हरियाणा मॉडल से सब्सिडी में ₹700 करोड़ की बचतहरियाणा सरकार ने किसानों के लिए उर्वरक (fertiliser) खरीदने का एक नया तरीका अपनाया है. इसे “हरियाणा मॉडल” कहा जाता है. इसमें अब किसान सीधे अपनी फसल और खेत के हिसाब से उर्वरक खरीद सकते हैं. इस योजना में खरीदारी को डिजिटल तरीके से जोड़ा गया है. किसान, परिवार का सदस्य या खेती करने वाला व्यक्ति पोर्टल पर रजिस्टर होकर पीओएस (PoS) मशीन से उर्वरक ले सकता है. सीधे खरीद पर बायोमेट्रिक (fingerprint) से पहचान होती है, और परिवार के सदस्य द्वारा खरीद पर एसएमएस के जरिए ओटीपी की पुष्टि होती है.
हरियाणा में पिछले रबी सीजन में इस मॉडल से यूरिया की खपत 1,25,986 टन और डीएपी 23,489 टन कम हुई. इससे सरकार को करीब ₹700.53 करोड़ की सब्सिडी बचत हुई. इसका मतलब है कि पहले किसान या बड़े खरीदार जरूरत से ज्यादा उर्वरक ले लेते थे. नया सिस्टम इससे रोकने में मदद करता है और छोटे किसानों तक उर्वरक आसानी से पहुँचता है.
हरियाणा में पायलट प्रोजेक्ट तीन चरणों में किया गया. पहले चरण में खुले बिक्री के साथ निगरानी की गई. दूसरे चरण में सक्रिय निगरानी और तीसरे में खरीदारों की सीमित संख्या और जोखिम प्रबंधन के उपाय अपनाए गए. इन सभी चरणों में देखा गया कि बड़े खरीदारों ने कम मात्रा में उर्वरक लिया और छोटे खरीदारों ने अधिक संख्या में खरीदी की.
इस मॉडल से छोटे खरीदारों की संख्या बढ़ी, जो 10 बैग से कम उर्वरक लेते हैं, उनकी संख्या लगभग 50 प्रतिशत हो गई. 10 से 20 बैग लेने वालों का हिस्सा 37.8 प्रतिशत रहा. वहीं बड़े खरीदारों में कमी आई. 40 से 50 बैग लेने वालों में 35 प्रतिशत और 30 से 40 बैग लेने वालों में 10.5 प्रतिशत की कमी हुई. कुल मिलाकर यूरिया की खपत 10.9 प्रतिशत और डीएपी की खपत 24.9 प्रतिशत कम हुई.
केंद्र सरकार ने कहा है कि इस मॉडल को तुरंत अन्य राज्यों में लागू नहीं किया जाएगा. अभी यह पायलट प्रोजेक्ट शुरुआती चरण में है और इसे स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करना होगा. आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्य इसे अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं. विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि इस सिस्टम से उर्वरक की बर्बादी कम होगी और किसानों को अधिक लाभ मिलेगा.
हरियाणा मॉडल ने दिखाया कि डिजिटल पहचान और फसल आधारित खरीद से उर्वरक की खपत नियंत्रित की जा सकती है. छोटे किसानों को अधिक लाभ मिलता है और बड़े खरीदार जरूरत से ज्यादा उर्वरक नहीं ले पाते. हालांकि, पूरे देश में इसे लागू करने में समय लगेगा. इस पायलट से यह भी पता चला कि सरकार की नई योजना से सब्सिडी बचत होती है और उर्वरक अधिक न्यायसंगत तरीके से वितरित होता है.
इस तरह, हरियाणा मॉडल किसानों के लिए सस्ता और सही मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने में सफल रहा है और आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है.
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