मौसम विभाग की सलाह से किसानों-पशुपालकों की हो रही मदद (AI Image)केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा में बताया कि सरकार मौसम और जलवायु से जुड़े खतरों की समय रहते जानकारी देने के लिए देश में निगरानी और पूर्वानुमान व्यवस्था को मजबूत कर रही है. इसका सीधा फायदा खेती-किसानी, पशुपालन और मौसम पर निर्भर दूसरे क्षेत्रों को पहुंचाने के लिए कृषि मौसम सलाह और स्थानीय स्तर की चेतावनी सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है. मौसम विभाग किसानों को मौसम आधारित कृषि सलाह उपलब्ध करा रहा है.
मिशन मौसम के तहत Impact-Based Forecasts यानी प्रभाव आधारित पूर्वानुमान को और बेहतर किया जा रहा है. इसमें जगह, फसल और फसल की अवस्था के अनुसार सलाह देने पर जोर है. कल्प (KALP) और मौसम संकल्प (Mausam SANKALP) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए ऐसी जानकारियां उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि किसान मौसम के अनुसार खेती से जुड़े फैसले ले सकें.
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार ने पशुपालन से जुड़े लोगों तक भी मौसम संबंधी सलाह पहुंचाने की व्यवस्था की है. IMD की सेवाओं के जरिए कृषि सखियों (Krishi Sakhis) और पशु सखियों (Pashu Sakhis) को कृषि और पशुपालन से जुड़ी मौसम जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है. इसका उद्देश्य मौसम में बदलाव, भारी बारिश, गर्मी या दूसरे जोखिमों को देखते हुए किसानों और पशुपालकों को समय रहते जरूरी तैयारी में मदद करना है.
किसानों तक मौसम की जानकारी पहुंचाने के लिए देशभर में बड़े स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं. मंत्री ने जवाब दिया कि IMD ने 373 जिलों में 7,300 से ज्यादा किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए हैं. इन कार्यक्रमों के जरिए किसानों को मौसम पूर्वानुमान, कृषि मौसम सलाह और खराब मौसम से बचाव की जानकारी दी जा रही है.
वहीं, पंचायत मौसम सेवा (Panchayat Mausam Seva) पहल के तहत मौसम पूर्वानुमान को ई-ग्रामस्वराज (e-GramSwaraj) और ई-मानचित्र (e-Manchitra) जैसे प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है. इसके जरिए पंचायत प्रतिनिधियों तक मौसम संबंधी सलाह वॉट्सऐप के माध्यम से पहुंचाई जाती है. इससे लोकल लेवल पर खेती, पशुपालन और अन्य मौसम आधारित गतिविधियों की तैयारी में मदद मिल सकती है.
मिशन मौसम के तहत सरकार का लक्ष्य मौसम की गंभीर घटनाओं की चेतावनी को आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाना है. इसके लिए मौसम (MAUSAM), मेघदूत (Meghdoot), दामिनी (DAMINI), उमंग (UMANG) और समुद्र (SAMUDRA) जैसे मोबाइल ऐप के साथ सचेत (SACHET) प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है. SACHET कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल पर आधारित है, जिससे अलग-अलग माध्यमों के जरिए समय पर अलर्ट पहुंचाया जा सके.
सरकार Mission Mausam के तहत 2030 तक मौसम पूर्वानुमान की सटीकता में 10 से 15 फीसदी तक सुधार का लक्ष्य लेकर चल रही है. इसके साथ गंभीर मौसम की घटनाओं का 5 किलोमीटर × 5 किलोमीटर के स्तर तक पूर्वानुमान लगाने और चेतावनी के लिए ज्यादा समय उपलब्ध कराने की योजना है.
मौसम निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए डॉपलर वेदर रडार्स, रेडियोसॉन्ड और रेडियोविंड यानी RS/RW स्टेशन, डिस्ड्रोमीटर, विंड प्रोफाइलर, माइक्रोवेव रेडियोमीटर, सोलर रेडिएशन मॉनिटरिंग स्टेशन और अलग-अलग तरह के LiDAR सहित कई आधुनिक उपकरण लगाए जा रहे हैं. इनसे वायुमंडल और मौसम की स्थिति का ज्यादा बारीकी से आकलन करने में मदद मिलेगी.
गुजरात में वासीबोरसी और जेगरी में हाई फ्रिक्वेंसी रडार की जोड़ी से तटीय क्षेत्र की निगरानी की जा रही है. वहीं महाराष्ट्र में नेशनल सेंटर फॉर कोस्टल रिसर्च मुंबई महानगर क्षेत्र के करीब 400 वर्ग किलोमीटर हिस्से के लिए शहरी बारिश का पूर्वानुमान और बाढ़ के पानी के फैलाव की मैपिंग उपलब्ध करा रहा है. इससे शहरी बाढ़ के जोखिम से निपटने की तैयारी में मदद मिलती है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग देशभर में डॉपलर वेदर रडार्स, ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन्स और रेन गेज स्टेशन्स के जरिए मौसम पर नजर रखता है. इनसे जिला और ब्लॉक स्तर तक मौसम की स्थिति का पता लगाने में मदद मिलती है. इस नेटवर्क से मिलने वाले रियल टाइम आंकड़ों को आधुनिक मौसम और समुद्री मॉडल में शामिल किया जाता है.
IMD और INCOIS से मिलने वाले मौसम और समुद्री पूर्वानुमान गृह मंत्रालय, नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और जिला कलेक्टरों तक पहुंचाए जाते हैं. इसका इस्तेमाल चक्रवात, तूफानी लहर, ऊंची समुद्री लहर और अन्य गंभीर मौसम की घटनाओं से पहले तैयारी करने के लिए किया जाता है.
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