खेती में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर, दिल्ली में खत्म हुआ वैश्विक सम्मेलन

खेती में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर, दिल्ली में खत्म हुआ वैश्विक सम्मेलन

नई दिल्ली में आयोजित GCWAS–2026 सम्मेलन का समापन महिलाओं को कृषि और खाद्य प्रणालियों में सशक्त बनाने के संकल्प के साथ हुआ. ICAR ने 900 से अधिक कृषि संस्थानों को जोड़ने वाले राष्ट्रीय जेंडर प्लेटफॉर्म की घोषणा की. सम्मेलन में महिलाओं की नेतृत्व भूमिका, तकनीक तक पहुंच और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ाने पर जोर दिया गया.

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खेती में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर, दिल्ली में खत्म हुआ वैश्विक सम्मेलनमहिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम

नई दिल्ली में आयोजित Global Conference on Women in Agri-Food Systems (GCWAS–2026) का समापन शनिवार को हुआ. यह तीन दिन का बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन था जिसमें दुनिया के कई देशों के विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, नीति निर्माता और किसान शामिल हुए. इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य कृषि और खाद्य प्रणाली में महिलाओं की भूमिका को मजबूत बनाना और उन्हें आगे बढ़ाने के रास्ते तलाशना था. सम्मेलन के समापन समारोह में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एम. एल. जाट मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे.

महिलाओं को मजबूत बनाने की जरूरत

सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि खेती और कृषि से जुड़े कामों में महिलाओं की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है. गांवों में खेतों में काम करने वाली बड़ी संख्या में महिलाएं होती हैं, लेकिन उन्हें अक्सर वह पहचान और अवसर नहीं मिलते जिसके वे हकदार हैं. इसलिए जरूरी है कि महिलाओं को खेती से जुड़ी जानकारी, तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार तक पहुंच दी जाए. जब महिलाएं मजबूत होंगी तो खेती भी मजबूत होगी और देश की खाद्य सुरक्षा भी बेहतर होगी.

आईसीएआर बनाएगा राष्ट्रीय जेंडर प्लेटफॉर्म

डॉ. एम. एल. जाट ने बताया कि ICAR एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है. इसके तहत एक राष्ट्रीय जेंडर प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा. यह प्लेटफॉर्म देश के 900 से ज्यादा कृषि संस्थानों को आपस में जोड़ेगा. इसमें ICAR के संस्थान, कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) शामिल होंगे. इसका मकसद महिलाओं के लिए प्रशिक्षण, शोध और नई तकनीक को बढ़ावा देना है. इस प्लेटफॉर्म की मदद से महिलाओं को खेती से जुड़ी जानकारी और फैसले लेने की ताकत मिलेगी.

दिल्ली घोषणा पत्र को अपनाया गया

सम्मेलन में एक अहम फैसला भी लिया गया जिसे “दिल्ली डिक्लेरेशन” कहा गया. इस घोषणा पत्र में यह तय किया गया कि दुनिया भर में महिलाओं को कृषि और खाद्य प्रणाली में आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम किया जाएगा. इसमें महिलाओं को जमीन, पैसा, तकनीक, बाजार और डिजिटल साधनों तक पहुंच दिलाने की बात कही गई. इसके साथ ही महिलाओं के नेतृत्व और उद्यमिता को भी बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया.

खेती में महिलाओं का बड़ा योगदान

सम्मेलन में विशेषज्ञों ने बताया कि खेती के काम में महिलाओं की भागीदारी बहुत ज्यादा है. कई जगहों पर खेतों में काम करने वालों में 60 से 70 प्रतिशत महिलाएं होती हैं. इसके बावजूद कई बार उन्हें सही पहचान नहीं मिलती. इसलिए जरूरी है कि महिलाओं को प्रशिक्षण, कर्ज, बाजार और नई तकनीक तक आसान पहुंच दी जाए. इससे खेती की उत्पादकता भी बढ़ेगी और किसानों की आय भी बेहतर होगी.

तकनीक और नई सोच पर हुई चर्चा

सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए. इन सत्रों में महिलाओं के नेतृत्व, नई तकनीकों के उपयोग, बाजार तक पहुंच, आर्थिक सशक्तिकरण और युवाओं की भूमिका पर चर्चा हुई. विशेषज्ञों ने बताया कि अगर महिलाओं को नई तकनीक और डिजिटल साधनों का सही उपयोग सिखाया जाए तो वे खेती में और बेहतर काम कर सकती हैं.

दुनिया के कई देशों की भागीदारी

इस सम्मेलन में दुनिया के 18 देशों के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया. कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से जुड़े विशेषज्ञों ने भी अपने विचार साझा किए. उन्होंने बताया कि अगर महिलाएं मजबूत होंगी तो कृषि और खाद्य प्रणाली भी ज्यादा मजबूत और टिकाऊ बनेगी. अलग-अलग देशों के अनुभवों को साझा किया गया ताकि सभी मिलकर बेहतर समाधान खोज सकें.

महिलाओं के लिए नए अवसर बनाने की जरूरत

सम्मेलन में यह भी कहा गया कि महिलाओं को खेती के साथ-साथ छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए भी प्रोत्साहित करना चाहिए. बीज उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि से जुड़े अन्य क्षेत्रों में महिलाएं सफल उद्यमी बन सकती हैं. इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ना जरूरी है.

कृषि के भविष्य में महिलाओं की अहम भूमिका

सम्मेलन में यह निष्कर्ष निकला कि महिलाओं को सशक्त बनाए बिना कृषि का विकास संभव नहीं है. महिलाओं को निर्णय लेने में शामिल करना, उनकी शिक्षा और कौशल को बढ़ाना और उन्हें नई तकनीकों से जोड़ना बहुत जरूरी है. इससे न केवल कृषि क्षेत्र मजबूत होगा बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास भी तेजी से होगा.

इस तरह GCWAS–2026 सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि अगर दुनिया को मजबूत और टिकाऊ खाद्य प्रणाली बनानी है तो महिलाओं को कृषि के केंद्र में रखना होगा.

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