गेहूं खरीद ने पकड़ी रफ्तारदेश में इस बार गेहूं खरीद का सीजन धीरे शुरू हुआ था, लेकिन मई के पहले हफ्ते में खरीद की रफ्तार तेज होने से सरकार को बड़ी राहत मिली है. केंद्र सरकार ने 7 मई 2026 तक कुल 276.67 लाख टन गेहूं खरीदा है. हालांकि यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले थोड़ा कम है, लेकिन अब अंतर तेजी से घट रहा है. अप्रैल के बीच में जहां खरीद में करीब 39 प्रतिशत की कमी थी, वहीं अब यह घटकर सिर्फ 3 प्रतिशत रह गई है. इससे उम्मीद बढ़ी है कि सरकार इस साल 345 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य हासिल कर सकती है.
इस बार गेहूं खरीद में सबसे बड़ा योगदान मध्य प्रदेश का रहा है. मई के पहले सात दिनों में राज्य से बड़ी मात्रा में गेहूं खरीदा गया. 1 से 7 मई के बीच मध्य प्रदेश में 24.55 लाख टन गेहूं की खरीद हुई, जबकि पिछले साल इसी समय यह आंकड़ा सिर्फ 9.62 लाख टन था. यही वजह है कि देशभर में गेहूं खरीद की रफ्तार अचानक बढ़ी.
दरअसल, शुरुआत में मध्य प्रदेश में खरीद काफी धीमी थी. किसान लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और कई जगह ट्रैक्टर मार्च भी निकाले गए. किसानों का कहना था कि मंडियों में खरीद समय पर नहीं हो रही है. इस मुद्दे को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी राज्य सरकार के सामने उठाया था. इसके बाद खरीद प्रक्रिया में तेजी लाई गई.
हालांकि अब भी मध्य प्रदेश में कुल खरीद पिछले साल से कम है. 7 मई तक राज्य में 52.04 लाख टन गेहूं खरीदा गया है, जबकि पिछले साल इसी समय 77.2 लाख टन खरीद हो चुकी थी. लेकिन सरकार ने राज्य का खरीद लक्ष्य बढ़ाकर 100 लाख टन कर दिया है, जिससे आगे और तेजी आने की उम्मीद है.
पंजाब और हरियाणा में भी इस बार गेहूं खरीद अच्छी रही है. पंजाब में अब तक 120.67 लाख टन गेहूं खरीदा गया है, जो पिछले साल से 5 प्रतिशत ज्यादा है. हालांकि इस बार मौसम खराब रहने के कारण कई जिलों में गेहूं की चमक कम हो गई थी. मार्च और अप्रैल में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित हुई थी. इसके बावजूद सरकार ने नियमों में ढील देकर किसानों का गेहूं खरीदना जारी रखा.
हरियाणा में भी खरीद का आंकड़ा बढ़ा है. यहां अब तक करीब 80 लाख टन गेहूं खरीदा जा चुका है, जो पिछले साल के मुकाबले 15 प्रतिशत ज्यादा है. हरियाणा ने अपना तय लक्ष्य भी पार कर लिया है.
हालांकि अब दोनों राज्यों में मंडियों में गेहूं की आवक कम होने लगी है. पंजाब और हरियाणा में खरीद का समय 15 मई तक तय है, इसलिए आने वाले दिनों में खरीद की गति धीमी पड़ सकती है.
उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में भी इस बार खरीद में बढ़ोतरी देखने को मिली है. उत्तर प्रदेश में अब तक 9.75 लाख टन गेहूं खरीदा गया है, जो पिछले साल से थोड़ा ज्यादा है. वहीं बिहार में खरीद में 54 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
सरकार ने इन राज्यों के खरीद लक्ष्य भी बढ़ा दिए हैं. उत्तर प्रदेश में लक्ष्य 10 लाख टन से बढ़ाकर 25 लाख टन कर दिया गया है. बिहार में भी लक्ष्य 0.18 लाख टन से बढ़ाकर 1.8 लाख टन किया गया है. इससे साफ है कि सरकार अब पारंपरिक राज्यों के अलावा दूसरे राज्यों में भी खरीद बढ़ाने पर जोर दे रही है.
इस साल मौसम गेहूं खरीद के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आया. मार्च और अप्रैल में कई राज्यों में बारिश और ओलावृष्टि हुई, जिससे गेहूं में नमी बढ़ गई. कई जगह दाने सिकुड़ गए और चमक भी कम हो गई. ऐसे में बड़ी मात्रा में गेहूं तय गुणवत्ता मानकों से बाहर हो गया था.
स्थिति को देखते हुए सरकार ने नियमों में राहत दी और खराब गुणवत्ता वाले गेहूं को भी विशेष श्रेणी में खरीदने की अनुमति दी. इससे किसानों को अपनी फसल बेचने में राहत मिली और खरीद प्रक्रिया रुकी नहीं.
अब सरकार की कोशिश है कि आने वाले दिनों में खरीद की रफ्तार और बढ़े, ताकि तय लक्ष्य पूरा किया जा सके और किसानों को समय पर भुगतान मिल सके.
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