महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन 20 प्रतिशत तक घटने की आशंका, गन्‍ने की पैदावार पर भी पड़ा असर

महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन 20 प्रतिशत तक घटने की आशंका, गन्‍ने की पैदावार पर भी पड़ा असर

महाराष्ट्र में आगामी गन्ना पेराई सीजन के दौरान चीनी उत्पादन करीब 20 फीसदी घटकर 80 लाख टन रहने का अनुमान है. WISMA चेयरमैन भैरवनाथ थोम्ब्रे के मुताबिक, बारिश की कमी से गन्ने की प्रति एकड़ पैदावार 30-40 फीसदी तक घट रही है.

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महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन 20 प्रतिशत तक घटने की आशंका, गन्‍ने की पैदावार पर भी पड़ा असरचीनी उत्‍पादन घटने की आशंका (सांकेतिक तस्‍वीर)

महाराष्ट्र में आगामी गन्ना पेराई सीजन के दौरान चीनी उत्पादन में करीब 20 फीसदी की कमी आने का अनुमान है. वेस्ट इंडिया शुगर मिल्स एसोसिएशन (WISMA) के चेयरमैन भैरवनाथ थोम्ब्रे के मुताबिक, बारिश की कमी और चीनी रिकवरी रेट घटने से इस साल उत्पादन प्रभावित हो सकता है. भैरवनाथ थोम्ब्रे ने सोमवार को कहा कि महाराष्ट्र में इस साल बारिश की भारी कमी रही है, जिसका असर गन्ने समेत कई फसलों की पैदावार पर पड़ा है. इन परिस्थितियों के कारण राज्य में चीनी उत्पादन करीब 80 लाख टन रह सकता है, जो पिछले सीजन के लगभग 99 लाख टन के मुकाबले करीब 20 फीसदी कम होगा.

गन्ने की पैदावार भी घटने का अनुमान

WISMA चेयरमैन ने बताया कि राज्य में गन्ने का कुल रकबा अच्छा है, लेकिन इस साल प्रति एकड़ गन्ने की पैदावार में 30 से 40 फीसदी तक गिरावट आ रही है. उन्होंने कहा कि पेराई में जितनी अधिक देरी होगी, गन्ने की पैदावार में गिरावट उतनी ही बढ़ सकती है. भैरवनाथ थोम्ब्रे ने इस साल गन्ने की पेराई 15 अक्टूबर से शुरू करने के सरकार के फैसले का समर्थन किया.

उन्होंने कहा कि जल्द पेराई शुरू होने से किसानों और चीनी मिलों, दोनों को फायदा होगा. उनका कहना है कि खेत में गन्ना सूखने से पहले उसे मिल तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि किसानों को फसल से कुछ आमदनी मिल सके.

थोम्ब्रे के मुताबिक, मराठवाड़ा, विदर्भ, सोलापुर और अहिल्यानगर जिलों में पिछले करीब 45 दिनों से बारिश नहीं होने के कारण स्थिति गंभीर हो गई है. इन इलाकों में गन्ना सूखने लगा है और पानी की कमी का असर फसल पर साफ दिखाई दे रहा है.

चीनी मिलों के सामने भी पानी की चुनौती

WISMA चेयरमैन ने कहा कि गन्ने की कमी के साथ चीनी मिलों को पानी की उपलब्धता को लेकर भी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है. उन्होंने बताया कि इस साल सरकार ने जलाशयों के पानी को पेयजल जरूरतों के लिए आरक्षित रखा है. ऐसे में अगले साल जनवरी-फरवरी में सूखे जैसी स्थिति के बीच मिलों के संचालन के लिए पानी जुटाना मुश्किल हो सकता है.

रिकवरी रेट में नुकसान की भरपाई कीमतों से होने की उम्मीद

भैरवनाथ थोम्ब्रे ने कहा कि फिलहाल चीनी के बाजार भाव अच्छे हैं और दिवाली के दौरान भी इनके स्थिर रहने की संभावना है. उन्होंने कहा कि चीनी रिकवरी रेट में होने वाले नुकसान की कुछ भरपाई बेहतर कीमतों से हो सकती है.

चीनी की सीधे बाजार में बिक्री की अनुमति

उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने चीनी मिलों को निर्धारित कोटे के बजाय सीधे बाजार में चीनी भेजने की अनुमति दी है. उनके अनुसार, इससे मौजूदा कीमतों का लाभ मिलों को मिल सकता है.

थोम्ब्रे ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में गन्ने की जल्द से जल्द पेराई किसानों के हित में है. यदि गन्ने को समय पर मिलों तक नहीं पहुंचाया गया, तो पानी की कमी के कारण फसल खेतों में ही सूख सकती है और किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है. (पीटीआई)

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