Wheat Production: अमेरिका की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता, दुनिया में गेहूं सप्लाई पर पड़ सकता है असर

Wheat Production: अमेरिका की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता, दुनिया में गेहूं सप्लाई पर पड़ सकता है असर

USDA की ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस साल वैश्विक गेहूं उत्पादन में बड़ी गिरावट की आशंका है. अमेरिका, भारत, चीन और अन्य प्रमुख उत्पादक देशों में मौसम संबंधी चुनौतियों के कारण उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की कीमतें बढ़ने और महंगाई का दबाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.

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Wheat Production: अमेरिका की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता, दुनिया में गेहूं सप्लाई पर पड़ सकता है असरदुनिया में घट सकता है गेहूं उत्पादन

वैश्विक स्तर पर गेहूं उत्पादन को लेकर चिंताजनक संकेत मिल रहे हैं. अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस साल दुनिया के अधिकांश प्रमुख गेहूं उत्पादक देशों में उत्पादन में गिरावट दर्ज की जा सकती है. हालांकि यह फिलहाल अनुमान है, लेकिन कई एजेंसियों ने इस आशंका को मजबूत माना है.

USDA के मुताबिक, वैश्विक गेहूं उत्पादन में करीब 25 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी, 250 लाख टन) की कमी आ सकती है. इसमें सबसे अधिक गिरावट अमेरिका में होने की संभावना है, जहां उत्पादन 12 एमएमटी तक घट सकता है. इसके अलावा चीन में करीब 1 एमएमटी और भारत में लगभग 3 एमएमटी की कमी का अनुमान लगाया गया है.

सूखे और पाले का असर

यह आकलन USDA की ‘क्रॉप प्रोग्रेस रिपोर्ट’ के बाद सामने आया है, जिसमें बताया गया है कि अमेरिका के दक्षिणी मैदानी इलाकों में सूखे और पाले के चलते करीब 40 प्रतिशत गेहूं फसल को ‘खराब’ या ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रखा गया है. यह स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि अमेरिका में गेहूं से जुड़े उत्पादों का बड़े पैमाने पर घरेलू इस्तेमाल और निर्यात होता है.

अमेरिका के अलावा चीन, भारत, रूस, यूक्रेन, अर्जेंटीना और यूरोपीय देशों जैसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में भी स्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं. इन देशों में संभावित गिरावट वैश्विक मांग-आपूर्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है. आमतौर पर जब गेहूं की कमी होती है, तो चीन, भारत, रूस और यूक्रेन जैसे देश बाजार को संभालते हैं, लेकिन इस बार ये देश खुद उत्पादन दबाव का सामना कर रहे हैं. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की कीमतें बढ़ने और सप्लाई बाधित होने की आशंका जताई जा रही है.

भारत में बड़ा नुकसान

भारत को लेकर भी तस्वीर पूरी तरह संतोषजनक नहीं दिख रही है. ‘रॉयटर्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, कटाई से ठीक पहले हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण उत्पादन प्रभावित हो सकता है. इससे सरकार के उत्पादन बढ़ने के अनुमान पर भी असर पड़ने की आशंका है. अनुमान है कि देश में इस बार गेहूं उत्पादन 2025 के स्तर से 5 से 10 प्रतिशत तक कम रह सकता है.

हालांकि कृषि मंत्रालय ने इन आशंकाओं को पूरी तरह खारिज नहीं किया है, लेकिन स्थिति को संतुलित बताया है. मंत्रालय के अनुसार, रबी सीजन के अंत में मौसम की चुनौतियों के बावजूद किसानों की बेहतर तैयारी और समय पर बुवाई ने फसल को काफी हद तक संभाले रखा. इस साल गेहूं की बुवाई बढ़कर करीब 33.4 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई और किसी बड़े कीट या बीमारी का प्रकोप भी सामने नहीं आया.

इसके बावजूद बाजार से जुड़े विशेषज्ञ सतर्क रुख अपनाए हुए हैं. उनका कहना है कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में कटाई के दौरान सामान्य से अधिक बारिश ने फसल की क्वालिटी पर असर डाला है. ये राज्य देश के कुल गेहूं उत्पादन में 80 प्रतिशत से अधिक योगदान देते हैं.

सभी देशों में घटेगा उत्पादन

सरकार ने वर्ष 2026 के लिए 120.21 मिलियन मीट्रिक टन गेहूं उत्पादन का रिकॉर्ड लक्ष्य रखा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक उत्पादन इससे कम रह सकता है. कुछ आकलनों में 5 प्रतिशत गिरावट के साथ उत्पादन 117.9 मिलियन टन के आसपास रहने की संभावना जताई गई है, जबकि अन्य अनुमान इसे 106.1 मिलियन टन तक गिरा रहे हैं—जो पिछले सात वर्षों में सबसे कम स्तर हो सकता है.

हालांकि USDA का आकलन ‘रॉयटर्स’ की तुलना में कुछ राहत देने वाला है, क्योंकि उसने भारत में गिरावट करीब 3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. इसी तरह पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी उत्पादन में कमी के संकेत हैं.

कुल मिलाकर, वैश्विक स्तर पर घटते उत्पादन के संकेतों ने गेहूं और उससे जुड़े उत्पादों की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में इसका सीधा असर महंगाई के रूप में देखने को मिल सकता है, जिससे उपभोक्ताओं और सरकार दोनों के सामने चुनौती बढ़ सकती है.

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