गांधीनगर में मंथन बैठक में शामिल हुए केंद्रीय और राज्यों के सहकारिता मंत्री (फोटो-X@AmitShah)केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि वर्ष 2047 तक भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने की प्रक्रिया में सहकारिता की भूमिका निर्णायक होगी. गुजरात की राजधानी गांधीनगर में ‘सहकार से समृद्धि’ के तहत आयोजित मंथन बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘विकसित भारत’ की अवधारणा केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध 140 करोड़ नागरिकों को सम्मानजनक जीवन से जोड़ने से है. बैठक में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्रियों के साथ सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने की कार्ययोजना, अन्न भंडारण, सहकारी बैंकों की भूमिका और बंद पड़ी चीनी मिलों के पुनरुद्धार जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई.
बैठक में केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कि हर परिवार और हर व्यक्ति को सम्मानजनक आजीविका से जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम सहकारिता ही बन सकती है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीते चार वर्षों से सहकारिता क्षेत्र को वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से मजबूत करने का प्रयास किया गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब जमीनी स्तर पर दिखने लगे हैं. कृषि, ग्रामीण विकास और पशुपालन जैसे क्षेत्रों को मजबूत किए बिना सर्वांगीण विकास संभव नहीं है और इन सभी क्षेत्रों की रीढ़ सहकारिता है.
बैठक का एक बड़ा फोकस अन्न भंडारण व्यवस्था पर रहा. केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में देश में अनाज भंडारण क्षमता को लगभग तीन गुना बढ़ाने की जरूरत है, जिसमें से कम से कम दो गुना विस्तार सहकारिता क्षेत्र को करना चाहिए. उन्होंने साफ किया कि यह जिम्मेदारी केवल PACS तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि तहसील स्तर की डेयरियां, राज्य स्तरीय मार्केटिंग फेडरेशन, जिला सहकारी बैंक, सेल्स और परचेज यूनियन सभी को बड़े आधुनिक गोदामों के निर्माण में भूमिका निभानी होगी.
अमित शाह ने बताया कि देश का लगभग 70 प्रतिशत अनाज उत्तर भारत, खासकर पंजाब और हरियाणा से खरीदा जाता है. अगर खरीद, भंडारण और वितरण एक ही क्षेत्र में समन्वित तरीके से किया जाए तो परिवहन लागत में 30 से 40 प्रतिशत तक की बचत संभव है. उन्होंने कहा कि पूरे देश में सर्वस्पर्शीय और संरेखित भंडारण व्यवस्था केवल सहकारिता क्षेत्र ही खड़ी कर सकता है.
बैठक में बंद पड़ी चीनी मिलों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा. अमित शाह ने राज्यों से अपील की कि वे निष्क्रिय पड़ी सहकारी चीनी मिलों को फिर से चालू करने के लिए ठोस कदम उठाएं. उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर एक नई कोऑपरेटिव बनाई गई है, जिसके माध्यम से कमजोर आर्थिक स्थिति वाली शुगर मिलों को मल्टी-प्रोडक्ट मॉडल से जोड़ा जाएगा.
शुगर के साथ-साथ खाद, गैस और अन्य उत्पादों का उत्पादन कर एक ही मिल से 11 प्रकार के उत्पाद तैयार करने का सफल प्रयोग किया जा चुका है. मार्च के पहले सप्ताह तक इसकी अंतिम कार्ययोजना तय की जाएगी, जिसके लिए राज्यों को लचीली नीतियां बनानी होंगी.
‘सहकारिता में सहकार’ यानी Cooperation Amongst Cooperatives पर जोर देते हुए अमित शाह ने कहा कि सभी सहकारी संस्थाओं के बैंक खाते जिला सहकारी बैंकों में होने चाहिए. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने यह निर्णय लिया है कि केंद्र की योजनाओं के क्रियान्वयन में कोऑपरेटिव बैंकों को नोडल एजेंसी बनाया जा सकता है. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, वृद्धावस्था पेंशन और अन्य सामाजिक योजनाओं की राशि सहकारी बैंकों के माध्यम से देने से इन संस्थानों की मजबूती बढ़ेगी और जमीनी स्तर तक प्रभावी क्रियान्वयन संभव होगा.
बैठक में यह भी कहा गया कि असंगठित क्षेत्र के वर्कर्स, जैसे कारपेंटर, प्लंबर और इलेक्ट्रिशियन, जो अक्सर शोषण का शिकार होते हैं, उनके लिए भी सहकारी मॉडल विकसित किया जाएगा, ताकि उन्हें सम्मानजनक पारिश्रमिक और सामाजिक सुरक्षा मिल सके. अमित शाह ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में देश की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी किसी न किसी रूप में सहकारिता से जुड़ जाएगी.
बैठक के दौरान इथेनॉल, एनर्जी, जैविक पोटाश, वेयरहाउस और प्रोटीन पाउडर प्लांट से जुड़ी 265 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया गया. साथ ही सहकारिता की बेस्ट प्रैक्टिसेज और अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष पर आधारित रिपोर्ट का विमोचन किया गया.
मंथन बैठक में राष्ट्रीय स्तर की नई सहकारी संस्थाओं जैसे नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड, नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक लिमिटेड और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड में राज्यों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया गया. निर्यात, जैविक खेती और गुणवत्तापूर्ण बीज आपूर्ति के क्षेत्र में सहकारिता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की रणनीति पर भी चर्चा हुई.
बैठक में PACS और RCS कार्यालयों के कंप्यूटरीकरण, राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस के उपयोग, प्रशिक्षण, मानव संसाधन विकास और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन जैसे मुद्दों पर भी राज्यों से अपेक्षाएं साझा की गईं. अमित शाह ने अंत में कहा कि भारत टैक्सी जैसी सहकारी पहलें तेजी से विस्तार कर रही हैं और आने वाले समय में हर म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन वाले शहर तक पहुंचेंगी. तीन लाख से ज्यादा ड्राइवर इससे जुड़ चुके हैं, जिससे सहकारिता के माध्यम से रोजगार और सम्मान दोनों सुनिश्चित हो रहे हैं.
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