कावेरी नदी के पानी को लेकर कर्नाटक-तमिलनाडु में विवाद जारी हैकावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) द्वारा तमिलनाडु को 15 दिनों तक हर दिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने के निर्देश के विरोध में शुक्रवार को किसानों और अलग-अलग कन्नड़ संगठनों ने कृष्णराज सागर (केआरएस) जलाशय के पास प्रदर्शन किया. स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने जिले में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की और करीब 1,500 पुलिसकर्मियों को तैनात किया.
प्रदर्शन में शामिल किसानों और कन्नड़ रक्षा वेदिके के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्राधिकरण ने कर्नाटक में कम बारिश और सूखे जैसी परिस्थितियों को नजरअंदाज किया है. प्रदर्शनकारियों ने प्रतीकात्मक विरोध के तौर पर घास खाई और कुछ लोगों ने सड़क पर लोटकर अपना विरोध जताया.
विरोध कर रहे किसानों का कहना है कि राज्य में पहले से ही पानी की कमी है और ऐसे समय में तमिलनाडु को पानी छोड़ने का फैसला किसानों के हितों के खिलाफ है. उन्होंने राज्य सरकार से इस आदेश का कड़ा विरोध करने और सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पक्ष रखने की मांग की.
इस बीच कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 2 अगस्त को सर्वदलीय बैठक बुलाई है, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी. वहीं, 3 अगस्त को डी.के. शिवकुमार और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के बीच बैठक होने की संभावना है. यह बैठक प्रत्यक्ष या वर्चुअल माध्यम से हो सकती है.
मंड्या की पुलिस अधीक्षक शोभा रानी वी.जे. ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिले में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं. अलग-अलग जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है और संवेदनशील इलाकों में बैरिकेडिंग की गई है. एहतियात के तौर पर बृंदावन गार्डन में आम लोगों के प्रवेश पर भी एक दिन के लिए रोक लगाई गई.
दूसरी ओर, तमिलनाडु के कुछ किसान संगठनों ने मुख्यमंत्री विजय के कर्नाटक दौरे का विरोध किया है. उनका कहना है कि यदि विजय कर्नाटक जाते हैं तो उन्हें कर्नाटक के नेताओं को तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा के प्रभावित धान उत्पादक क्षेत्रों का भी दौरा कराना चाहिए, ताकि वहां की स्थिति को समझा जा सके.
कावेरी जल बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है और सभी की नजरें आगामी सर्वदलीय बैठक और दोनों मुख्यमंत्रियों की संभावित मुलाकात पर टिकी हैं.
तमिलनाडु सरकार ने एक बयान में कहा है कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) ने तमिलनाडु की कुरुवई फसल को बचाने के लिए कर्नाटक को 15 दिनों तक रोजाना 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है. हालांकि, कर्नाटक सरकार ने इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया है और इसके खिलाफ अपील करने का फैसला किया है.
आलोचकों का कहना है कि जब कर्नाटक सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि वह तमिलनाडु को पानी नहीं छोड़ सकती, तब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय का कर्नाटक जाकर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से बातचीत करना राज्य के हित में नहीं होगा. उनका दावा है कि इस मुलाकात से तमिलनाडु को अतिरिक्त पानी मिलने की संभावना नहीं है.
कर्नाटक में कई कन्नड़ संगठनों ने भी तमिलनाडु को पानी छोड़ने का विरोध किया है. इसके खिलाफ कावेरी बेसिन के जिलों में बंद और विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है. इस मुद्दे पर चर्चा के लिए कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 2 अगस्त को सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है.
बताया गया है कि प्राधिकरण ने कर्नाटक को 15 दिनों में करीब 4.5 टीएमसी पानी छोड़ने का आदेश दिया है. यह मात्रा जून और जुलाई में तमिलनाडु को मिलने वाले पानी की तुलना में काफी कम है. इसके बावजूद कर्नाटक इस पानी को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है.
आंकड़ों के अनुसार, कावेरी और उसकी सहायक नदियों पर बने कर्नाटक के चार प्रमुख बांधों में फिलहाल 67 टीएमसी से अधिक पानी मौजूद है. इन बांधों में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में पानी भी आ रहा है. ऐसे में आदेश के मुताबिक पानी छोड़ने से जल भंडारण पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा. फिर भी कर्नाटक सरकार पानी छोड़ने को लेकर अपनी आपत्ति जता रही है.
विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि कावेरी जल विवाद में तमिलनाडु के अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए और मेकेदातु बांध परियोजना का भी विरोध जारी रहना चाहिए. उनका मानना है कि इन मुद्दों पर कर्नाटक सरकार के साथ किसी तरह की बातचीत से पहले तमिलनाडु के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. इसीलिए मुख्यमंत्री विजय से 3 अगस्त का प्रस्तावित कर्नाटक दौरा रद्द करने की मांग की जा रही है.(नागार्जुन द्वारकानाथ का इनपुट)
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