लीची कारोबार में चीन की बादशाहत, भारत ने दुनिया में हासिल किया दूसरा स्थान

लीची कारोबार में चीन की बादशाहत, भारत ने दुनिया में हासिल किया दूसरा स्थान

साल 2024 में वैश्विक लीची उत्पादन का बाजार मूल्य 10.7 अरब डॉलर पहुंच गया है. चीन 6.25 अरब डॉलर के उत्पादन मूल्य और 58 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी के साथ दुनिया का सबसे बड़ा लीची उत्पादक देश बना हुआ है. वहीं भारत 1.56 अरब डॉलर के उत्पादन मूल्य के साथ दूसरे स्थान पर है, जो वैश्विक लीची अर्थव्यवस्था में उसकी मजबूत स्थिति को दर्शाता है. यह जानकारी ICAR ने दी है.

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लीची कारोबार में चीन की बादशाहत, भारत ने दुनिया में हासिल किया दूसरा स्थानलीची निर्यात में भारत का दूसरा स्थान

दुनिया में लीची उत्पादन और व्यापार का केंद्र एशिया बना हुआ है. साल 2024 में वैश्विक लीची उत्पादन का बाजार मूल्य लगभग 10.7 अरब डॉलर आंका गया है, जिसमें अकेले चीन की हिस्सेदारी 6.25 अरब डॉलर रही. इस तरह चीन वैश्विक लीची अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा देश बनकर उभरा है. वहीं भारत 1.56 अरब डॉलर के उत्पादन मूल्य के साथ दूसरे स्थान पर है.

ताजा आंकड़ों के अनुसार, चीन दुनिया के कुल लीची उत्पादन मूल्य में 58 प्रतिशत से अधिक योगदान देता है. इसके बाद भारत, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देश प्रमुख उत्पादक हैं. वैश्विक स्तर पर लीची उत्पादन करीब 34 लाख मीट्रिक टन होने का अनुमान है.

भारत दूसरे स्थान पर, बांग्लादेश तीसरे नंबर पर

वैश्विक लीची उत्पादन मूल्य में भारत की हिस्सेदारी 1.56 अरब डॉलर है. इसके बाद बांग्लादेश 69 करोड़ डॉलर के उत्पादन मूल्य के साथ तीसरे स्थान पर है. वियतनाम 48 करोड़ डॉलर और थाइलैंड 38 करोड़ डॉलर के साथ क्रमशः चौथे और पांचवें स्थान पर हैं.

ICAR ने बताया, इंडोनेशिया का लीची उत्पादन मूल्य 30 करोड़ डॉलर, पाकिस्तान का 25 करोड़ डॉलर, फिलीपींस का 23 करोड़ डॉलर और नेपाल का 17 करोड़ डॉलर आंका गया है. म्यांमार भी 12 करोड़ डॉलर के उत्पादन मूल्य के साथ टॉप 10 देशों में शामिल है.

लीची से करोड़ों लोगों का रोजगार जुड़ा

रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में लीची क्षेत्र से 1.8 करोड़ से अधिक लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है. खेती, पैकेजिंग, प्रोसेसिंग, परिवहन और निर्यात जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में रोजगार पैदा होता है.

लीची केवल एक फल नहीं बल्कि कई देशों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है. खेतों से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक इसकी सप्लाई चेन लाखों किसानों और कारोबारियों को आय दिलाती है.

निर्यात बाजार में बढ़ रही मांग

ताजा लीची का निर्यात मुख्य रूप से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और यूरोपीय संघ के देशों में किया जाता है. स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरुकता और अधिक मूल्य वाले फलों की मांग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में लीची की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है.

विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर कोल्ड-चेन नेटवर्क, आधुनिक पैकेजिंग और निर्यात सुविधाओं को बढ़ाने से भारत सहित एशियाई देशों के लिए वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं हैं.

प्रमुख तथ्य

  • वैश्विक लीची उत्पादन मूल्य: 10.7 अरब डॉलर
  • वैश्विक उत्पादन: 34 लाख मीट्रिक टन
  • चीन की हिस्सेदारी: 58% से अधिक
  • भारत का उत्पादन मूल्य: 1.56 अरब डॉलर
  • लीची क्षेत्र से जुड़े लोग: 1.8 करोड़ से अधिक
  • प्रमुख निर्यात बाजार: यूएई, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और यूरोपीय संघ

लीची की वैश्विक अर्थव्यवस्था में एशिया का दबदबा कायम है और भारत तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है. उत्पादन, क्वालिटी और निर्यात इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार के साथ भारत आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में और बड़ी भूमिका निभा सकता है.

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