गेहूं की खड़ी फसल में रोग–कीट का खतरा: रतुआ, झुलसा और चूहों से ऐसे बचाएं 10% तक पैदावार

गेहूं की खड़ी फसल में रोग–कीट का खतरा: रतुआ, झुलसा और चूहों से ऐसे बचाएं 10% तक पैदावार

गेहूं की खड़ी फसल में रतुआ, झुलसा, करनाल बंट, दीमक, माहूं और चूहों से 5–10% तक पैदावार घट सकती है. जानिए रोग-प्रतिरोधी किस्म, सही दवा, जैविक उपाय और 6 दिन के चूहा नियंत्रण कार्यक्रम से फसल को सुरक्षित रखने के असरदार तरीके.

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गेहूं की खड़ी फसल में रोग–कीट का खतरा: रतुआ, झुलसा और चूहों से ऐसे बचाएं 10% तक पैदावारगेहूं को रोगों और चूहों से बचाना जरूरी

गेहूं की खड़ी फसल में कई तरह की बीमारियां लगती हैं जो पैदावार को 5 से 10 प्रतिशत तक कम कर देती हैं. इनमें सबसे प्रमुख रतुआ (गेरुई) है, जो तीन प्रकार का होता है: पीला, भूरा और काला. इसके अलावा करनाल बंट और झुलसा भी फसल को भारी नुकसान पहुंचाते हैं. झुलसा रोग में पत्तियों पर पीले-भूरे धब्बे पड़ जाते हैं जो बाद में गहरे कत्थई हो जाते हैं. वहीं कंडुआ (स्मट) रोग में बालियों के दाने काले पाउडर में बदल जाते हैं. इन रोगों से बचने का सबसे आसान तरीका है कि किसान हमेशा रोग-प्रतिरोधी किस्मों के बीजों का ही चुनाव करें और बुआई से पहले बीज उपचार जरूर करें.

1- रोगों की रोकथाम के प्रभावी तरीके

यदि खड़ी फसल में झुलसा या रतुआ रोग के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत सावधानी बरतनी चाहिए. इसकी रोकथाम के लिए मैन्कोजेब (2 किग्रा प्रति हेक्टेयर) या प्रोपिकोनाजोल (500 मिली प्रति 1000 लीटर पानी) का घोल बनाकर छिड़काव करना सबसे असरदार माना जाता है. यदि खेत में झुलसा, रतुआ और करनाल बंट तीनों का खतरा महसूस हो, तो प्रोपिकोनाजोल का उपयोग करना बहुत जरूरी है. सही समय पर दवा का छिड़काव न केवल दानों की क्वालिटी सुधारता है, बल्कि किसानों की लागत को कम कर मुनाफे को सुरक्षित रखता है.

2- हानिकारक कीट और उनका नियंत्रण

फसल को रोगों के साथ-साथ कीटों से भी बड़ा खतरा रहता है. दीमक एक ऐसा सामाजिक कीट है जो पूरी कॉलोनी बनाकर जड़ों को चट कर जाता है. इसके अलावा गुजिया विविल मिट्टी की दरारों में छिपकर नए पौधों को काट देता है. माहूं (चेपा) कीट पत्तियों और बालियों का रस चूसकर उन्हें कमजोर कर देता है, जिससे पत्तियों पर काली फफूंद जम जाती है और पौधे भोजन नहीं बना पाते. इनके नियंत्रण के लिए बुआई के समय क्लोरपाइरीफॉस से बीज शोधन करना चाहिए. खड़ी फसल में सिंचाई के पानी के साथ भी इन दवाओं का प्रयोग किया जा सकता है.

3- जैविक और रासायनिक कीट प्रबंधन

कीटों से बचाव के लिए रसायनों के साथ-साथ जैविक तरीके भी अपनाए जा सकते हैं. ब्यूवेरिया बैसियाना जैसे जैव कीटनाशक को गोबर की खाद में मिलाकर खेत में डालने से दीमक और अन्य भूमिगत कीटों का सफाया हो जाता है. माहूं के लिए नीम के तेल (एजाडिरेक्टिन) का छिड़काव एक सुरक्षित और सस्ता विकल्प है. यदि कीटों का प्रकोप ज्यादा हो, तो डाइमेथोएट या थायोमेथाक्सम जैसी दवाओं का छिड़काव 750-1000 लीटर पानी में घोलकर करना चाहिए. सही मात्रा और सही समय पर दवाओं का प्रयोग ही सफल खेती की कुंजी है.

4- चूहों से बचाव का साप्ताहिक कार्यक्रम

चूहे गेहूं की फसल के सबसे बड़े दुश्मन हैं, लेकिन एक योजनाबद्ध तरीके से इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है. इसके लिए 6 दिनों का विशेष कार्यक्रम अपनाना चाहिए. पहले दिन बिलों की पहचान कर उन्हें बंद करें. दूसरे और तीसरे दिन खुले हुए बिलों में बिना जहर वाला दाना (सरसों तेल और भुने दाने) डालें ताकि चूहों का विश्वास जीता जा सके. चौथे दिन जिंक फास्फाइड मिला हुआ जहरीला चारा रखें. पांचवें और छठे दिन मरे हुए चूहों को जमीन में दबा दें और बचे हुए बिलों को फिर से बंद करें. ब्रोमोडियोलोंन की टिकिया भी बिलों में रखना एक प्रभावी तरीका है, जिससे चूहे धीरे-धीरे पूरी तरह खत्म हो जाते हैं.

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