मोदी सरकार के 10 साल में किसानों की आय 138% बढ़ी, नीति आयोग सदस्य का दावा

मोदी सरकार के 10 साल में किसानों की आय 138% बढ़ी, नीति आयोग सदस्य का दावा

नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद के अनुसार, मोदी सरकार के 10 साल में किसानों की आय 138% बढ़ी है. कृषि क्षेत्र ने भी रिकॉर्ड ग्रोथ दर्ज की है और MSP और PM-Kisan जैसी योजनाओं से बड़ा बदलाव आया है.

Advertisement
मोदी सरकार के 10 साल में किसानों की आय 138% बढ़ी, नीति आयोग सदस्य का दावानीति आयोग का दावा-किसानों की दोगुनी हुई कमाई

देश में किसानों की आय और कृषि विकास को लेकर एक बड़े दावे ने नई बहस छेड़ दी है. नीति आयोग के सदस्य और कृषि अर्थशास्त्री रमेश चंद ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले 10 साल के कार्यकाल में भारत में किसानों की आय 138 प्रतिशत तक बढ़ी, जो दोगुनी से भी अधिक है. समाचार एजेंसी ANI को दिए एक विशेष इंटरव्यू में रमेश चंद ने यह भी दावा किया कि इस दौरान भारतीय कृषि ने आजादी के बाद की सबसे तेज 10 साल की औसत विकास दर दर्ज की है.

10 साल में रिकॉर्ड ग्रोथ

रमेश चंद के अनुसार, 2015 से 2026 के बीच कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों की औसत सालाना वृद्धि दर 4.45 प्रतिशत रही. यह अब तक की सर्वाधिक 10 साल की लगातार ग्रोथ है. उन्होंने कहा, “अगर आप 2015 से पहले के किसी भी दशक को देखें, तो कृषि क्षेत्र ने लगातार 10 साल तक 4.4 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल नहीं की थी.”

किसानों की आय दोगुनी से ज्यादा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016-17 में किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा था. रमेश चंद का कहना है कि यह लक्ष्य तय समय से पहले ही हासिल होता दिखा. उन्होंने कहा, 2016 से 2022 के बीच किसानों की आय दोगुनी हो गई. पूरे 10 साल के कार्यकाल में आय में 138 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई. उन्होंने कहा, “यह दोगुनी आय से भी करीब 38 प्रतिशत अधिक बढ़ोतरी है, जो कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ा संकेत है.”

MSP फॉर्मूला बना गेमचेंजर

रमेश चंद ने 2018 में लागू किए गए नए MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) फॉर्मूले को बड़ा बदलाव बताया. इस फॉर्मूले के तहत किसानों को खेती की लागत (paid-out cost) और परिवार के श्रम (family labour) पर कम से कम 50 प्रतिशत अधिक MSP देने की गारंटी दी गई. उनके अनुसार, इस कदम से किसानों को बेहतर दाम मिला, फसल उत्पादन में बढ़ोतरी हुई और नई तकनीक अपनाने को बढ़ावा मिला.

दुनिया में भारत की मजबूत स्थिति

रमेश चंद ने दावा किया कि अब भारत की कृषि विकास दर दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज है. उन्होंने कहा, “पहले चीन इस मामले में सबसे आगे था, लेकिन अब भारत ने उसे पीछे छोड़ दिया है और वैश्विक स्तर पर सबसे तेज कृषि ग्रोथ हासिल कर ली है.” 

FAO का ‘एग्रीकोला मेडल’ और भारत

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रोम स्थित FAO मुख्यालय में 2026 का ‘एग्रीकोला मेडल’ दिया गया. रमेश चंद ने कहा कि यह सम्मान भारत की कृषि उपलब्धियों, खाद्य सुरक्षा और गरीबी उन्मूलन के प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देता है. प्रधानमंत्री ने यह सम्मान देश के किसानों और कृषि वैज्ञानिकों को समर्पित किया.

सरकारी योजनाओं का असर

रमेश चंद के अनुसार कृषि क्षेत्र में सुधार के पीछे कई प्रमुख योजनाओं का योगदान रहा है. जैसे PM-Kisan योजना, मुफ्त अनाज वितरण कार्यक्रम और कृषि निवेश को बढ़ावा. उन्होंने कहा कि PM-Kisan के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता को किसान बीज खरीदने, खाद लेने, खेती में खर्च करने में लगाते हैं, जिससे उत्पादकता और उत्पादन दोनों बढ़ते हैं.

मोटे अनाज (मिलेट्स) को मिला बढ़ावा

भारत ने वैश्विक स्तर पर मोटे अनाज (मिलेट्स) को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है. भारत की पहल पर FAO ने 2023 को अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष घोषित किया. इसके बाद मिलेट्स की मांग और खपत बढ़ी. रमेश चंद के अनुसार, यह न सिर्फ पोषण सुरक्षा बढ़ाता है बल्कि जलवायु-अनुकूल खेती को भी बढ़ावा देता है.

जलवायु और टिकाऊ खेती पर जोर

उन्होंने बताया कि भारत ने जलवायु-अनुकूल कृषि, सतत विकास मिशन और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के तहत कई पहल की हैं, जिससे कृषि को भविष्य के लिए मजबूत बनाया जा रहा है.

नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद के दावों के अनुसार, पिछले एक दशक में भारत की कृषि और किसानों की आय में बड़ा सुधार हुआ है. MSP, PM-Kisan जैसी योजनाएं और सरकार की नीति पहलों ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है. हालांकि, इन आंकड़ों और दावों पर आगे भी बहस जारी रहने की संभावना है, लेकिन यह साफ है कि कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में एक बार फिर केंद्र में आ रहा है.

POST A COMMENT