Potato Exports: इंडियन प्रोसेस्ड आलू का दुनिया के बाजार में धमाल, एक्सपोर्ट के आंकड़ों ने सबको चौंकाया

Potato Exports: इंडियन प्रोसेस्ड आलू का दुनिया के बाजार में धमाल, एक्सपोर्ट के आंकड़ों ने सबको चौंकाया

पिछले तीन सालों में भारतीय कृषि निर्यात के क्षेत्र से एक शानदार खबर है. दुनिया भर के बाजारों में भारतीय आलू ग्रैन्यूल्स और पैलेट्स का जबरदस्त 'ग्लोबल धमाका' देखने को मिल रहा है. इस सफलता के पीछे गुजरात का सबसे बड़ा हाथ है, जो देश के 'आलू प्रोसेसिंग हब के रूप में उभरा है. गुजरात के बनासकांठा जैसे जिलों से निकलने वाला उच्च गुणवत्ता वाला आलू आज अंतरराष्ट्रीय मानकों को मात दे रहा है.

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इंडियन प्रोसेस्ड आलू का दुनिया के बाजार में धमाल, एक्सपोर्ट के आंकड़ों ने सबको चौंकायाआलू निर्यात में उछाल दर्ज

चीन के बाद भारत दुनिया का शीर्ष आलू उत्पादक देश है. चीन लगभग 935 लाख टन और भारत लगभग 600 लाख टन आलू उत्पादन करते हैं. इतने बड़े पैमाने पर उत्पादन के बावजूद, अगर प्रोसेस्ड आलू जैसे कि फ्रोजन चिप्स, फ्रेंच फ्राइज और स्टार्च के निर्यात की बात की जाए, तो इसमें यूरोपीय देश बाजी मार लेते हैं. हालांकि भारत का आलू घरेलू खपत और कच्चे माल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि 'वैल्यू एडिशन' के दम पर दुनिया भर में अपनी धाक जमा रहा है.

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निर्यात-आयात नीतियों और आर्थिक आंकड़ों का विश्लेषण करता है, उसकी रिपोर्ट के अनुसार, भारत से प्रोसेस्ड आलू उत्पादों, विशेष रूप ग्रैन्यूल्स और पैलेट्स के निर्यात में पिछले तीन वर्षों में अभूतपूर्व उछाल आया है. यह वृद्धि न केवल भारतीय किसानों की आय बढ़ाने वाली है, बल्कि वैश्विक खाद्य सप्लाई चेन में भारत को एक निर्यातक के रूप में स्थापित कर रही है. वर्तमान में किसी भी अन्य प्रोसेस्ड फूड कैटेगरी की तुलना में सबसे तेज बढ़ने वाला क्षेत्र बन गया है.

3 साल में निर्यात 450 फीसदी के पार

भारत के डिहाइड्रेटेड आलू ग्रैन्यूल्स और पैलेट्स के निर्यात में साल 2022 से 2025 के बीच एक ऐतिहासिक बढ़त दर्ज की गई है. जहां यह आंकड़ा वित्तीय साल 2022 में 95.76 करोड़ रुपये से उछलकर वित्तीय साल 2022 में 531.72 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. पिछले तीन सालों का सफर देखें तो वित्तीय वर्ष 2022 में इसका निर्यात 95.76 करोड़ रुपये का था, जो अगले ही साल 2023 में लगभग तीन गुना की जबरदस्त तेजी के साथ 254.52 करोड़ रुपया हो गया.

विकास की यह रफ्तार वित्तीय वर्ष 2024 में भी जारी रही और निर्यात बढ़कर 488.04 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. वित्तीय वर्ष 2025 के समाप्त होने तक भारत ने कुल 531.72 करोड़ रुपये का आलू निर्यात दर्ज किया. महज तीन वर्षों के भीतर निर्यात 95 करोड़ रुपये से बढ़कर 531 करोड़ के पार जाना यह साबित करता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय आलू उत्पादों की मांग कितनी तेजी से बढ़ रही है, जिसके नतीजन इस क्षेत्र में तीन साल के भीतर कुल 453.1% की अविश्वसनीय फीसदी वृद्धि दर्ज की गई है.

