Wheat Flour Export: भारत ने खोला गेहूं आटे के निर्यात का रास्ता, इतने लाख टन भेजने की तैयारी

Wheat Flour Export: भारत ने खोला गेहूं आटे के निर्यात का रास्ता, इतने लाख टन भेजने की तैयारी

केंद्र सरकार ने भारत से इतने लाख मीट्रिक टन आटे के निर्यात की अनुमति दे दी है. गेहूं की रिकॉर्ड खरीदारी और पर्याप्त स्टॉक के बीच यह कदम तीन साल बाद निर्यात में ढील दी गई है. सीमित निर्यात से वैश्विक आपूर्ति में मदद और भारतीय मिलों को अंतरराष्ट्रीय मांग का लाभ मिलेगा.

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Wheat Flour Export: भारत ने खोला गेहूं आटे के निर्यात का रास्ता, इतने लाख टन भेजने की तैयारीगेहूं आटे का निर्यात

गेहूं और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात में भारत एक नई उपलब्धि हासिल करने जा रहा है. यह उपलब्धि है ऑर्गेनिक आटे के निर्यात की.अभी तक हम गेहूं और उससे बने सामान्य प्रोडक्ट के निर्यात के बारे में सुनते और जानते थे. मगर भारत ने इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. दरअसल, भारत सरकार ने शुक्रवार को कहा कि उसने 5 लाख मीट्रिक टन (LMT) गेहूं के आटे और उससे संबंधित उत्पादों के निर्यात की अनुमति दे दी है, क्योंकि दुनिया के दूसरे सबसे बड़े अनाज उत्पादक देश में आपूर्ति में सुधार हुआ है.

तीन साल बाद निर्यात की अनुमती

बता दें कि भीषण गर्मी के कारण उत्पादन में कमी आने और घरेलू कीमतों के रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद सरकार ने मई 2022 में गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था. तीन साल से ज्यादा समय से लगे प्रतिबंधों के बाद गेहूं-आधारित उत्पादों के निर्यात में यह पहली बड़ी ढील है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश में गेहूं की अच्छी खरीद हो रही है, महंगाई दर 0.3 प्रतिशत के रिकॉर्ड निचले स्तर पर है, और पर्याप्त बफर स्टॉक है.

रिकॉर्ड स्तर पर गेहूं की खरीद

2024 से 25 के रबी मार्केटिंग सीजन के दौरान, 30 जून तक गेहूं की खरीद 300 लाख मीट्रिक टन (एमएमटी) तक पहुंच गई थी, जो तीन साल में उच्चतम स्तर है. वहीं, कृषि मंत्रालय ने पहले जुलाई 2024 से जून 2025 की अवधि के लिए रिकॉर्ड 117.5 एमएमटी गेहूं उत्पादन का अनुमान लगाया था, जिससे घरेलू उपलब्धता को लेकर विश्वास बढ़ा था. 2022 में निर्यात प्रतिबंध लगाए जाने से पहले, भारत का गेहूं निर्यात रिकॉर्ड 2.12 अरब डॉलर तक पहुंच गया था.

दुन‍िया लेगी राहत की सांस

विश्लेषकों का कहना है कि भले ही यह शुरुआत छोटी हो. लेकिन इससे ग्लोबल सप्लाई में सुधार आएगा. खासकर एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व के उन देशों के लिए जो गेहूं के आटे की आयात पर निर्भर हैं. साथ ही, इससे भारतीय मिलों और प्रोसेसर को खास और ऑर्गेनिक अनाज उत्पादों की मजबूत अंतरराष्ट्रीय मांग का फायदा उठाने का मौका मिलेगा. सरकार का यह कदम देश के किसानों और निर्यातकों के लिए एक अच्छी खबर है. इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. 

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