करवाई गई. इससे गांव के लोग बहुत परेशान हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं.

पहले भी हो चुका है बड़ा घोटाला

टहला क्षेत्र पहले भी जमीन घोटाले को लेकर चर्चा में रह चुका है. कुछ साल पहले यहां करीब 2500 बीघा जमीन 803 लोगों को गलत तरीके से आवंटित की गई थी. इस जमीन की कीमत करीब 1500 करोड़ रुपये बताई गई. बाद में जांच में कई गड़बड़ियां सामने आईं और कुछ जमीनों का आवंटन रद्द भी किया गया. कई अधिकारियों और कर्मचारियों को चार्जशीट दी गई थी.

सरिस्का के पास होने से बढ़ी जमीनों की कीमत

टहला क्षेत्र सरिस्का टाइगर रिजर्व के पास है. यहां पहाड़, होटल, रिसोर्ट और मार्बल की खानें हैं. इसी वजह से यहां की जमीन बहुत महंगी मानी जाती है. बड़े कारोबारी यहां निवेश करना चाहते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि इसी लालच में जमीनों का गलत खेल चल रहा है.

कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई एफआईआर

पूरा मामला कोर्ट तक पहुंचा. जांच के बाद तहसीलदार, कानूनगो और पटवारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि इसके बाद भी प्रशासन की तरफ से कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया. लोगों का आरोप है कि जो भी इनके खिलाफ आवाज उठाता है, उसे दबाने की कोशिश की जाती है.

जेसीबी चलाकर दिलाया गया कब्जा

ग्रामीणों ने एक और गंभीर आरोप लगाया है. उनका कहना है कि विवादित जमीन पर नियमों को नजरअंदाज कर जेसीबी चलाकर कब्जा दिलाया गया. यहां तक कि गेट तोड़ दिए गए और शिकायत वापस लेने का दबाव भी बनाया गया. इससे गांव के लोग और ज्यादा नाराज हैं. अब ग्रामीण सरकार से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

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