मलेशिया बना सबसे बड़ा खरीदार

भारतीय प्रोसेस्ड आलू उत्पादों विशेषकर ग्रैन्यूल्स और पैलेट्स की सबसे अधिक मांग दक्षिण-पूर्व और पूर्वी एशिया के देशों में देखी जा रही है, जो भारत के कुल निर्यात का लगभग 80 फीसदी हिस्सा खरीदते हैं. वित्तीय वर्ष 2025 में मलेशिया भारत का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है, जहां कुल निर्यात 185.64 करोड़ रुपया तक पहुंच गया है. इसी अवधि में भारत से फिलीपींस ने 59.64 करोड़ और इंडोनेशिया ने 57.12 करोड़ रुपये के प्रोसेस्ड आलू उत्पादों का आयात किया है.

थाइलैंड भी एक प्रमुख बाजार के रूप में उभरा है, जिसने 56.28 करोड़ रुपये की खरीदारी की है. इन एशियाई देशों में स्नैक्स, इंस्टेंट नूडल्स और 'क्विक सर्विस रेस्टोरेंट'  उद्योगों के विस्तार के कारण भारतीय आलू उत्पादों पर वैश्विक भरोसा और मांग निरंतर बढ़ रही है. 

वैश्विक संकट बना भारत के लिए अवसर

वैश्विक परिस्थितियों और व्यापारिक समझौतों ने भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक बड़ा प्लेयर बना दिया है. वर्तमान में यूरोप के प्रोसेसिंग उद्योग बढ़ती बिजली की कीमतों और खराब मौसम के संकट से जूझ रहे हैं, जबकि चीन अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने में लगा है. इस खाली जगह को भारत ने अपनी कम लागत, साल भर उपलब्ध रहने वाली फसल और BIS, ISO और HACCP जैसी अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता के दम पर भरा है.

इसके साथ ही, भारत-आसियान व्यापार समझौते के तहत मिलने वाली कम ड्यूटी टैक्स ने भारतीय उत्पादों को सस्ता और प्रतिस्पर्धी बनाया है. मुंद्रा, कांडला और चेन्नई जैसे बंदरगाहों से छोटे समुद्री रास्तों की वजह से माल भेजने का समय और खर्च दोनों कम हुए हैं जिससे भारतीय निर्यातक दूसरे देशों के मुकाबले विदेशी खरीदारों को कम कीमत पर बेहतर माल पहुंचाने में सफल रहे हैं.

इस साल भी निर्यात में 'सुपरफास्ट' तेजी

भारत के प्रोसेस्ड आलू निर्यात में आई आत्मनिर्भरता अब एक स्थायी सफलता बन चुकी है, जो भारतीय कृषि को मुनाफे के आधुनिक व्यवसाय में बदल रही है. वित्तीय वर्ष 2025 के शुरुआती पांच महीनों अप्रैल-अगस्त 2025 में ही भारत ने 253.68 करोड़ रुपये का निर्यात कर लिया है. जो भविष्य में और भी बड़े रिकॉर्ड बनने का संकेत देता है.

आलू के चिप्स, रेडी-टू-ईट आलू और स्टार्च जैसे उत्पादों की वैश्विक मांग को देखते हुए यह साफ है कि भारत जल्द ही दुनिया के 'स्नैक बास्केट' के रूप में अपनी पहचान बना रहा है. यह प्रगति दिखाती है कि भारतीय खेती अब केवल पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि एक बड़ा लाभकारी उद्योग बन रही है.

आलू प्रोसेसिंग हब बन रहा है गुजरात

गुजरात आज भारत में 'प्रोसेस्ड आलू' के उत्पादन और निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है. साल 2024-25 में राज्य ने 48.59 लाख टन आलू पैदा किया, जिसमें से 11.50 लाख टन प्रोसेस्ड ग्रेड का है. पिछले दो दशकों में यह वृद्धि हैरान करने वाली है, जहां साल 2004-05 में इसका रकबा मात्र 4000 हेक्टेयर था, वहीं अब यह बढ़कर 37,000 हेक्टेयर हो गया है.

आज गुजरात के कुल प्रोसेस्ड आलू का 60 फीसदी हिस्सा वेफर्स और 40 फीसदी फ्रेंच फ्राइज बनाने में इस्तेमाल होता है. बनासकांठा, साबरकांठा और अरवल्ली जैसे जिले इस क्रांति के नायक हैं, जो न केवल देश की मांग पूरी कर रहे हैं बल्कि दुनिया भर में फ्रेंच फ्राइज का निर्यात भी कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्य भले ही उत्पादन में आगे हों, लेकिन प्रोसेसिंग और फ्रोजन फूड के मामले में गुजरात के किसानों की पकड़ सबसे मजबूत है, जो उद्योगों को उच्च गुणवत्ता वाला कच्चा माल सप्लाई कर रहे हैं.

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