फूड फोर्टिफिकेशन है जरूरीखाद्यान्न उत्पादन में अव्वल होने के बाद भी भारत को फोर्टिफाइड अनाज की जरूरत लगातार पड़ रही है. इसको समझने के लिए सबसे पहले यह समझने की जरूरत है कि आखिरकार यह फोर्टिफाइड फूड होता क्या है और क्यों सरकार इसे बढ़ावा दे रही है. आपको बता दें फूड फोर्टिफिकेशन एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से खाद्य पदार्थो में आर्टिफिशियल तरीके से पौष्टिक तत्व डाला जाता है ताकि खाने में पोषक तत्व को बढ़ाया जा सके. उदाहरण स्वरूप जैसे नमक में आयोडीन (Iodine in Salt) मिलाया जाता है. यह इसलिए भी किया जाता है क्योंकि खाद्य पदार्थ की प्रोसेसिंग करते समय जब उसके अंदर के प्राकृतिक पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, तो उसे वापस मिलाया जाता है और इसी प्रक्रिया को फूड फोर्टिफिकेशन कहते हैं.
फूड फोर्टिफिकेशन WHO और FAO की दुनिया भर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने की एक नीति है. गरीबी रेखा और खान-पान में पोषक तत्वों के महत्व को ना समझते हुए हम कई बार एक ही तरह का खाना खाते हैं जिस वजह से शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाता है. जिस वजह से हम कुपोषण का शिकार होते हैं.
भारत की बात अगर की जाए तो आज भी यहां कुपोषण एक चिंता का कारण है. यह एक गंभीर समस्या है जिससे भारत हमेशा लड़ता आया है. 14 अक्टूबर 2022 को जारी ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2022 में भारत को 121 देशों में से 107वां स्थान मिला है. वहीं 2021 में भारत की स्थिति 116 देशों में 101वें स्थान पर थी. भारत की स्थिति पड़ोसी देशों से भी खराब चल रही है और यह एक गंभीर चिंता का विषय है. ग्लोबल हंगर इंडेक्स दुनिया भर में भूख के स्तर और कुपोषण की गणना करता है. ऐसे में भारत के लिए यह जरूरी है कि वह फोर्टिफाइड अनाजों को बढ़ावा दे ताकि इस समस्या से छुटकारा मिल सके.
ये भी पढ़ें: अब कुपोषण से जंग के लिए गेहूं, चावल की बायोफोर्टिफाइड किस्मों पर होगा फोकस
फूड फोर्टिफिकेशन की सूची में मुख्य रूप से विटामिन और मिनरल वाले पदार्थ शामिल हैं, जैसे आयरन, आयोडीन, जिंक, विटामिन ए, डी और प्रमुख भोजन जैसे चावल, गेहूं, तेल, दूध और नमक जो न्यूट्रिशन को बढ़ाने में मदद करता है. ऐसे में अगर देखा जाए तो भारत फोर्टिूफाइड अनाज का प्रमुख उत्पादक देश है लेकिन फिर भी कुपोषण की चपेट में है.
भारत चावल और गेहूं का सबसे बड़ा उत्पादक देश हैं. वहीं दूध और डेयरी उत्पादों की बात करें तो इसमें भी भारत अव्वल है. लेकिन फिर भी भारत कुपोषण का शिकार होता जा रहा है. इसको रोकने के लिए भारत सरकार पीडीएस के माध्यम से फोर्टि फाइड अनाजों का वितरण करवा रही है.
ये भी पढ़ें: महाराष्ट्र में सबसे अधिक खेतों को नहीं मिल पाता सिंचाई का पानी, दूसरे नंबर पर राजस्थान
पीडीएस एक सार्वजनिक वितरण प्रणाली है जहां कम कीमत पर अनाज के वितरण और आपातकालीन स्थितियों में प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया गया है. इस माध्यम से सरकार हर राज्य में कम कीमतों पर फोर्टिफाइड अनाजों का वितरण करवा रही है. इसके तहत छत्तीसगढ़, राजस्थान और झारखंड जैसे राज्य शामिल है. हालांकि झारखंड में पीडीएस के हालात गंभीर हैं. यहां पीडीएस के माध्यम से चावल का वितरण किया जा रहा है ताकि गरीबी रेखा से नीचे आने वाले लोगों को चावल के माध्यम से पोशाक तत्व मिल सके. वहीं यह भी खबर मिल रही है कि साल 2024 तक यूपी भी इसमे शामिल होने वाला है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today