गुजरात में अल नीनो की आहट (AI- तस्वीर)आमतौर पर गुजरात में 15 जून के बाद मॉनसून दस्तक दे देता है, लेकिन इस बार हालात सामान्य नहीं है और अभी तक भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भी कोई आधिकारिक तारीख नहीं बताई हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि अल नीनो की वजह से गुजरात में मॉनसून में देरी हुई है और सामान्य से कम बारिश हो सकती है. अल नीनो की संभावित चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए गुरुवार को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इसके प्रभाव से निपटने के लिए राज्य की पूरी तैयारी की समीक्षा करने के लिए एक सर्वग्राही और उच्च स्तरीय बैठक बुलाई. इस बैठक में कृषि मंत्री जीतूभाई वाघाणी सहित कृषि, सिंचाई, जलापूर्ति, नर्मदा, वन और राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
इस महत्वपूर्ण बैठक के बाद जानकारी देते हुए कृषि मंत्री जीतूभाई वाघाणी ने कहा कि IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, अल नीनो की संभावित परिस्थिति से निपटने के लिए नागरिकों, किसानों और पशुधन के हित के लिए राज्य सरकार के सभी विभाग मिलकर अग्रिम योजना के साथ काम कर रहे हैं. बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य की मुख्य जीवनरेखा सरदार सरोवर नर्मदा बांध के अलावा राज्य के सभी क्षेत्रों के जलाशयों में संग्रहित पानी के भंडार की समीक्षा की. राज्य में पेयजल की कोई किल्लत न हो, इसके लिए जल संसाधन और जलापूर्ति विभाग को नर्मदा नेटवर्क के साथ जोड़कर अग्रिम आयोजन करने का आदेश दिया.
मुख्यमंत्री के आदेश के अनुसार, सौराष्ट्र में पीने के पानी के बांध में जल्द ही सौराष्ट्र नर्मदा अवतरण सिंचाई योजना (सौनी योजना) के माध्यम से भरा जाएगा. मुख्यमंत्री ने बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय करते हुए निर्देश दिए की पहले नर्मदा पाइप लाइन के 7 किलोमीटर के दायरे में आने वाले तालाब भी नर्मदा के पानी से भरे जाएंगे, जो पहले सिर्फ 3 किलोमीटर के दायरे तक के तालाबों तक सीमित था. इस निर्णय के अनुसार मुख्यमंत्री ने सुजलाम-सुफलाम योजना के जरिए उत्तर गुजरात के 300 से अधिक तालाबों को भरने का भी निर्देश दिया है.
इस साल की खरीफ सीजन के लिए राज्य में बीज और खाद का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है. कृषि विभाग ने अल नीनो की संभावित परिस्थिति में किसानों को मार्गदर्शन देने के लिए ‘आकस्मिक फसल योजना’ तैयार की है, जिसमें वैज्ञानिक सलाह और वैकल्पिक अल्पकालिक और कम पानी में उगने वाली फसलों की जानकारी किसानों के लिए उपलब्ध कराई जा रही है. इसके अलावा, कृषि विभाग सैटेलाइट के जरिए जमीन की नमी और फसल की सेहत पर नजर रख रहा है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) संचालित ‘कृषि प्रगति’ के माध्यम से 50 लाख से अधिक किसानों को सीधे उनके मोबाइल पर लाइव मौसम और कृषि सलाह के SMS भेजा जा रहा है.
किसानों के साथ-साथ राज्य के पशुधन की सुरक्षा भी सरकार की प्राथमिकता में शामिल है. कृषि मंत्री ने कहा कि संभावित अल नीनो की स्थिति में पशुओं के लिए चारे की कमी न हो, इसके लिए वन विभाग और पशुपालन विभाग को पर्याप्त मात्रा में चारे की व्यवस्था और बफर स्टॉक तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं. अभी राज्य सरकार के पास चारे का बफर स्टॉक उपलब्ध है, जो दो वर्षों के लिए काफी है. मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग को सभी जिला प्रशासनों और कलेक्टरों के साथ लगातार संपर्क में रहते हुए परिस्थिति पर चौबीसों घंटे, सातों दिन नजर रखने और पूरी तरह से सतर्क रहने को कहा है.
कृषि मंत्री ने कहा कि वर्ष 2000 से 2026 के दौरान राज्य में कुल 8 खरीफ अल नीनो वर्ष दर्ज किए गए हैं. पुराने डेटा बताते हैं कि हर अल नीनो वर्ष कमजोर नहीं होता. वर्ष 2006 और 2023 में अत्यंत तीव्र अल नीनो होने के बावजूद गुजरात में 117 फीसदी बारिश दर्ज हुई थी. इसलिए किसानों या जनता को चिंता करने या भ्रामक अफवाहों से भयभीत होने की जरूरत नहीं है. उन्होंने किसानों और नागरिकों से सरकार के निर्देशों का पालन करने को कहा. राज्य सरकार ने दावा किया कि समूचा प्रशासनिक तंत्र, अलग-अलग विभाग और कृषि यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक आपसी समन्वय के साथ लगातार काम कर रहे हैं. राज्य सरकार की तैयारी मजबूत है और सरकार किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए तैयार है. (बृजेश दोषी की रिपोर्ट)
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