GM Mustard: जीएम सरसों को मंजूरी देने के करीब सरकार! जानिए इस पर छिड़े पूरे विवाद के बारे में भी  

GM Mustard: जीएम सरसों को मंजूरी देने के करीब सरकार! जानिए इस पर छिड़े पूरे विवाद के बारे में भी  

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के हवाले से बताया है कि भारत सरकार जीएम सरसों हाइब्रिड को मंजूरी देने के करीब है. बुधवार को SEA के सदस्यों को लिखे अपने महीने के लेटर में, संगठन के प्रेसिडेंट संजीव अस्थाना ने कहा कि ऐसा कदम भारत की एग्री-बायोटेक्नोलॉजी पॉलिसी में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है. उनका कहना था कि यह मंजूरी बड़े पैमाने पर बायोसेफ्टी असेसमेंट और फील्ड ट्रायल के बाद दी गई है.

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GM Mustard: जीएम सरसों को मंजूरी देने के करीब सरकार! जानिए इस पर छिड़े पूरे विवाद के बारे में भी  

जेनेटिकली मोडीफाइड फसलें यानी जीएम क्रॉप्‍स को लेकर बवाल जारी है. लेकिन इसी बवाल के बीच एक खबर आ रही है कि भारत सरकार की तरफ से जीएम सरसों को जल्‍द ही मंजूरी मिलने वाली है. अगर ऐसा हुआ तो फिर यह देखना होगा के आखिर किसान संगठन इस पर क्‍या रुख अपनाते हैं क्‍योंकि उनकी तरफ से सरकार को ऐसा कदम न उठाने के लिए आगाह किया गया है. सरसों, भारत का सबसे बड़ा देसी खाने का तेल है. इसकी खेती करीब नौ मिलियन हेक्टेयर में होती है. राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पश्चिम बंगाल वो प्रमुख राज्‍य हैं, जहां पर इसकी खेती की जाती है. 

फील्‍ड ट्रायल और सेफ्टी का दावा 

अखबार बिजनेसलाइन ने सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के हवाले से बताया है कि भारत सरकार जीएम सरसों हाइब्रिड को मंजूरी देने के करीब है. बुधवार को SEA के सदस्यों को लिखे अपने महीने के लेटर में, संगठन के प्रेसिडेंट संजीव अस्थाना ने कहा कि ऐसा कदम भारत की एग्री-बायोटेक्नोलॉजी पॉलिसी में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है. उनका कहना था कि यह मंजूरी बड़े पैमाने पर बायोसेफ्टी असेसमेंट और फील्ड ट्रायल के बाद दी गई है. साथ ही उन्‍होंने उम्‍मीद जताई कि इसमें ज्‍यादा पैदावार, बेहतर बीमारी सहने की क्षमता और बेहतर तेल रिकवरी जैसे गुणों पर ध्यान दिया जाएगा. जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलें ऐसी प्रजातियां हैं जिनके डीएनए में बदलाव करके मनचाही खासियतों वाली नई किस्म बनाई गई है. 

सुप्रीम कोर्ट में अटका मामला 

जुलाई 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मसले पर विभाजित फैसला सुनाया था. न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति संजय करोल की खंडपीठ ने मामले में दो अलग-अलग फैसले सुनाए थे. न्यायमूर्ति नागरत्ना ने भारत में जी.एम. सरसों की व्यावसायिक बिक्री और रिलीज की अनुमति देने के खिलाफ फैसला सुनाया तो वहीं न्यायमूर्ति करोल ने इससे असहमति जता. उन्‍होंने जीएम सरसों की वाणिज्यिक बिक्री को मंजूरी देने के जीईएसी के फैसले को बरकरार रखा था. जीएम सरसों का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है. 

किसानों ने लिखी चिट्ठी 

इस मसले पर सितंबर 2025 में किसानों की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखी गई है. चिट्ठी में किसानों ने सरकार को जीएम फसलों को लेकर आगाह किया गया था. किसानों का कहना है कि आत्‍मनिर्भर भारत कभी भी विदेशी जीन पर आगे नहीं बढ़ सकता है. चिट्ठी में किसानों ने जीएम सरसों को लेकर सरकार को चेतावनी दी है और इसे जल्‍दबाजी में जारी न करने के लिए कहा है. किसानों की मानें तो यह कदम बायो-सिक्‍योरिटी, फेडरल बैलेंस (संघीय संतुलन) और न्‍यायिक तर्क को खतरे में डालने वाला है. 

क्‍या सोचते हैं वैज्ञानिक

इस पूरे मामले पर देश के कई सीनियर साइंटिस्‍ट्स की तरफ से भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी गई है. इस चिट्टी में वैज्ञानिकों ने जीएम सरसों पर लगी रोक हटाने की अपील की है. इन साइंटिस्‍ट्स की मानें तो सरकार से देश के सर्वोत्तम हित में, जरूरी डाक्‍यूमेंट्स के साथ, जीएम फसलों के लिए एक स्पष्ट नीतिगत ढांचा अदालत में पेश करने की जरूरत है. साइंटिस्‍ट्स का कहना है कि अक्टूबर 2022 में, भारत के पर्यावरण मंत्रालय ने हाइब्रिड बीज उत्पादन के लिए जीएम सरसों को मंजूरी दे दी थी. इसके तहत पहला हाइब्रिड डीएमएच-11 भी शामिल है. हालांकि, यह प्रक्रिया तब से ही कई कानूनी विवादों में फंसी हुई है जिससे और देरी हो रही है. 

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